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बातचीत की टेबल पर नहीं बनी बात, हड़ताल जारी
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
Updated Thu, 14 Nov 2013 12:05 AM IST
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कर्मचारियों की बेमियादी हड़ताल के पहले दिन सख्ती दिखाने वाली सरकार एक दिन बाद ही यू टर्न लेते हुए कर्मचारियों के साथ बातचीत की टेबल पर आ गई।
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हालांकि प्रमुख सचिव कार्मिक राजीव कुमार के साथ करीब ढाई घंटे चली बातचीत बेनतीजा रही।
अंत में कर्मचारी नेता यह कहकर लौट आए कि शासनादेश के बगैर वे हड़ताल वापस नहीं लेंगे।
नेताओं ने हड़ताल जारी रखने की घोषणा की है।
हड़ताली कर्मचारियों पर ‘काम नहीं तो वेतन नहीं’ के फरमान का असर नहीं होते देख हड़ताल के दूसरे ही दिन सरकार दबाव में नजर आई।
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दोपहर बाद प्रमुख सचिव कार्मिक ने कर्मचारी नेताओं को बातचीत का निमंत्रण भेज दिया।
शाम चार बजे राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के अध्यक्ष मंडल अजय सिंह व हरिकिशोर तिवारी के नेतृत्व में कर्मचारी नेता वार्ता के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय पहुंच गए।
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दोनों ही पक्षों के बीच करीब ढाई घंटे की बिंदुवार बातचीत हुई। लेकिन किसी भी मसले पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनी।
कर्मचारी नेताओं का कहना है कि सरकार आश्वासन का झुनझुना थमाकर हड़ताल खत्म कराना चाहती थी। लेकिन कर्मचारी नहीं माने और बाद में उठकर चले आए।
इससे पहले दिन में प्रदेश सरकार की सख्ती को नजरअंदाज करते हुए हड़ताल पर डटे रहे।
‘नो वर्क नो पे’ व ‘सर्विस ब्रेक’ के सरकारी फरमान के बावजूद बेमियादी हड़ताल के दूसरे दिन भी दफ्तरों में कामकाज पर व्यापक असर दिखाई दिया।
राजधानी सहित प्रदेश के अन्य जिलों में ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में काम-काज ठप रहा। कई विभागों में तो ताले ही नहीं खुल सके।
राज्य कर्मचारी वेतन विसंगति व केंद्र के समान भत्ता दिए जाने सहित कई मांगों को लेकर बेमियादी हड़ताल पर चले गए हैं।
यह हड़ताल राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद व राज्य कर्मचारी महासंघ के साझा मंच ‘राज्य कर्मचारी अधिकार मंच’ के आह्वान पर हो रही है।
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अधिकार मंच के नेता बुधवार को फिर अपनी-अपनी टीम बनाकर विभिन्न विभागों में गए। जहां भी कर्मचारी नेताओं की टीम गई उस दफ्तर को बंद कराते चले गए।
कर्मचारी नेताओं की टीम ऐशबाग स्थित गवर्मेंट प्रेस पहुंची। यहां पर सभी काम ठप करा दिया। प्रेस में कई गजट प्रकाशित होने थे। लेकिन यहां कोई काम नहीं हो सका।
इसके बाद आरटीओ ऑफिस भी नेताओं की टोली पहुंच गई। यहां पर भी सभी ऑफिस बंद करा दिए।
सहकारिता, स्वास्थ्य महानिदेशालय, मत्स्य विभाग, आबकारी, कृषि, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, उद्यान व निबंधन विभाग में भी ऑफिस बंद करा दिए गए।
हड़ताल का असर सिंचाई विभाग में सबसे ज्यादा दिखाई दिया। यहां सुबह से ही विभागों के ताले नहीं खुले।
मुख्यालय के बाहर ही कर्मचारी धरना देकर सभा करते रहे। पीडब्लूडी में हड़ताल का मिला-जुला असर दिखाई दिया।
यहां डिप्लोमा इंजीनियर तो हड़ताल कर रहे हैं लेकिन कई संगठन ऐसे हैं जो हड़ताल में शामिल नहीं हैं। शिक्षा विभाग में हड़ताल का जबरदस्त असर दिखाई दिया।
खजाने में नहीं जमा हुए 1060 करोड़ रुपये
दो दिनों की हड़ताल से सरकार को अब तक 1060 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ है।
राज्य कर्मचारी अधिकारी मंच के नेताओं का दावा है कि दो दिनों की हड़ताल से वाणिज्य कर विभाग में ही 400 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
आबकारी विभाग को 200, राजस्व संग्रह विभाग को 200 व कर एवं निबंधन विभाग को 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
परिवहन विभाग में भी हड़ताल से अब तक 60 करोड़ रुपये जमा नहीं हो सके हैं।
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