काम की खबर: मेकअप दुरुस्त करेगा महिलाओं की सेहत
मेकअप अधिकतर महिलाओं की पसंद होती है। इसके फायदे नुकसान को लेकर कई तरह के अध्ययन हुए हैं। नैनो पार्टिकल्स की मदद से यही मेकअप उनमें पोषण की दूर करने का जरिया बन सकता है।
सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) लखनऊ में शनिवार को आयोजित काउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (सीएसआईआर) में इस वर्ष सीडीआरआई अवॉर्ड 2015 से नवाजी गईं आईआईटी बॉम्बे की प्रोफेसर रिंटी बैनर्जी ने इस संबंध में व्याख्यान दिया।
इस दौरान उन्होंने नैनो पार्टिकल्स के दवाओं में उपयोग के रोचक और भविष्य में संभावित उपयोग पर जारी अध्ययनों की जानकारी दी। प्रो. बैनर्जी ने ‘ट्रिगर रिस्पॉन्सिव नैनो पार्टिकल्स फॉर ड्रग डिलीवरी’ विषय पर व्याख्यान दिया।
उन्होंने बताया कि किसी तरह नैनो पार्टिकल का उपयोग हमारे शरीर में दवाओं को पहुंचाने में किया जा सकता है। अपने हालिया अध्ययनों में मिली सफलता के आधार पर उन्होंने बताया कि नैनो पार्टिकल्स को शरीर में दाखिल करवाने में हमारी त्वचा एक बहुत अच्छा जरिया बन सकती है।
स्ट्रेटम कॉर्नियम सतह बाहरी तत्वों को भीतर दाखिल होने से रोक देती है। इसी सतह के जरिए नैनो पार्टिकल्स के जरिए पोषक तत्वों और जरूरत होने पर दवा को पहुंचा जा सकता है। प्रो. बैनर्जी ने बताया कि भारतीय महिलाओं के शरीर में प्रसव के दौरान फोलिक एसिड और आयरन की कमी आमतौर पर देखने को मिल रही है।
इन मामलों में मेकअप के दौरान उपयोग होने वाले कॉस्मेटिक उत्पादों में इन पोषक तत्वों को नैनो पार्टिकल्स के जरिए महिलाओं को दिया जा सकता है। वे इनका उपयोग अपनी त्वचा पर करेंगी तो नैनो पार्टिकल उनके शरीर में मेकअप के प्रोडक्ट्स में शामिल पोषक तत्वों को शरीर के भीतर ले जा सकते हैं। यह पोषण की कमी दूर करने में सहायक साबित होगा।
सूंघकर दिमाग में पहुंचेगी दवा
मेडिकल साइंस में आज भी दिमाग को दवाएं पहुंचाना एक मुश्किल काम माना जाता है। नैनोपार्टिकल्स भविष्य में यह काम आसान कर सकते हैं। प्रो. बैनजी ने बताया कि दवाओं को नैनो पार्टिकल्स के साथ इंट्रा-नेसल यानी सूंघाकर पहुंचाया जा सकता है।
माना जा रहा है कि इससे मात्र तीस मिनट में दवा का अधिकतम हिस्सा दिमाग तक पहुंचाया जा सकेगा। इसी तरह लिक्विड में इनका उपयोग आर्थराइटिस का इलाज करने और हड्डियों को दुरुस्त करने में कैल्शियम कंपोजिट के साथ शरीर में दाखिल कराया जा सकता है।
कैंसर के इलाज के दौरान दी गई दवाओं से शरीर के हृदय, फेफड़े और किडनी जैसे अंगों में जहरीले तत्व भारी मात्रा में जमा होकर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। नैनो पर्टिकल्स के जरिए इन दवाओं का अधिकतम हिस्सा कैंसर कोशिकाओं तक पहुंचाया जा सकता है।
क्या होते हैं नैनो पार्टिकल्स
ऐसे तत्व जिनका आकार 1 से 100 नैनोमीटर तक होता है। एक नैनो मीटर यानी 0.000001 मिलीमीटर। हमारे बाल 80 हजार से 1 लाख नैनोमीटर मोटे होते हैं। थोड़ा और आसानी से बतलाएं तो एक स्वस्थ व्यक्ति के नाखून प्रति सेकंड एक नैनोमीटर की गति से बढ़ते हैं।