एनजीटी ने पलटा सरकार का फैसला, प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित समितियां बहाल
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए यूपी में बनाई अपनी छह अनुश्रवण समितियां बहाल कर दी हैं। जून में प्रदेश सरकार ने इन्हें भंग कर दिया था। इस फैसले को एनजीटी ने पलट दिया।
एनजीटी के निर्देश पर प्रदेश में हिंडन, काली और कृष्णा नदी के संरक्षण, उद्धार और प्रदूषण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों व संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए न्यायमूर्ति एसयू खान की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति गठित की गई थी। इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में नदियों के संरक्षण, उद्धार एवं प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण के लिए न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह, यमुना नदी के संरक्षण और उद्धार के लिए दिल्ली के पूर्व मुख्य सचिव शैलजा चंद्रा और गंगा नदी के संरक्षण एवं उद्धार के लिए न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता में अनुश्रवण समितियां बनाई गई थीं।
सिंगरौली क्षेत्र में तापीय विद्युत संयंत्रों, कोयले की खदानों, स्टोन क्रशर्स व अन्य प्रदूषणकारी उद्योगों के संचालन से होने वाले प्रदूषण के आकलन और समस्या के समाधान के लिए न्यायमूर्ति राजेश कुमार की अध्यक्षता में ओवरसाइट समिति गठित की गई थी।
एनटीजी ने अपने पूर्व के एक आदेश में कहा था कि, इन समितियों के छह माह पूरे होने पर मुख्य सचिव निर्णय लेंगे कि इनका कार्यकाल जारी रखा जाए या नहीं। इसके आधार पर प्रदेश सरकार ने कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया।
मुख्य सचिव डॉ. अनूपचंद्र पांडेय ने आदेश जारी करके चार समितियों का कार्यकाल जून में समाप्त घोषित कर दिया। इस आदेश के अनुसार ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक व जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर संस्तुतियां देने के लिए न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में गठित अनुश्रवण समिति का कार्यकाल भी 15 जुलाई को खत्म हो गया था।
मामला एनजीटी में पहुंचा तो वहां से फैसला दिया गया कि पर्यावरण को हो रहे नुकसान की भरपाई में राज्य मशीनरी असफल साबित हो रही है। इन समितियों का गठन कानून लागू करने में एनजीटी की मदद के लिए किया गया था। इसलिए प्रदेश सरकार बिना एनजीटी की अनुमति के कमेटियों को भंग नहीं कर सकती।
अगर इन कमेटियों की आगे जरूरत महसूस नहीं हुई तो इनका कार्यकाल 31 दिसंबर 2019 तक जारी रहेगा। पर्यावरण में सुधार के लिए प्रदेश सरकार अपने स्तर पर कोई कमेटी बनाती है, तो इस पर कोई आपत्ति नहीं है। एनजीटी के इस आदेश के तहत मंगलवार को प्रदेश सरकार ने भी समितियों को बहाल करने संबंधी शासनादेश जारी कर दिया गया।