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रोटेब्लेशन तकनीक से हृदय रोगियों को मिलेगी राहत
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एसजीपीजीआई ने हृदय रोगियों के लिए अब रोटेब्लेशन तकनीक शुरू की है। पहले मरीज पर प्रयोग पूरी तरह से सफल रहा है। इस तकनीक के जरिये धमनियों में जमे कैल्शियम को निकालना आसान हो गया है। अब इस तकनीक का विस्तार करने की तैयारी है।
एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में आईं 50 साल की महिला मधुमेह व उच्च रक्तचाप से पीड़ित थीं। करीब छह माह से सीने में दर्द था। कोरोनरी एंजियोग्राफी से पता चाल कि हृदय की प्रमुख धमनी में कैल्शियम जमा है। इसे निकालने के लिए रेडियल रूट द्वारा रोटेब्लेशन तकनीक अपनाने का फैसला लिया गया। अब मरीज पूरी तरह ठीक है। एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर ने बताया कि रोटेब्लेशन तकनीक कॉर्नरी आर्टरी डिजीज के इलाज की अत्याधुनिक तकनीक है। हृदय की धमनियों में जमे कैल्शियम को निकालने के लिए फ्लोरोस्कोप की सहायता से हृदय वाहिकाओं के अंदर कैथेटर की तरह एक छोटी घूमती हुई ड्रिल को डाला जाता है। कैथेटर तब कैल्शियम को काटता है। इस प्रकार कोरोनरी स्टेंट को आसानी से अंदर डाला जाता है और पर्याप्त रूप से इसे बढ़ाया जाता है। यह प्रयोग उन मरीजों में किया जाता है, जिनकी धमनी में जमा प्लाक अत्यंत कठोर हो जाता है और एक साधारण एंजियोप्लास्टी गुब्बारा धमनी को पूरी तरह से नहीं खोल सकता है।
ऐसे काम करती है तकनीक
विभाग के प्रोफेसर सत्येंद्र तिवारी, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रुपाली खन्ना ने बताया कि कैल्सीफाइड कोरोनरी धमनियां पारंपरिक एंजियोप्लास्टी के लिए एक तकनीकी चुनौती प्रस्तुत करती हैं। अब नई तकनीक आने से फायदा मिलेगा। सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित साहू ने बताया कि यह प्रक्रिया काफी आसान है और मरीज को एक दिन बाद ही छुट्टी दे दी जाती है। नए प्रयोग शुरू करने के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने पूरी टीम को बधाई दी।
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एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में आईं 50 साल की महिला मधुमेह व उच्च रक्तचाप से पीड़ित थीं। करीब छह माह से सीने में दर्द था। कोरोनरी एंजियोग्राफी से पता चाल कि हृदय की प्रमुख धमनी में कैल्शियम जमा है। इसे निकालने के लिए रेडियल रूट द्वारा रोटेब्लेशन तकनीक अपनाने का फैसला लिया गया। अब मरीज पूरी तरह ठीक है। एसजीपीजीआई के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. आदित्य कपूर ने बताया कि रोटेब्लेशन तकनीक कॉर्नरी आर्टरी डिजीज के इलाज की अत्याधुनिक तकनीक है। हृदय की धमनियों में जमे कैल्शियम को निकालने के लिए फ्लोरोस्कोप की सहायता से हृदय वाहिकाओं के अंदर कैथेटर की तरह एक छोटी घूमती हुई ड्रिल को डाला जाता है। कैथेटर तब कैल्शियम को काटता है। इस प्रकार कोरोनरी स्टेंट को आसानी से अंदर डाला जाता है और पर्याप्त रूप से इसे बढ़ाया जाता है। यह प्रयोग उन मरीजों में किया जाता है, जिनकी धमनी में जमा प्लाक अत्यंत कठोर हो जाता है और एक साधारण एंजियोप्लास्टी गुब्बारा धमनी को पूरी तरह से नहीं खोल सकता है।
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ऐसे काम करती है तकनीक
विभाग के प्रोफेसर सत्येंद्र तिवारी, एडिशनल प्रोफेसर डॉ. रुपाली खन्ना ने बताया कि कैल्सीफाइड कोरोनरी धमनियां पारंपरिक एंजियोप्लास्टी के लिए एक तकनीकी चुनौती प्रस्तुत करती हैं। अब नई तकनीक आने से फायदा मिलेगा। सहायक प्रोफेसर डॉ. अंकित साहू ने बताया कि यह प्रक्रिया काफी आसान है और मरीज को एक दिन बाद ही छुट्टी दे दी जाती है। नए प्रयोग शुरू करने के लिए संस्थान के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने पूरी टीम को बधाई दी।
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