यूपी के गांवों में विकास कार्य ठप, अभी तक नहीं मिला है पैसा
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14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत प्रदेश की ग्राम पंचायतों को मिलने वाले 1921 करोड़ रुपये पंचायतों को अब तक न मिलने से गांवों के विकास कार्य ठप हैं।
ग्राम प्रधान जिलों में डीपीआरओ कार्यालय से मुख्यालय के पंचायतीराज निदेशालय तक के चक्कर काट रहे हैं।
केंद्र सरकार 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के क्रम में ग्राम पंचायतों को बड़ी रकम देती है। वर्ष 2015-16 की पहली किस्त में 1931.30 करोड़ रुपये दिए गए थे। दूसरी किस्त में 1921 करोड़ 29 लाख 58 हजार रुपये दिए गए।
नियम है कि केंद्र से बजट मिलने के 15 दिन के भीतर रकम ग्राम पंचायतों को जारी कर दी जानी चाहिए। इससे देर होने पर राज्य सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक की बैंक दर पर अपने खजाने से ब्याज के साथ किस्त जारी करनी होती है। यह एक तरह से दंड है।
12 अप्रैल को जारी कर दी गई थी रकम
केंद्र से 31 मार्च को दूसरी किस्त की रकम मिलने के बाद प्रदेश के पंचायतीराज विभाग ने 12 अप्रैल को पंचायतीराज निदेशक को जारी कर दी। पंचायतीराज निदेशक को इसे पंचायतों के खाते में भेजना था। शासन से निदेशक को पैसा मिले हुए 22 दिन बीत गए हैं, मगर प्रधानों के खाते में यह रकम नहीं पहुंची है।
पंचायतीराज निदेशक अनिल कुमार दमेले का कहना है कि पैसा पंचायतों को जारी किया जा चुका है। शायद बैंकों ने इसे अब तक जारी नहीं किया है। इसके लिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही पैसा खाते में पहुंच जाएगा।
पिछली बार भरना पड़ा था 1.64 करोड़ जुर्माना
2015-16 की पहली किस्त का पैसा भी सरकार 15 दिन के भीतर पंचायतों के खाते में ट्रांसफर नहीं कर पाई थी।
इसके एवज में सरकार को अपने खजाने से एक करोड़ 64 लाख 3 हजार रुपये बतौर ब्याज अदा करने पड़े थे। इस शिथिलता की जिम्मेदारी तय न होने का ही असर रहा कि दूसरी किस्त में भी हीलाहवाली जारी है।
तत्काल पैसा जारी करने को कहा गया
इस पर पंचायत उपनिदेशक गिरीश चंद्र का कहना है कि 12 अप्रैल को शासन से यह पैसा मिला था। निदेशालय से इसे 26 अप्रैल को जारी कर दिया गया, ग्राम प्रधानों से शिकायत मिली है कि उनके खाते में पैसा नहीं पहुंचा है। 2 मई को बैंकों के अधिकारियों को बुलाकर उन्हें तत्काल पैसा जारी करने को कहा गया है।
वहीं, ग्राम प्रधान लतीफपुर एवं अध्यक्ष प्रधान संघ माल लखनऊ श्वेता सिंह का कहना है कि 14 वें वित्त आयोग की दूसरी किस्त का पैसा अब तक खाते में नहीं पहुंचा है। पंचायतीराज निदेशालय में इसकी शिकायत की गई है, लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई। इससे पंचायतों के विकास कार्य पूरी तरह से ठप हैं।