'हमने भाजपा के साथ सरकार बनाई पर आरएसएस का एजेंडा नहीं लागू होने दिया'
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बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने भाजपा से मिलकर चुनाव लड़ने या आगे चलकर उसके सहयोग से सरकार बनाने की संभावना से इन्कार किया है।
उन्होंने कहा कि सपा और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव मुसलमानों को भ्रमित कर उनके वोटों का बंटवारा कर सूबे में भाजपा की सरकार बनवाना चाहते हैं।
सिद्दीकी शुक्रवार को पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री अखिलेश के उस बयान पर सफाई दी जिसमें उन्होंने कहा था कि बसपा और भाजपा मिलकर तीन बार सरकार बना चुकी हैं। आगे क्या गारंटी है कि वे फिर मिलकर सरकार नहीं बनाएंगी?
सिद्दीकी ने कहा कि बसपा ने भाजपा के साथ मिलकर सरकार जरूर चलाई, लेकिन भाजपा व आरएसएस के एजेंडे को कभी लागू नहीं होने दिया। सरकार छोड़ना मंजूर किया, पर सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।
भाजपा और सपा पर्दे के पीछे मिलकर लाशों के ढेर पर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करती हैं। मुसलमान सपा के इरादे को समझ गया है। वह सपा से दूर हो गया है।
सपा का जन्म ही भाजपा व जनसंघ की मदद से
सिद्दीकी ने कहा कि सपा का जन्म ही जनसंघ और भाजपा की मदद से हुआ। सपा मुखिया मुलायम 1967 में जनसंघ की मदद से पहली बार एमएलए बने।
1977 में न सिर्फ उन्होंने जनसंघ के तत्कालीन नेताओं के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, बल्कि प्रदेश में मिलकर सरकार चलाई और मंत्री भी बने। भाजपा को दो सांसदों से 88 सांसद तक पहुंचाने वाली सपा ही है।
बसपा सरकार में भाजपा कमजोर हुई, सपा में मजबूत
सिद्दीकी ने कहा कि 2009 में लोकसभा चुनाव के दौरान प्रदेश में बसपा की सरकार थी, तब भाजपा सिर्फ नौ सीटें जीत पाई थी। वहीं, 2014 में जब सपा की सरकार रही, तो भाजपा 73 सीटों तक पहुंच गई।
मुसलमानों को सपा ने दिया धोखा
सिद्दीकी ने कहा कि सपा ने मुसलमानों को धोखा दिया है। 2012 के घोषणा पत्र में मुसलमानों को आबादी के हिसाब से आरक्षण देने का वादा यह जानते हुए किया था कि यह काम संविधान संशोधन बिना नहीं हो सकता।
इसी तरह बेगुनाह मुस्लिमों को जेल से छोड़ने का वादा किया। सपा बताए कि इन वादों का क्या हुआ?
तीन तलाक पर चुप्पी साधी
सिद्दीकी ने तीन तलाक पर कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया। उन्होंने कहा कि यह नीतिगत मामला है और पार्टी इस पर अपना स्टैंड तय कर अपना रुख स्पष्ट करेगी।