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UP News: सवर्ण नेताओं के गले की फांस बने यूजीसी के नए नियम, सत्ता हो या विपक्ष, दोनों से लोग मांग रहे जवाब

Sun, 01 Mar 2026 02:25 PM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Sun, 01 Mar 2026 02:25 PM IST
सार

यूजीसी के नए नियम उत्तर प्रदेश में सवर्ण नेताओं के गले की फांस बन गए हैं। सत्ता हो या विपक्ष, दोनों पक्ष के नेताओं से सवर्ण समाज के लोग जवाब मांग रहे हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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new UGC rules have become thorn in side of upper caste leaders in UP people demanding answers
यूजीसी पर सवर्ण नेताओं से सवाल पूछ रहे लोग। - फोटो : अमर उजाला/संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

यूजीसी के नए नियमों पर उत्तर प्रदेश में नेताओं की हालत यह है कि वे न तो खुलकर बिल का विरोध कर पा रहे हैं और न ही समर्थन। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज की ओर से राजधानी लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हुए प्रबुद्ध समागम में शनिवार को यही खींचतान देखने को मिली।

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कार्यक्रम में सत्ता के साथ ही विपक्ष के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया था। भाजपा में ब्राह्मण चेहरा माने जाने वाले पूर्व उपमुख्यमंत्री और वर्तमान में राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा के सामने भी यूजीसी बिल का मुद्दा उठ गया। उन्होंने ब्राह्मणों को जाति के बजाय संस्कार कहते हुए लोकहित के लिए समर्पित बताया। भाषण के दौरान श्रोताओं ने उनसे यूजीसी बिल पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा। जवाब न मिलने पर लोगों ने नारेबाजी करते हुए उनका विरोध करना शुरू कर दिया। इस दौरान लोगों ने तिलक, तराजू और तलवार नहीं सहेगा अत्याचार के नारे भी लगाए।

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शोर ज्यादा बढ़ा तो डॉ. दिनेश शर्मा ने भारत माता की जय कहते हुए अपना भाषण बीच में छोड़ दिया। हालांकि, डॉ. दिनेश शर्मा ने बाद में अमर उजाला को बताया कि उन्होंने अपना पूरा भाषण दिया था। इस दौरान किसी ने सवाल पूछा था, जो वह सुन नहीं पाए थे। उनको दूसरे कार्यक्रम में जाना था, इसलिए वहां से निकल गए थे। इस हंगामे के करीब 30 मिनट बाद सत्ता पक्ष के दूसरे ब्राह्मण चेहरे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पहुंचे। उनको इस हंगामे की जानकारी पहले ही मिल चुकी थी। अपने भाषण में उन्होंने हर तरह से ब्राह्मणों का समर्थन करने की बात कही, लेकिन यूजीसी बिल पर अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया।

यूजीसी के नए प्रावधान सामान्य वर्ग के खिलाफ

कार्यक्रम में उस समय भी तनाव दिखा, जब निलंबित पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मंच पर बोलने आए। उन्होंने मंदिर और चंदे से जुड़े विषयों पर बोलना शुरू किया, तो आयोजकों ने उन्हें टोकते हुए मुद्दे पर बात करने को कहा। इस हस्तक्षेप से जनता भड़क गई और अलंकार के समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार में ब्राह्मण पीड़ित है। उनका कोई सुनने वाला नहीं है। कोई ब्राह्मण समाज सरकार के साथ नहीं है। यूजीसी के नए प्रावधान सामान्य वर्ग के खिलाफ है। इसका विरोध जरूरी है। मंच पर लोगों ने मेरा विरोध किया, लेकिन नीचे बैठे लोगों ने पूरा समर्थन दिया।
 

यूजीसी का नया चक्र स्वर्ण समाज को मिटाने की साजिश

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने राजनेताओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी का नया चक्र सवर्ण समाज को मिटाने की साजिश है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सदन में यह पास हो रहा था, तब ब्राह्मण नेता हाथ में चूड़ियां पहनकर ताली क्यों बजा रहे थे। भाजपा के ब्राह्मण विधायकों की बैठक पर शीर्ष नेतृत्व की सख्ती को उन्होंने गलत बताया। कहा कि क्या ब्राह्मण इतना कमजोर हो गया है कि वह हंटर के नीचे काम करेगा। अन्य जातियों के नेता बैठक करते हैं, तब उन पर लगाम क्यों नहीं कसी जाती।

हिंदूवादी सरकार में शंकराचार्य का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण

राजेंद्र नाथ त्रिपाठी ने माघ मेले में बटुकों के साथ हुए व्यवहार और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर रोष व्यक्त किया। उन्होने कहा कि योगी, मोदी की हिंदूवादी सरकार में शंकराचार्य का अपमान दुर्भाग्यपूर्ण है। सभी राजनीतिक दलों के एजेंडे में है सवर्ण को मिटाओ और ब्राह्मणों को सताओ।

हमारी सरकार ब्राह्मण समाज के साथ : डिप्टी सीएम

समागम में शामिल उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि इस बात का भरोसा दिलाता हूं कि हमारी सरकार ब्राह्मण समाज के साथ है। उनके हितों की चिंता पार्टी और सरकार दोनों कर रही है। हर स्थिति में उनके साथ है। ब्राह्मण समाज का कोई अहित नहीं होने देंगे। हालांकि, यूजीसी के नए प्रावधान पर डिप्टी सीएम ने भी चुप्पी साध ली।
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