{"_id":"5a25157e4f1c1ba12d8b65ad","slug":"ncrb-report-on-missing-children-in-uttar-pradesh","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"यूपी में हर रोज लापता हो रहे आठ बच्चे, इनमें से तीन कभी नहीं मिलते, एक रिपोर्ट","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
यूपी में हर रोज लापता हो रहे आठ बच्चे, इनमें से तीन कभी नहीं मिलते, एक रिपोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 04 Dec 2017 08:03 PM IST
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यूपी में हर रोज औसतन आठ बच्चे लापता हो रहे हैं। इनमें से तीन कभी नहीं मिलते। वहीं जितने लापता बच्चे बरामद हो रहे हैं, उनमें से 33.5 प्रतिशत लड़कियां हैं। लड़कों में घर वापसी का प्रतिशत 38.4 है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो 2016 के इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि प्रदेश के लापता बच्चों का इस्तेमाल तस्करी में हो रहा है।
ये सभी बच्चे 18 से कम उम्र के हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक यूपी में एक वर्ष में 2903 बच्चे लापता हुए। वहीं पूर्व में लापता बच्चों की संख्या के साथ यह आंकड़ा 5169 पहुंच जाता है। सबसे बड़ी समस्या इनकी रिकवरी की है। जो बच्चे पाए गए हैं, उससे अधिक बच्चे लापता रह गए।
2015 में जहां 2266 बच्चे लापता रह गए थे, 2016 में यह संख्या बढ़कर 3308 पहुंच गई। वहीं इनमें लड़के और लड़कियों की संख्या क्रमश: 1625 और 1683 थी। दूसरी ओर लड़के और लड़कियों में लापता होने पर मिलने का अंतर बना हुआ है।
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इसकी एक वजह सामाजिक कारण भी बताए जा रहे हैं। कई बार परिवार अपनी बेटियों को अपनाने से इन्कार कर देते हैं। इसकी प्रमुख वजह उनका देह व्यापार से शामिल होना है। इस बीच घर से भागने के मामले से जुड़ी यूपी की 9 लड़कियों को एक सामाजिक संगठन द्वारा रविवार को मुंबई से वापस लाया गया।
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ये सभी बच्चे 18 से कम उम्र के हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक यूपी में एक वर्ष में 2903 बच्चे लापता हुए। वहीं पूर्व में लापता बच्चों की संख्या के साथ यह आंकड़ा 5169 पहुंच जाता है। सबसे बड़ी समस्या इनकी रिकवरी की है। जो बच्चे पाए गए हैं, उससे अधिक बच्चे लापता रह गए।
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2015 में जहां 2266 बच्चे लापता रह गए थे, 2016 में यह संख्या बढ़कर 3308 पहुंच गई। वहीं इनमें लड़के और लड़कियों की संख्या क्रमश: 1625 और 1683 थी। दूसरी ओर लड़के और लड़कियों में लापता होने पर मिलने का अंतर बना हुआ है।
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इसकी एक वजह सामाजिक कारण भी बताए जा रहे हैं। कई बार परिवार अपनी बेटियों को अपनाने से इन्कार कर देते हैं। इसकी प्रमुख वजह उनका देह व्यापार से शामिल होना है। इस बीच घर से भागने के मामले से जुड़ी यूपी की 9 लड़कियों को एक सामाजिक संगठन द्वारा रविवार को मुंबई से वापस लाया गया।
जानें, कहां जा रहे बच्चे
इन नाबालिग लड़कियों को मुंबई के विभिन्न बाल गृहों में रखा गया था। उससे पहले उन्हें विभिन्न जगहों से बरामद किया गया था। उन्हें लाने वाले संस्थान के अध्यक्ष कीर्ति वर्धन ने बताया कि सभी बच्चियों का स्वास्थ्य ठीक है और उन्हें उनके घर पहुंचाने के लिए पहले उनके पते तलाशे गए, तभी मुंबई से लाया गया।
उन्हाेंने बताया कि सभी बच्चियों के माता-पिता एक दो दिन में लखनऊ आकर उन्हें वापस ले जाएंगे। इस दौरान बाल कल्याण समिति लखनऊ के समक्ष उन्हें प्रस्तुत किया जाएगा और राजकीय बालिका गृह भेजा जाएगा।
कहां जा रहे बच्चे
