देखने लायक होगा, मेरठ में मोदी का तेवर
भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र
गंगा-यमुना के दोआबे में स्थित यह धरती भगवा खेमे के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जाती रही है। यहां के सियासी व सामाजिक समीकरण मुसीबत में भी भाजपा को ताकत देते रहे हैं।
पार्टी के 47 विधायकों में सर्वाधिक 12 विधायक उन्हीं जिलों से हैं, जिनके लोग मेरठ की रैली में बुलाए गए हैं। मोदी व राजनाथ रविवार दोपहर डेढ़ बजे मेरठ पहुंचेंगे।
मोदी की मेरठ
रैली में मेरठ, सहारनपुर और मुरादाबाद मंडलों के 14 जिलों से भीड़ जुटाई जा
रही है। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में इस इलाके से भाजपा को दो सीटें
मिली थीं जबकि साथ मिलकर चुनाव लड़े रालोद के तीन सांसद चुने गए थे।
रालोद
अब यूपीए का हिस्सा है। भाजपा इस बार अकेले चुनाव मैदान में उतरने की
तैयारी कर रही है। मुजफ्फरनगर और शामली दंगों के बाद वेस्ट यूपी का सियासी
माहौल बदला हुआ है।
भाजपा को वोटों के ध्रुवीकरण की उम्मीद है। यही इलाका
रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह का है। बसपा सुप्रीमो मायावती भी यहीं से
हैं।
यह इलाका कल्याण सिंह के प्रभाव क्षेत्र वाला भी माना जाता रहा है।
मेरठ से सटे गाजियाबाद से ही पार्टी के अध्यक्ष राजनाथ सिंह सांसद हैं।
संकेत यह भी हैं कि मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर डॉ. सत्यपाल सिंह भी मेरठ
रैली में ही भाजपा में शामिल हो जाएं। रैली को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष
राजनाथ सिंह भी संबोधित करेंगे।