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कमाई घटी, नगर निगम में गहराएगा आर्थिक संकट,शहर के विकास कार्यों पर भी दिखेगा असर

Sun, 24 Jan 2021 01:17 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Jan 2021 01:17 AM IST
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nagar nigam failed to attain the income target; developmet plans may affect
nagar nigam failed to attain the income target; developmet plans may affect
प्रवेंद्र गुप्ता
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लखनऊ। आर्थिक संकट झेल रहे नगर निगम की परेशानी नए साल में बढ़ने वाली है। यह संकेत आमदनी की ताजा रिपोर्ट से मिल रहा है। इसके मुताबिक चालू वित्तीय वर्ष में आमदनी बीते वर्ष की तुलना में दिसंबर तक करीब 10 करोड़ रुपये कम हो गई है। यह हाल तब है जब कोरोना संकट के बावजूद इस बार अधिक शहरवासियों ने गृहकर जमा किया है। निगम की आय कम होने का असर विकास कार्यों पर भी दिखेगा। नगर आयुक्त अजय द्विवेदी का कहना है कि गृहकर में इस बार अधिक आय हुई है। जिन मदों में आमदनी कम है, उसे भी बढ़ाने का प्रयास है। कोरोना के चलते पार्किंग के ठेके नहीं उठ पाए। अब इस वित्तीय वर्ष के शेष महीने और नए वित्तीय वर्ष को मिलाकर 14 महीने का टेंडर होगा।
आर्थिक तंगी से पार्षद कोटे की चौथी किश्त बजट में पास होने के बाद भी अधर में है। कर्मचारियों को वेतन भी 10 तारीख के बाद जारी हो सका। बकाया भुगतान न मिलने से ठेकेदार भी परेशान हैं। इसका असर निर्माण कार्यों से लेकर सफाई व्यवस्था तक पर पड़ सकता है। इसे लेकर पार्षद सोशल मीडिया पर भी समस्या उठा रहे हैं। पार्षद लईक आगा ने कहा कि उनके वार्ड में सफाई करने वाली एजेंसी काम ठप कर सकती है। उधर, निगम के कर्मचारी संगठन भी देयकों के बकाया भुगतान को लेकर आंदोलन की चेेतावनी दे रहे हैं। ठेकेदार भुगतान को लेकर घेराव कर महापौर और नगर आयुक्त को ज्ञापन भी दे चुके हैं।
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रोड कटिंग में आधी हुई आमदनी
बीते वित्तीय वर्ष में निगम ने रोड कटिंग में 3.05 करोड़ रुपये की आय की थी। चालू वित्तीय वर्ष में यह आंकड़ा 1.66 करोड़ ही रहा। इसे लेकर सवाल भी उठ रहे कि जब रोजाना किसी ने किसी इलाके में अवैध रोड कटिंग का मामला सामने आता है तो फिर निगम सख्ती क्यों नहीं कर रहा।
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विज्ञापन से आय में 54 लाख का झटका
बीते वित्तीय वर्ष में विज्ञापन से 1.40 करोड़ रुपये की आय हुई थी। इस साल महज 86 लाख की ही आमदनी हुई। अब वित्तीय वर्ष समाप्त होने को है और कोई ठेका भी नहीं उठना है। ऐसे में मद में आय की उम्मीद भी नहीं है।
शो टैक्स में 80 प्रतिशत की कमी
पिछले वित्तीय वर्ष में नगर निगम ने सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स से शो टैक्स के 37.97 लाख रुपये वसूले थे। इस साल दिसंबर तक महज 7.52 लाख रुपये की ही आय हुई। यह बीते साल से करीब 80 प्रतिशत कम है, जबकि शो टैक्स की दर बढ़ गई थी।
पार्किंग से आय में 75 लाख की गिरावट
नगर निगम ने बीते वित्तीय वर्ष में पार्किंग से 2.55 करोड़ की आय की थी, जो इस दिसंबर तक 75 लाख रुपये कम 1.80 करोड़ ही रही। पार्किंग ठेके अप्रैल से उठते हैं।
कल्याण मंडपों से आमदनी भी हुई कम
बीते वित्तीय वर्ष में निगम ने कल्याण मंडपों से 71.12 लाख रुपये कमाए थे। चालू वित्तीय में महज 21.12 लाख की आय हुई। कोरोना के चलते कम वैवाहिक आयोजन होने से ऐसा हुआ।

इन मदों में आय भी बढ़ी
गृहकर वसूली में इस वित्तीय वर्ष में 174 करोड़ की आय हुई। बीते साल 172 करोड़ की आमदनी हुई थी।
गृहकर नाम परिवर्तन में चालू वित्तीय वर्ष में निगम ने 7.29 करोड़ की आय की। बीते वर्ष में आंकड़ा महज 1.02 करोड़ था।
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के यूजर चार्ज से चालू वित्तीय वर्ष में 3.22 करोड़ की आय की। बीते वर्ष में 2.72 करोड़ की आमदनी हुई थी।
पालतू कुत्तों के लाइसेंस के नगर निगम ने चालू वित्तीय वर्ष में 6.47 लाख रुपये कमाए। बीते वर्ष इससे 5.01 लाख रुपये की आय हुई थी।
इधर, पेट्रोल खर्च बढ़ा, फिर भी नहीं अपनाए बचत के रास्ते
लखनऊ। नगर निगम में डीजल-पेट्रोल का खर्च सात करोड़ बढ़कर करीब 38 करोड़ हो गया है। फिर भी सीएनजी और बायोडीजल का इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है। इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाने की योजना ठंडे बस्ते में है। कचरा निस्तारण, मार्ग प्रकाश, अभियंत्रण विभाग, उद्यान विभाग, प्रवर्तन दल, क्रेन, जेसीबी व स्टाफ की कार मिलाकर 400 गाड़ियां हैं। इनके डीजल-पेट्रोल पर हर साल 30 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 31 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान था, पर यह कम पड़ गया। इस कारण दिसंबर में पुनरीक्षित बजट में यह सात करोड़ रुपये और बढ़ाया गया। ऐसा तब हुआ जब तीन साल पहले कहा गया था कि गोमतीनगर में केंद्रीय कार्यशाला के सामने खाली सलेज फॉर्म की जमीन पर सीएनटी स्टेशन बनेगा। दो साल पहले यह भी तय हुआ था कि नगर आयुक्त और दो अपर नगर आयुक्त के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ियां लाई जाएंगी। फिर अन्य स्टाफ की कार को इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। दो साल पहले बायोडीजल के प्रयोग की योजना थी। एक कंपनी ने प्रस्ताव भी दिया था, पर अब यह कहीं गुम गया है।
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