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कैंसर मरीजों को मिलेगी सहूलियत
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नई तकनीक से होगा कैंसर मरीजों का इलाज
लखनऊ। केजीएमयू के कैंसर मरीजों को जल्द ही नई तकनीक से इलाज मिलने लगेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से के अलावा अन्य प्रभावित होने वाले आर्गन को कम नुकसान होगा। इसके लिए केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. नवीन सिंह इटली से विशेष प्रशिक्षण लेकर आए हैं। वह सीआईसीओपीएस फेलोशिप के तहत दो मई से तीन जुलाई 2019 तक प्रशिक्षण लेने गए थे।
डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि प्रोटान थेरेपी और कार्बन आयरन थेरेपी क ैंसर मरीजों के लिए अत्याधुनिक तकनीक है, लेकिन अभी यहां इस तकनीक का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इससे जुड़ी मशीनें चेन्नई में लगी हैं। झज्जर में खुलने वाले कैंसर संस्थान में भी इन मशीनों को लगाया जा रहा है। फेलोशिप के तहत मिली जानकारी से यहां के छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका फायदा मरीजों को भी देने का प्रयास किया जा रहा है। इसकेतहत लीनियर एक्सीलेटर मशीन से होने वाली सेकाई के दौरान कुछ नई तकनीक अपनाई जाएगी। फ्रोटान थेरेपी के दौरान फिंगरिंग तकनीक अपनाने से मरीज को फायदा मिलेगा। अभी तक शरीर के आंतरिक हिस्से में बने ट्यूमर को विकिरण देने में आसपास के अन्य अंग भी प्रभावित होते थे। लेकिन नई तकनीक से दूसरे अंगों को प्रभावित होने से बचाया जा सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी।
डॉ. नवीन के नाम एक और उपलब्धि
डॉ. नवीन सिंह को वर्ष 2019-20 के लिए आईसीएमआर-डीएचआर इंटरनेशनल फेलोशिप भी मिल गई है। प्रदेश के वह इकलौते डाक्टर हैं, जिन्हें यह उपलब्धि मिली है। इसके तहत वह यूरोपीय देशों में कैंसर के क्षेत्र में अपनाई जा रही विभिन्न नई तकनीक की जानकारी हासिल करेंगे।
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लखनऊ। केजीएमयू के कैंसर मरीजों को जल्द ही नई तकनीक से इलाज मिलने लगेगा। इससे कैंसरग्रस्त हिस्से के अलावा अन्य प्रभावित होने वाले आर्गन को कम नुकसान होगा। इसके लिए केजीएमयू के रेडियोथेरेपी विभाग के डॉ. नवीन सिंह इटली से विशेष प्रशिक्षण लेकर आए हैं। वह सीआईसीओपीएस फेलोशिप के तहत दो मई से तीन जुलाई 2019 तक प्रशिक्षण लेने गए थे।
डॉ. नवीन सिंह ने बताया कि प्रोटान थेरेपी और कार्बन आयरन थेरेपी क ैंसर मरीजों के लिए अत्याधुनिक तकनीक है, लेकिन अभी यहां इस तकनीक का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इससे जुड़ी मशीनें चेन्नई में लगी हैं। झज्जर में खुलने वाले कैंसर संस्थान में भी इन मशीनों को लगाया जा रहा है। फेलोशिप के तहत मिली जानकारी से यहां के छात्रों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसका फायदा मरीजों को भी देने का प्रयास किया जा रहा है। इसकेतहत लीनियर एक्सीलेटर मशीन से होने वाली सेकाई के दौरान कुछ नई तकनीक अपनाई जाएगी। फ्रोटान थेरेपी के दौरान फिंगरिंग तकनीक अपनाने से मरीज को फायदा मिलेगा। अभी तक शरीर के आंतरिक हिस्से में बने ट्यूमर को विकिरण देने में आसपास के अन्य अंग भी प्रभावित होते थे। लेकिन नई तकनीक से दूसरे अंगों को प्रभावित होने से बचाया जा सकेगा। इससे इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी।
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डॉ. नवीन के नाम एक और उपलब्धि
डॉ. नवीन सिंह को वर्ष 2019-20 के लिए आईसीएमआर-डीएचआर इंटरनेशनल फेलोशिप भी मिल गई है। प्रदेश के वह इकलौते डाक्टर हैं, जिन्हें यह उपलब्धि मिली है। इसके तहत वह यूरोपीय देशों में कैंसर के क्षेत्र में अपनाई जा रही विभिन्न नई तकनीक की जानकारी हासिल करेंगे।
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