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तंत्र पर भारी जालसाजों का नेटवर्क : एजेंसियों की नई-नई तकनीक का निकाल रहे तोड़, राजनीतिक संरक्षण की बात भी आई है सामने
Mon, 29 Nov 2021 01:37 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 29 Nov 2021 01:37 PM IST
सार
परीक्षाओं को नकलविहीन बनाने के लिए परीक्षा कराने वाली एजेंसियां नई-नई तकनीक इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं माफिया और सॉल्वर गैंग उसके भी तोड़ निकाल ले रहे हैं।
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यूपी टीईटी पेपर लीक
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
नकल माफिया और सॉल्वर गैंग मानो परीक्षा से जुड़ी एजेंसियों के साथ ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ का खेल खेल रहे हों। परीक्षाओं को नकलविहीन बनाने के लिए परीक्षा कराने वाली एजेंसियां नई-नई तकनीक इस्तेमाल कर रही हैं, वहीं माफिया और सॉल्वर गैंग उसके भी तोड़ निकाल ले रहे हैं।
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टीईटी पेपर कैसे लीक हुआ यह एसटीएफ की जांच में पता चलेगा। लेकिन इतना तय है कि पेपर एजेंसी से ट्रेजरी के बीच पहुंचने में ही कहीं लीक हुआ है। अब एसटीएफ एजेंसी के कर्मचारियों से भी पूछताछ करेगी। इसमें कौन सा गिरोह शामिल था, कितने में सौदा हुआ यह सब जांच के बाद ही सामने आएगा। इस तरह के खेल में शामिल अधिकतर गिरोह को एसटीएफ पहले ही ध्वस्त कर चुकी है, लेकिन कु छ ऐसे भी हैं जो अपने रसूख के चलते बच जाते रहे हैं।
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मसलन 2020 में शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी कराने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश प्रयागराज पुलिस ने किया था। इसमें कृष्ण लाल पटेल और चंद्रमा यादव की भूमिका सामने आई थी। यह दोनों कभी एसटीएफ की हिट लिस्ट में हुआ करते थे। पटेल के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई थी, लेकिन चंद्रमा राजनैतिक संरक्षण के चलते बचता रहा। बाद में भारी दबाव के बाद उसे एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया था। यह दो नाम तो बस एक बानगी भर हैं, ऐसे कई और गिरोह हैं जो लगातार एसटीएफ के रडार पर रहते हैं, इसके बावजूद वह परीक्षा की सुरक्षा को धता बताकर उसमें सेंध लगाने में कामयाब हो जाते हैं।
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