- तस्करी एक बड़ा जरिया है जहां बच्चों को गायब किया जा रहा है। ये बच्चे देह व्यापार से लेकर बंधुआ मजदूरी तक में लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनक ा वापस आना संभव नहीं रह जाता।
- मजदूरी दूसरी प्रमुख वजह है, जिनके लिए इन बच्चों को गायब किया जा रहा है। इन्हें खेतों से लेकर छोटी मोटी हैंडक्राफ्ट इकाइयों तक में काम पर लगाया जा रहा है।
- घर से दूर भागना भी बच्चों के गायब होने की वजह है। जो बच्चे बरामद हो रहे हैं, वे बताते हैं कि घर पर खराब हालात, पिटाई और गरीबी की वजह से वे बड़े शहरों जैसे दिल्ली या मुंबई की ओर भाग जाते हैं।
- पहले से कोई और बच्चा या व्यक्ति उनके संपर्क में होता है, जो उन्हें छोटा- मोटा काम दिला देता है।
उन्हाेंने बताया कि सभी बच्चियों के माता-पिता एक दो दिन में लखनऊ आकर उन्हें वापस ले जाएंगे। इस दौरान बाल कल्याण समिति लखनऊ के समक्ष उन्हें प्रस्तुत किया जाएगा और राजकीय बालिका गृह भेजा जाएगा।
कहां जा रहे बच्चे
- तस्करी एक बड़ा जरिया है जहां बच्चों को गायब किया जा रहा है। ये बच्चे देह व्यापार से लेकर बंधुआ मजदूरी तक में लगाए जा रहे हैं। यही वजह है कि उनक ा वापस आना संभव नहीं रह जाता।
- मजदूरी दूसरी प्रमुख वजह है, जिनके लिए इन बच्चों को गायब किया जा रहा है। इन्हें खेतों से लेकर छोटी मोटी हैंडक्राफ्ट इकाइयों तक में काम पर लगाया जा रहा है।
- घर से दूर भागना भी बच्चों के गायब होने की वजह है। जो बच्चे बरामद हो रहे हैं, वे बताते हैं कि घर पर खराब हालात, पिटाई और गरीबी की वजह से वे बड़े शहरों जैसे दिल्ली या मुंबई की ओर भाग जाते हैं।
- पहले से कोई और बच्चा या व्यक्ति उनके संपर्क में होता है, जो उन्हें छोटा- मोटा काम दिला देता है।
मिल भी जाते हैं कुछ बच्चे
यूपी का हाल
- साल 2016 में यूपी से कुल 2903 बच्चे लापता हुए थे।
- इनमें 1465 लड़कियां और 1438 लड़के थे।
- पूर्व के लापता 2266 बच्चों को मिला दें तो यह संख्या 5169 हो जाती है।
- इनमें 2529 लड़कियां और 2640 लड़के हैं।
देश का हाल
- 2016 में कुल 63407 बच्चे लापता हुए।
- इनमें 41067 लड़कियां और 22340 लड़के थे।
- पूर्व के 48162 बच्चों सहित कुल संख्या 1,11,569 पहुंच जाती है।
- इनमें 70394 लड़कियां और 41175 लड़के हैं।
मिल भी जाते हैं कुछ बच्चे
- ऐसा नहीं है कि सभी लापता बच्चे कभी नहीं मिलते। 2016 में यूपी में जितने बच्चों की गुमशुदगी दर्ज हुई थी, उनमें से 1861 का पता लगा लिया गया। इनमें 816 लड़कियां और 1015 लड़के थे।
- प्रतिशत के लिहाज से देखें तो जहां 33.5 प्रतिशत लड़कियां ट्रेस की गईं, वहीं 38.4 प्रतिशत लड़के फिर से परिवार से मिलाए गए। कुल प्रतिशत 36 प्रतिशत का ही रहा।
- कुल लापता बच्चों की संख्या 3308 रही, जिनमें 1683 लड़कियां और 1625 लड़के थे।
- साल 2016 में यूपी से कुल 2903 बच्चे लापता हुए थे।
- इनमें 1465 लड़कियां और 1438 लड़के थे।
- पूर्व के लापता 2266 बच्चों को मिला दें तो यह संख्या 5169 हो जाती है।
- इनमें 2529 लड़कियां और 2640 लड़के हैं।
देश का हाल
- 2016 में कुल 63407 बच्चे लापता हुए।
- इनमें 41067 लड़कियां और 22340 लड़के थे।
- पूर्व के 48162 बच्चों सहित कुल संख्या 1,11,569 पहुंच जाती है।
- इनमें 70394 लड़कियां और 41175 लड़के हैं।
मिल भी जाते हैं कुछ बच्चे
- ऐसा नहीं है कि सभी लापता बच्चे कभी नहीं मिलते। 2016 में यूपी में जितने बच्चों की गुमशुदगी दर्ज हुई थी, उनमें से 1861 का पता लगा लिया गया। इनमें 816 लड़कियां और 1015 लड़के थे।
- प्रतिशत के लिहाज से देखें तो जहां 33.5 प्रतिशत लड़कियां ट्रेस की गईं, वहीं 38.4 प्रतिशत लड़के फिर से परिवार से मिलाए गए। कुल प्रतिशत 36 प्रतिशत का ही रहा।
- कुल लापता बच्चों की संख्या 3308 रही, जिनमें 1683 लड़कियां और 1625 लड़के थे।