{"_id":"60e36ca38ebc3ee59c071912","slug":"no-one-private-covid-hospital-gave-treatment-on-ayushman-card-lucknow-news-lko5856401188","type":"story","status":"publish","title_hn":"राजधानी में निजी अस्पतालों ने एक भी आयुष्मान पात्र कोरोना मरीज को नहीं किया मुप्त इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
राजधानी में निजी अस्पतालों ने एक भी आयुष्मान पात्र कोरोना मरीज को नहीं किया मुप्त इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फैजुल्लागंज के रहने वाले राम खिलवान (55) कोरोना की दूसरी लहर में पॉजिटिव हुए। अप्रैल में परिजनों ने उन्हें निजी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया।
आयुष्मान कार्ड भी दिखाया, पर कार्ड पर इलाज मिलने से मना कर दिया गया। आखिर में मरीज को रोज के करीब तीस हजार सेे अधिक का शुल्क देना पड़ा।
चिनहट के सरोज कुमार (65) आयुष्मान कार्डधारक हैं। दूसरी लहर में पॉजिटिव होने के बाद भर्ती होने गए तो निजी अस्पताल ने कार्ड पर इलाज देने से मना कर दिया।
शासन के जरिए तय किए गए आयुष्मान पैकेज में कोरोना इलाज नहीं मुमकिन न होने की बात कही। इसके बाद मरीज से रोज बीस हजार से अधिक का शुल्क वसूला गया।
राजधानी में कोरोना की पहली-दूसरी लहर में एक भी आयुष्मान पात्र कोविड मरीज को निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज नहीं मिला।
दूसरी लहर में संक्रमण जब चरम पर था और बेड व ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची थी। तब करीब 60 निजी अस्पतालों को कोविड में बदला गया था। पर ये अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर भी इलाज करने को तैयार नहीं थे।
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी बेबस रहे। आयुष्मान मरीज के पॉजिटिव होने के बाद इलाज का जो पैकेज तय हुआ। वह बेहद कम रहा।
ऐसे में आयुष्मान पात्र कोविड मरीजों के कार्ड दिखाने के बाद भी निजी अस्पतालों ने जमकर वसूली की। ऐसे में बड़ी संख्या में आयुष्मान योजना के लाभार्थी इलाज से वंचित रहे।
विज्ञापन
जबकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर निजी कोविड अस्पतालों में आयुष्मान पात्र मरीजों को इलाज मिलने का दावा कर रहे हैं।
2.83 लाख परिवार आयुष्मान योजना के पात्र
राजधानी में करीब 2.83 लाख से अधिक परिवार आयुष्मान योजना के पात्र हैं। करीब 123 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत जुड़े हुए हैं। आयुष्मान योजना में पहले कोरोना शामिल नहीं था। मार्च 2020 में इसे शामिल किया गया। आयुष्मान कार्ड धारकों को 3600 रुपये में आईसीयू बेड और 1800 रुपये प्रति दिन खर्च पर सामान्य बेड, वेंटिलेटर के साथ आइसीयू वार्ड में भर्ती होने पर अधिकतम 4,500 रुपये का प्रावधान किया गया है। एचडीयू वार्ड के लिए 2,700 रुपए पर इलाज निजी अस्पतालों में मुहैया कराए जाने का नियम है। पूरा इलाज कैशलेस है। सीएमओ से सत्यापित होकर अस्पतालों के बिलों का शासन से सीधे भुगतान होता है।
तीन कैटेगरी में तय हुआ था निजी कोविड अस्पतालों का शुल्क
शासन ने निजी कोविड अस्पतालों की वसूली पर रोक लगाने के लिए तीन कैटेगरी में शुल्क तय किया था। इसके बाद भी निजी अस्पतालों ने मनमानी जारी रखी। ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर व सामान्य बेड की कैटेगरी तय हुई थी। सभी का शुल्क आयुष्मान योजना पैकेज से अधिक था। ऐसे में आयुष्मान पैकेज पर निजी कोविड अस्पताल मरीजों का इलाज को राजी नहीं हुए।
जांच कराकर कार्रवाई होगी
निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले सभी मरीजों के इलाज का भुगतान आयुष्मान पैकेज में किया गया। सरकारी कोविड अस्पतालों में इलाज की मुफ्त व्यवस्था रही। निजी कोविड अस्पताल के जरिए इलाज न देने की बात सामने आएगी तो जांच कराकर कार्रवाई होगी।
- डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक
मामले की जांच कराई जाएगी
आयुष्मान पात्र मरीजों को निजी कोविड अस्पतालों में इलाज मिला है। आयुष्मान मरीजों से इलाज के लिए रुपये लेने की शिकायत आएगी तो मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ
विज्ञापन
आयुष्मान कार्ड भी दिखाया, पर कार्ड पर इलाज मिलने से मना कर दिया गया। आखिर में मरीज को रोज के करीब तीस हजार सेे अधिक का शुल्क देना पड़ा।
चिनहट के सरोज कुमार (65) आयुष्मान कार्डधारक हैं। दूसरी लहर में पॉजिटिव होने के बाद भर्ती होने गए तो निजी अस्पताल ने कार्ड पर इलाज देने से मना कर दिया।
शासन के जरिए तय किए गए आयुष्मान पैकेज में कोरोना इलाज नहीं मुमकिन न होने की बात कही। इसके बाद मरीज से रोज बीस हजार से अधिक का शुल्क वसूला गया।
राजधानी में कोरोना की पहली-दूसरी लहर में एक भी आयुष्मान पात्र कोविड मरीज को निजी अस्पताल में मुफ्त इलाज नहीं मिला।
दूसरी लहर में संक्रमण जब चरम पर था और बेड व ऑक्सीजन के लिए मारामारी मची थी। तब करीब 60 निजी अस्पतालों को कोविड में बदला गया था। पर ये अस्पताल आयुष्मान कार्ड पर भी इलाज करने को तैयार नहीं थे।
विज्ञापन
वहीं, स्वास्थ्य विभाग के अफसर भी बेबस रहे। आयुष्मान मरीज के पॉजिटिव होने के बाद इलाज का जो पैकेज तय हुआ। वह बेहद कम रहा।
ऐसे में आयुष्मान पात्र कोविड मरीजों के कार्ड दिखाने के बाद भी निजी अस्पतालों ने जमकर वसूली की। ऐसे में बड़ी संख्या में आयुष्मान योजना के लाभार्थी इलाज से वंचित रहे।
विज्ञापन
जबकि स्वास्थ्य विभाग के अफसर निजी कोविड अस्पतालों में आयुष्मान पात्र मरीजों को इलाज मिलने का दावा कर रहे हैं।
2.83 लाख परिवार आयुष्मान योजना के पात्र
राजधानी में करीब 2.83 लाख से अधिक परिवार आयुष्मान योजना के पात्र हैं। करीब 123 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत जुड़े हुए हैं। आयुष्मान योजना में पहले कोरोना शामिल नहीं था। मार्च 2020 में इसे शामिल किया गया। आयुष्मान कार्ड धारकों को 3600 रुपये में आईसीयू बेड और 1800 रुपये प्रति दिन खर्च पर सामान्य बेड, वेंटिलेटर के साथ आइसीयू वार्ड में भर्ती होने पर अधिकतम 4,500 रुपये का प्रावधान किया गया है। एचडीयू वार्ड के लिए 2,700 रुपए पर इलाज निजी अस्पतालों में मुहैया कराए जाने का नियम है। पूरा इलाज कैशलेस है। सीएमओ से सत्यापित होकर अस्पतालों के बिलों का शासन से सीधे भुगतान होता है।
तीन कैटेगरी में तय हुआ था निजी कोविड अस्पतालों का शुल्क
शासन ने निजी कोविड अस्पतालों की वसूली पर रोक लगाने के लिए तीन कैटेगरी में शुल्क तय किया था। इसके बाद भी निजी अस्पतालों ने मनमानी जारी रखी। ऑक्सीजन बेड, वेंटिलेटर व सामान्य बेड की कैटेगरी तय हुई थी। सभी का शुल्क आयुष्मान योजना पैकेज से अधिक था। ऐसे में आयुष्मान पैकेज पर निजी कोविड अस्पताल मरीजों का इलाज को राजी नहीं हुए।
जांच कराकर कार्रवाई होगी
निजी मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने वाले सभी मरीजों के इलाज का भुगतान आयुष्मान पैकेज में किया गया। सरकारी कोविड अस्पतालों में इलाज की मुफ्त व्यवस्था रही। निजी कोविड अस्पताल के जरिए इलाज न देने की बात सामने आएगी तो जांच कराकर कार्रवाई होगी।
- डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक
मामले की जांच कराई जाएगी
आयुष्मान पात्र मरीजों को निजी कोविड अस्पतालों में इलाज मिला है। आयुष्मान मरीजों से इलाज के लिए रुपये लेने की शिकायत आएगी तो मामले की जांच कराई जाएगी।
- डॉ. संजय भटनागर, सीएमओ