निठारी पर फैसला, नहीं होगी सुरिंदर कोली को फांसी
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निठारी कांड के आरोपी ‘नर पिशाच’ की दया याचिका पर सुनवाई हो गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले के दोषी सुरिंदर कोली की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है।
राज्य सरकार ने सुरिंदर कोली की दया याचिका पर सुनवाई करने में देरी की थी। अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुई फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया है।
निठारी कांड के खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई ने शुरू की।
11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।
पांच मामलों में मिली थी फांसी की सजा
13 फरवरी 2009 को सीबीआई विशेष न्यायाधीश रमा जैन ने सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई थी। कालांतर में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया। जबकि सुरेंद्र की सजा बरकरार रखी।
सुप्रीम कोर्ट ने भी सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया। कोली ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी, उसे भी अब खारिज कर दिया गया।
12 मई 2010 को सुरेंद्र कोली को इसी कांड से जुडे़ दूसरे मामले में सीर्बीआई विशेष न्यायाधीश डॉ. एके सिंह ने आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषी मानते हुए उसे फांसी की सजा सुनाई।
12 दिसंबर 2010 को सीबीआई कोर्ट ने निठारी कांड के ही तीसरे मामले में सुरेंद्र कोली को दोषी माना और फांसी की सजा सुनाई।
28 सितंबर 2010 को चौथे मामले में कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषी माना। मर्डर केस में सीबीआई विशेष न्यायाधीश डॉ. एके सिंह ने सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा सुनाई।
24 दिसंबर 2012 को पांचवे मामले में भी कोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषी माना। तत्कालीन सीबीआई विशेष न्यायाधीश एस लाल ने भी उसे फांसी की सजा सुनाई।