90 फीसदी एटीएम रहे बंद, आज भी नहीं मिलेगी राहत
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नगदी की समस्या से जूझ रहे लोगों को मंगलवार को भी बहुत ज्यादा राहत मिलने के आसार नहीं हैं। कारण, 90 फीसदी से भी ज्यादा एटीएम खाली पड़े हैं। करेंसी चेस्ट 123 करोड़ रुपये ही बैंकों को भेज सकी हैं जबकि डिमांड 400 करोड़ की है। वहीं पुराने नोट भी समस्या खड़े कर सकते हैं। जानिए क्या-क्या वजहे हैं जो मंगलवार को भी परेशानियां खड़ी कर सकती हैं...
किसी एटीएम में अधिकतम एक बंडल नोट डाले जाते हैं, जिनमें 10 पैकेट होते हैं। हर पैकेट में 100 पीस नोट होते हैं। यानी कुल 1000 पीस अब तक 500 और 1000 के नोटों की वजह से इनमें पांच से 10 लाख रुपये तक एक दफा में भरे जा सकते थे। लेकिन इस समय एटीएम में 100 के ही नोट डाले जा रहे हैं।
100 के 1000 पीस मशीनों में लगाने के बाद अधिकतम 50 लोग इनमें से दो-दो हजार रुपये निकाल पा रहे हैं। यह रकम कुल एक लाख हो पा रही है।
यही सबसे बड़ी वजह है कि एटीएम में डाले गए रुपये दो-दो घंटे में खत्म हो जा रहे हैं। एक ट्रांजेक्शन में अगर एक व्यक्ति डेढ़ मिनट भी लगाएगा तो डेढ़ से दो घंटे में 50 लोगों को पैसा देने के बाद एटीएम से कैश खत्म हो चुका होगा।
...तो कटे-फटे नोट ही मिल पाएंगे
अगर बैंक से पैसा निकालते समय आपके हाथ में कटा-फटा नोट आए तो इसके लिए बैंक स्टाफ को नहीं आरबीआई को दोष दीजिए।
बैंक के सूत्रों के अनुसार आरबीआई एक ओर जहां यूपी में छोटे नोटों की पूरी सप्लाई नहीं कर पा रहा है, वहीं उसने अपने करेंसी चेस्ट्स में बैंकों से लौटाए गए कटे-फटे, गंदे और उपयोग लायक नहीं बचे नोट को ही चलाने के लिए वापस भेज दिया है। लखनऊ के बैंक अधिकारियों ने इस बात का खुलासा किया है।
उनका दावा है कि ये नोट इतने खराब हैं कि इन्हें ‘नॉन-इश्यूएबल’ करार देकर बैंकों द्वारा आरबीआई को भेजकर नष्ट कराया जा रहा था। लेकिन अचानक वापस मार्केट में भेजा जा रहा है।
जरूरत 400 करोड़ की मिले 123 करोड़
पिछले पांच दिनों में लखनऊ में कुल 350 करोड़ रुपयों के नोट बदले गए हैं। इन्हें बैंकों ने करेंसी चेस्ट भिजवाया है। जहां से उम्मीद थी कि इतना ही पैसा उन्हें वापस मिलेगा। लेकिन करेंसी चेस्ट केवल 123 करोड़ रुपये बैंकों को भेज सकी हैं। जबकि जरूरत 400 करोड़ रुपये की है।
800 एटीएम में 700 खाली
राजधानी में बैंकों के 800 एटीएम हैं। इनमें से 700 खाली हैं या यूं कहें इनमें कैश नहीं है। यानी 13 फीसदी एटीएम ही वर्किंग पोजिशन में हैं।
पुराने नोट ज्यादा जगह घेरते हैं, फंसने का भी डर
आरबीआई के पुराने नोट चलन के लिए देने की वजह से एटीएम खराब होने की स्थितियां मंगलवार से बन सकती हैं। पुराने नोट जगह ज्यादा घेरते हैं, जिससे वे संख्या में कम हो जाएंगी और उन्हें अनुपयोगी करार दिया जा चुका था, ऐसे में उनकी वजह से मशीनें खराब होने की नौबत भी आ सकती है।
बैंक में महिलाओं, वृद्धों व दिव्यांगों की अलग लाइन
बैंकों में पैसा जमा कराने, करेंसी बदलवाने और बैंक व एटीएम खाते से पैसा निकालने के लिए सीनियर सिटीजन, महिलाओं और दिव्यांगों को प्रशासन राहत दिलाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी बैंक प्रबंधकों को निर्देश जारी किया है कि मंगलवार से पैसा जमा करवाने, निकलवाने के लिए वृद्धों, महिलाओं और दिव्यांगों की अलग लाइन लगवाएं और काउंटर खोलें।
एसीएम व सीओ भी अपने कार्यक्षेत्र में एटीएम पर भी पैसा निकालने के लिए बुजुर्गों, महिलाओं व दिव्यांगों की अलग लाइन लगवाएंगे। इसका अनुपालन न करने वाले बैंकों के खिलाफ प्रशासन कार्रवाई करेगा।
डीएम सत्येंद्र सिंह ने बताया कि 500 और 1000 का नोट बंद होने के बाद एटीएम और बैंकों के बाहर लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है।
इस कारण बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को परेशानी हो रही है। इसलिए सभी बैंकों में इनके लिए अलग से काउंटर खोलने को कहा गया है। इस आदेश का अनुपालन न होने की शिकायत संबंधित थाना में की जा सकेगी।
मरीजों के लिए डाकघरों में अलग काउंटर
फुटकर रुपये नहीं होने की वजह से इलाज व दवाइयां मिलने में संकट न हो, इसके लिए डाक विभाग मंगलवार से पांच डाकघरों में मरीजों के लिए स्पेशल काउंटर खोलेगा। इलाज का परचा दिखाने पर यहां आसानी से फुटकर मिल जाएगा।
डाक सेवाओं के निदेशक विवेक दक्ष ने बताया कि राम मनोहर लोहिया अस्पताल के मरीजों के लिए गोमतीनगर पोस्ट ऑफिस, सिविल अस्पताल के मरीजों के लिए जीपीओ में, पीजीआई के लिए पीजीआई पोस्ट ऑफिस में, केजीएमयू के मरीजों केलिए केजीएमयू डाकघर और बलरामपुर अस्पताल डाकघर में अतिरिक्त काउंटर खोला जाएगा या फिर मरीजों की अलग से लाइन लगर्वाई जाएगी। मरीजों को इलाज का परचा लाना पड़ेगा, जिसे देखने के बाद ही फुटकर दिया जाएगा।