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UP: 4200 शिक्षक-कर्मचारियों के NPS का पैसा निजी बीमा बैंकों में लगाया, 1 फीसदी कमीशन का लालच; पढ़ें पूरा मामला

Tue, 21 Nov 2023 09:56 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 21 Nov 2023 09:56 AM IST
सार

शासन ने इस मामले की जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। शासन के निर्णय के अनुसार एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त/कार्यरत शिक्षक व कर्मचारियों के वेतन से की गई कटौती व सरकार का अंश, निर्धारित बीमा कंपनियों में जमा करना था। 

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NPS money of 4200 teacher-employees invested in private insurance banks, FIR instructions
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

विस्तार

प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक (एडेड) विद्यालयों में एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त/कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों के न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के पैसे की कटौती में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारियों की मिलीभगत से 25 जिलों के 4200 से अधिक शिक्षक-कर्मचारियों का पैसा नियम विपरीत प्राइवेट बीमा कंपनियों में जमा कर दिया। 
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शासन ने इस मामले की जांच कराकर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। शासन के निर्णय के अनुसार एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त/कार्यरत शिक्षक व कर्मचारियों के वेतन से की गई कटौती व सरकार का अंश, निर्धारित बीमा कंपनियों में जमा करना था। 
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किंतु दो दर्जन से अधिक जिलों में विभागीय नियमों के विपरीत संबंधित कर्मियों की सहमति के बिना ही यह पैसा प्राइवेट बीमा बैंकों में जमा कर दिया गया। शिक्षकों ने जब इसकी जानकारी अधिकारियों को दी तो उनके हाथ-पांव फूल गए।
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शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक, डीआईओएस व वित्त एवं लेखाधिकारी को 25 जिलों की सूची भेजी है। इसमें उन्होंने कहा है कि इन जिलों में एक अप्रैल 2022 से आठ नवंबर 2023 के बीच के 4257 परमानेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर (प्रान) के मामले सामने आए हैं। 
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संबंधित अधिकारी खुद अपने कार्यालयों के माध्यम से इसकी जांच कराकर तत्काल संबंधित अधिकारी/पटल सहायक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएं। साथ ही उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करके भी निदेशालय को सूचित करें।
 

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष डॉ. आरपी मिश्रा ने कहा कि यह पूरा मामला कमीशनखोरी का है। प्राइवेट बैंक में एक फीसदी कमीशन मिलता है। सिर्फ लखनऊ की बात करें तो 25 करोड़ राशि का एक फीसदी कमीशन संबंधित को मिला होगा। विभाग ही नहीं एसटीएफ से इस मामले की जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो। यह भी देखा जाए कि इससे पहले की तो राशि में गड़बड़ी नहीं की गई है।
 

ये हैं 25 जिले
लखनऊ, बाराबंकी, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, कुशीनगर, गौतमबुद्ध नगर, इटावा, बुलंदशहर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बलरामपुर, काशगंज, बिजनौर, झांसी, रामपुर, देवरिया, गाजियाबाद, अलीगढ़, अंबेडकर नगर, चित्रकूट, फतेहपुर, मेरठ, आगरा, सोनभद्र

क्या कहता है नियम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त/कार्यरत शिक्षक-कर्मचारियों के मूल वेतन का 10 फीसदी और सरकार का 14 फीसदी अंश एनएसडीएल के माध्यम से निर्धारित एसबीआई, एलआईसी या यूपीआई में जमा किया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को लिंक व पासवर्ड दिया गया है। वहीं संबंधित अंशधारक की सहमति से इसे अन्य प्राइवेट बीमा बैंक में जमा कर सकते हैं। वहीं संबंधित शिक्षक-कर्मचारी, अपने प्रान नंबर से इसकी जानकारी कर सकेंगे। अंशधारक के सेवानिवृत्त होने पर उन्हें इसी से निर्धारित पेंशन मिलेगी।
 

शिक्षक संगठनों में नाराजगी, सभी कॉलेजों की जांच की मांग
बिना सहमति शिक्षक-कर्मचारियों के एनपीएस का पैसा दूसरे बीमा बैंकों में जमा करने से शिक्षक संगठनों में काफी नाराजगी है। राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पांडेय ने कहा कि अभी यह मामला सिर्फ एडेड कॉलेजों का सामने आया है। शासन राजकीय कॉलेजों की भी जांच कराए। यहां के शिक्षक-कर्मचारियों का भी पैसा कहीं गलत जगह तो नहीं जमा किया गया है।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रांतीय संयोजक संजय द्विवेदी ने कहा कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की जाए। इसमें विभागीय अधिकारियों की भी मिलीभगत सामने आएगी। बिना अधिकारियों की मिलीभगत के नीचे का कर्मचारी पैसे को निजी बीमा बैंकों में नहीं निवेश कर सकते हैं।
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