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बड़ी खबरः 5 साल के गैप के बाद भी कर सकेंगे ग्रेजुएट

Sat, 08 Aug 2015 10:53 AM IST
Updated Sat, 08 Aug 2015 10:53 AM IST
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new rule on graduation regular study

इंटरमीडिएट और ग्रेजुएशन के बाद पांच साल तक गैप होने पर भी अब रेग्युलर पढ़ाई की जा सकेगी। इस पर छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी की एडमिशन कमेटी ने शुक्रवार को मुहर लगा दी है।

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यह पहला मौका है, जब पांच साल के लंबे अंतर (गैप) पर रेग्युलर पढ़ाई का विकल्प दिया गया। अभी तक एक साल के गैप पर ही एडमिशन मिलता था, वो भी भूतपूर्व स्टूडेंट के रूप में। नई व्यवस्था शैक्षिक सत्र 2015-16 से लागू कर दी गई है।
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एडमिशन का अधिकार प्रिंसिपल को दिया गया है।यूनिवर्सिटी की एडमिशन कमेटी की मीटिंग शुक्रवार को कैंपस के एकेडमिक भवन सभागार में हुई। इसमें राजकीय, अनुदानित और निजी डिग्री कॉलेजों में एडमिशन की समस्याओं पर चर्चा की गई।
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कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन की अध्यक्षता वाली कमेटी ने सबसे पहले एडमिशन का नया नियम बनाया। इसके मुताबिक इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद पांच साल का अंतर हुआ तो भी बीए, बीएससी और बीकॉम के रेग्युलर कोर्स में पढ़ाई का मौका मिल जाएगा।

जरूरी औपचारिकता पूरी करने पर एडमिशन मिलेगा। बीबीए, बीसीए, हेल्थ साइंसेज, बी. फार्मेसी, बीएससी बायोटेक सहित ग्रेजुएशन के अन्य कोर्सों में भी एडमिशन मिलेगा। इसी तरह बीए, बीएससी और बीकॉम की पढ़ाई के पांच साल बाद भी एमए, एमएससी और एमकॉम फर्स्ट ईयर में एडमिशन लिए जा सकेंगे। नई व्यवस्था से स्टूडेंटों का राहत मिलेगी।

पोस्ट ग्रेजुएशन में भी ले सकेंगे रेग्युलर एडमिशन

new rule on graduation regular study

गैप के बाद पढ़ाई की यह सुविधा ग्रेजुवेशन के बाद पोस्ट ग्रेजुवेशन में भी उपलब्‍ध रहेगी। गैप के बाद जो स्टूडेंट एडमिशन लेगें उनका मार्क्स फीसदी कम हो जाएगा। यानी एक साल का गैप है तो एक फीसदी मार्क्स कम जोड़े जाएंगे। दो साल का गैप है, तो दो प्रतिशत नंबर कम जोड़े जाएंगे।

यह सिलसिला पांच साल तक चलेगा। इसका मकसद नए स्टूडेंटों को नुकसान से बचाना है, क्योंकि एडमिशन की जो मेरिट लिस्ट बनेगी, उसमें नए स्टूडेंटों को वरीयता दी जाएगी।

यूनिवर्सिटी से संबद्ध अनुदानित लॉ कॉलेजों (वीएसएसडी, बीएनडी और डीसी लॉ कॉलेज) के पास शैक्षिक सत्र 2015-16 में एडमिशन की अनुमति नहीं है। संबंधित कॉलेज बार कौंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से मान्यता का पत्र नहीं दे सके हैं।

यही वजह है कि एडमिशन कमेटी ने एलएलबी तीन वर्षीय पाठ्यक्रम में एडमिशन के लिए हुई संयुक्त प्रवेश परीक्षा के रिजल्ट 17 अगस्त को घोषित करने के आदेश दिए हैं। कमेटी ने कहा है कि एलएलबी में एडमिशन का सीधा विकल्प नहीं दिया जाएगा। अनुदानित और निजी लॉ कॉलेजों की सीटें संयुक्त प्रवेश परीक्षा से भरी जाएंगी, लेकिन यह तभी संभव है, जब बीसीआई से एडमिशन की अनुमति मिले।

एडमिशन कमेटी ने इंटर यूनिवर्सिटी और इंटर डिग्री कॉलेजों में स्टूडेंटों के ट्रांसफर का नियम सख्त कर दिया है। कमेटी के मुताबिक सामान्य परिस्थितियों में स्टूडेंटों का कॉलेज नहीं बदला जाएगा। इसके लिए स्टूडेंटों को तमाम प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा।

नई प्रक्रिया का निर्धारण जल्द ही कर दिया जाएगा। अभी तक कॉलेज स्थानांतरण की आसान व्यवस्था थी। कॉलेज और यूनिवर्सिटी प्रशासन की अनुमति से ही स्टूडेंटों का ट्रांसफर हो जाता था।

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