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Lucknow News: अब शहर में मनमाने तरीके से नहीं लगाए जा सकेंगे होर्डिंग
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शहर में लगे होर्डिंग।
लखनऊ। नगर निगम ने होर्डिंग लगाने के लिए नई प्रचार नियमावली लागू कर दी है। यह नियमावली उत्तर प्रदेश नगर निगम, आकाश चिह्न और विज्ञापनों का विनियमन नियमावली-2026 के तहत बनाई गई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद इसका प्रकाशन दो फरवरी को हुआ था। इस नियमावली का उद्देश्य कमाई के लिए लगने वाले खतरनाक होर्डिंगों पर रोक लगाना और मनमानी को खत्म करना है।
अब शहर में होर्डिंग कहां और किस प्रकार के लगेंगे, यह एक तकनीकी समिति तय करेगी। नगर आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में नौ विभागों के 12 अधिकारी और दो विशेषज्ञ सहित 15 सदस्य शामिल हैं। समिति का काम होर्डिंग लगाने के ठेके देने और दरें तय करने में पारदर्शिता लाना है। केवल नगर निगम से प्रचार लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति ही होर्डिंग लगवा सकेंगे। आपत्तिजनक, भड़काऊ या जानलेवा होर्डिंग बिना किसी पूर्व सूचना के हटाए जा सकेंगे। तकनीकी समिति ने शनिवार को अपनी पहली बैठक की। यह समिति सर्वे कर होर्डिंग के सही स्थान, यूनीपोल, एलईडी होर्डिंग और छत पर लगने वाले होर्डिंग के नियम तय करेगी। होर्डिंग के आकार और क्षेत्र के अनुसार प्रचार शुल्क की दरें भी यही समिति निर्धारित करेगी।
ठेके की अवधि और आवंटन
नई नियमावली के तहत प्रचार के ठेके अब दो वर्ष के बजाय नौ वर्ष के लिए उठाए जाएंगे। इन्हें तीन वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकेगा। इससे ठेका लेने वाली एजेंसियां प्रचार शुल्क जमा करने या अवैध होर्डिंग लगाने में मनमानी नहीं कर पाएंगी। प्रचार शुल्क जमा न करने पर नगर निगम आरसी भी काट सकेगा। अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक आवंटन समिति भी गठित की जाएगी। इसमें नगर निगम के मुख्य अभियंता सिविल, प्रभारी अधिकारी विज्ञापन, वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी और राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
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सलाहकार समिति और शुल्क निर्धारण
महापौर पार्षदों और आवासीय समितियों के प्रतिनिधियों की तीन सदस्यीय एक सलाहकार समिति बनाएंगी। यह समिति तकनीकी समिति को होर्डिंग संबंधी सुझाव देगी। तकनीकी समिति के तय प्रचार शुल्क सदन से कराए जाएंगे। प्रचार अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो जाएगी। इसके बाद सभी ठेके नई नियमावली के अनुसार ही उठाए जाएंगे। नगर निगम अपने स्तर पर तय करेगा कि किस सड़क पर विज्ञापन शुल्क क्या होगा और कौन सा इलाका किस श्रेणी में आएगा।
मौजूदा नियमों का उल्लंघन
वर्तमान में कई होर्डिंग नियमों का उल्लंघन कर लगाए गए हैं। नियम है कि चौराहे के मोड़ या चौराहे से 20 मीटर के दायरे में होर्डिंग नहीं लगेंगे। होर्डिंग यातायात में बाधा न डालें और उनका ढांचा मजबूत हो, यह भी अनिवार्य है। हालांकि, सूचना विभाग, मेट्रो और विभिन्न राजनीतिक दलों ने मनमाने तरीके से होर्डिंग लगाए हैं। वीआईपी इलाकों में भी कई खतरनाक होर्डिंग लगे हैं। नो होर्डिंग जोन और प्रतिबंधित स्थानों पर भी कमाई के लिए होर्डिंग लगाए गए हैं।
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अब शहर में होर्डिंग कहां और किस प्रकार के लगेंगे, यह एक तकनीकी समिति तय करेगी। नगर आयुक्त की अध्यक्षता वाली इस समिति में नौ विभागों के 12 अधिकारी और दो विशेषज्ञ सहित 15 सदस्य शामिल हैं। समिति का काम होर्डिंग लगाने के ठेके देने और दरें तय करने में पारदर्शिता लाना है। केवल नगर निगम से प्रचार लाइसेंस प्राप्त व्यक्ति ही होर्डिंग लगवा सकेंगे। आपत्तिजनक, भड़काऊ या जानलेवा होर्डिंग बिना किसी पूर्व सूचना के हटाए जा सकेंगे। तकनीकी समिति ने शनिवार को अपनी पहली बैठक की। यह समिति सर्वे कर होर्डिंग के सही स्थान, यूनीपोल, एलईडी होर्डिंग और छत पर लगने वाले होर्डिंग के नियम तय करेगी। होर्डिंग के आकार और क्षेत्र के अनुसार प्रचार शुल्क की दरें भी यही समिति निर्धारित करेगी।
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ठेके की अवधि और आवंटन
नई नियमावली के तहत प्रचार के ठेके अब दो वर्ष के बजाय नौ वर्ष के लिए उठाए जाएंगे। इन्हें तीन वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकेगा। इससे ठेका लेने वाली एजेंसियां प्रचार शुल्क जमा करने या अवैध होर्डिंग लगाने में मनमानी नहीं कर पाएंगी। प्रचार शुल्क जमा न करने पर नगर निगम आरसी भी काट सकेगा। अपर नगर आयुक्त की अध्यक्षता में एक आवंटन समिति भी गठित की जाएगी। इसमें नगर निगम के मुख्य अभियंता सिविल, प्रभारी अधिकारी विज्ञापन, वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी और राजस्व सेवा के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
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सलाहकार समिति और शुल्क निर्धारण
महापौर पार्षदों और आवासीय समितियों के प्रतिनिधियों की तीन सदस्यीय एक सलाहकार समिति बनाएंगी। यह समिति तकनीकी समिति को होर्डिंग संबंधी सुझाव देगी। तकनीकी समिति के तय प्रचार शुल्क सदन से कराए जाएंगे। प्रचार अधीक्षक ओम प्रकाश सिंह के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया दो महीने में पूरी हो जाएगी। इसके बाद सभी ठेके नई नियमावली के अनुसार ही उठाए जाएंगे। नगर निगम अपने स्तर पर तय करेगा कि किस सड़क पर विज्ञापन शुल्क क्या होगा और कौन सा इलाका किस श्रेणी में आएगा।
मौजूदा नियमों का उल्लंघन
वर्तमान में कई होर्डिंग नियमों का उल्लंघन कर लगाए गए हैं। नियम है कि चौराहे के मोड़ या चौराहे से 20 मीटर के दायरे में होर्डिंग नहीं लगेंगे। होर्डिंग यातायात में बाधा न डालें और उनका ढांचा मजबूत हो, यह भी अनिवार्य है। हालांकि, सूचना विभाग, मेट्रो और विभिन्न राजनीतिक दलों ने मनमाने तरीके से होर्डिंग लगाए हैं। वीआईपी इलाकों में भी कई खतरनाक होर्डिंग लगे हैं। नो होर्डिंग जोन और प्रतिबंधित स्थानों पर भी कमाई के लिए होर्डिंग लगाए गए हैं।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।

शहर में लगे होर्डिंग।