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'मोदी रन' के बीच पड़ी भाजपा में फूट

Sun, 02 Nov 2014 01:06 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 02 Nov 2014 01:06 PM IST
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No unity reflects in run for unity program.

दौड़ तो उन सरदार पटेल की राह पर चलकर देश को मजबूत बनाने का संकल्प लेने के लिए थी जिन्होंने 562 रियासतों का विलय कराकर भारत को वर्तमान स्वरूप दिया लेकिन राजधानी में शुक्रवार को हुई दौड़ में भाजपा गुटों में बंटी दिखी।

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हर नेता की रियासतें दिखीं तो दौड़ के बहाने अपनी सियासत चमकाने की कोशिशें भी सामने आई।

शपथ तो साथ-साथ चलने की ली गई लेकिन दौड़ में यह संकल्प कदम-कदम पर टूटता दिखा। कोशिश इस बात की दिखी कि अपना जत्था, दूसरे से वजनदार और दमदार कैसे दिखे।

कोई नेता अपने समर्थकों के साथ दौड़ में काफी आगे निकल गया तो किसी ने चाल धीमी करके दूसरे से अपना अंतर बढ़ा लिया।

दिलचस्प तो यह रहा कि मीडिया के लोगों को सभी नेताओं की एक साथ फोटो बनाने के लिए तमाम संघर्ष के बावजूद सफलता नहीं मिल पाई।

किसी की प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के साथ फोटो बनी तो किसी की उमा भारती के साथ। छोटे नेताओं व पूर्व विधायकों के खेमे भी अलग-अलग दौड़ते दिखे।

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कोई सबसे आगे तो कोई पीछे

No unity reflects in run for unity program.

दौड़ शुरू हुई तो सबसे पहले स्कूली बच्चों को आगे किया गया। उसके बाद प्रदेश अध्यक्ष ने दौड़ना शुरू किया। उम्मीद थी कि सभी साथ दौड़ेंगे। पर, कुछ लोग रुके रहे।

अध्यक्ष का ग्रुप दौड़ते हुए आगे निकल गया तो प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह के नेतृत्व में एक जत्थे की दौड़ शुरू हुई। नौजवानों का यह दस्ता अध्यक्ष के जत्थे को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गया। पीछे वाले बहुत पीछे छूट गए।

इसी बीच, केंद्रीय मंत्री उमा भारती और महापौर व पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा दौड़ में शामिल हुए।

लोगों को उम्मीद थी कि नेताओं की टोली अब एक साथ दिखेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अध्यक्ष का जत्था अलग दौड़ता रहा तो उमा व डॉ. शर्मा के साथ एक जत्था अलग दौड़ा।

लोग अलग-अलग तो दौड़े ही, उनके जत्थों के बीच दूरी भी साफ-साफ दिखी। हद तो तब हो गई जब वाजपेयी व उमा भारती पटेल प्रतिमा पर श्रद्धांजलि के मौके पर एक साथ नहीं दिखे।

हालांकि, इसकी एक वजह मंच पर अव्यवस्था भी रही लेकिन कोशिश होती तो दोनों नेता एक साथ श्रद्धांजलि दे सकते थे। पर, ऐसा नहीं हुआ।

जिस तरह दौड़ के दौरान लोग अलग-अलग दिखे, उससे यह बात फिर साबित हो गई है कि भाजपा के सारे नेताओं को एक राह चला पाना आसान नहीं है।

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