फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   muslim intellectual organize a meeting in lucknow on ayodhaya case

मुस्लिम बुद्धिजीवियों की पहल, हिंदुओं को गिफ्ट करें वक्फ बोर्ड की 2.77 एकड़ जमीन

Thu, 10 Oct 2019 09:47 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Thu, 10 Oct 2019 09:47 PM IST
विज्ञापन
muslim intellectual organize a meeting in lucknow on ayodhaya case
बैठक में शामिल मुस्लिम बुद्धिजीवी - फोटो : amar ujala
इंडियन मुस्लिम फॉर पीस के बैनर तले मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने बृहस्पतिवार को अदालत के बाहर अयोध्या विवाद के सौहार्द्रपूर्ण समाधान के लिए पहल की है। उन्होंने सुझाव दिया है कि अयोध्या में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड की 2.77 एकड़ जमीन हिंदुओं को गिफ्ट करने के लिए सरकार को सौंप दी जाए। 
विज्ञापन


मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिमों को वैकल्पिक जगह दे दी जाए। इंडियन मुस्लिम फॉर पीस की बैठक में इस पर आम सहमति बनी है। अदालत के बाहर मध्यस्थता से विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए इस आशय का प्रस्ताव पारित कर इसे सुप्रीम कोर्ट और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को भेजा जाएगा।
विज्ञापन


राजधानी लखनऊ में गोमती नगर स्थित एक होटल में इंडियन मुस्लिम फॉर पीस की बैठक में मुस्लिम बुद्धिजीवियों ने अपनी इस पहल की जानकारी दी। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति रहे लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त जमीरुद्दीन शाह ने कहा कि वे करोड़ों लोगों की आवाज को देश के सामने रखना चाहते हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उन्होंने कहा कि यदि सुप्रीम कोर्ट से अयोध्या में जमीनी विवाद का फैसला हक मुस्लिमों के पक्ष में आ जाए तो भी मस्जिद का निर्माण मुमकिन नहीं है। बेहतर यह है कि जमीन हिंदुओं को दे दी जाए। इससे देश में अमन बना रहेगा, सांप्रदायिक फसाद नहीं होगा। मुस्लिम समाज के भविष्य के लिए भी यह बेहतर होगा। 

उन्होने कहा, एक अच्छा जनरल वह होता है जो बिना जंग किए जीतता है। इसीलिए हम चाहते हैं कि अयोध्या विवाद का हल अदालत के बाहर निकल आए तो अच्छा रहेगा। बहुसंख्यक हिंदुओं की भावनाओं को देखते हुए उन्हें जमीन गिफ्ट कर दी जाए। इस मुद्दे पर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड हमारे साथ है।

लेफ्टिनेंट जनरल शाह ने कहा, वक्फ बोर्ड ने अदालत में मध्यस्थता के विवाद के समाधान के लिए अर्जी दी है। हम इंडियन मुस्लिम फॉर पीस की मीटिंग में पारित प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता कमेटी को भेजेंगे। उन्होंने कहा, हम अदालत से भी चाहते हैं कि वह अयोध्या विवाद में पंचायती फैसला न देकर स्पष्ट आदेश पारित करे। 

बैठक में प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव एसएटी रिजवी, कर्नाटक के डीजीपी रहे निसार अहमद, जाने-माने डॉक्टर पदमश्री मंसूर हसन, पूर्व मंत्री मोईद अहमद, कांग्रेस नेता रहे लव भार्गव, सेवानिवृत्त आईपीएस व पूर्व कुलपति विभूति नारायण राय, इंडियन मुस्लिम फॉर पीस के कनवीनर कलाम खान समेत शिक्षाविद्, पूर्व नौकरशाह, अधिवक्ता, डॉक्टर, इंजीनियर, पत्रकार व कई प्रमुख व्यवसायी मौजूद थे।
 

यह भी चाहते हैं मुसलमान

सेवानिवृत्त आईएएस व पूर्व कुलपति डॉ. अनीस अंसारी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में कानूनी कार्यवाही चलती रहे और अदालत के बाहर विवाद के समाधान की कोशिशें भी जारी रहनी चाहिए। इंडियन मुस्लिम फॉर पीस का सुझाव है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ 2.77 एकड़ जमीन सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर कर दे। इसके बदले मस्जिद बनाने के लिए वैकल्पिक जगह दे दी जाए। 

इंडियन मुस्लिम फॉर पीस का यह भी प्रस्ताव है कि प्रोटेक्शन ऑफ रिलीजियस प्लेसेस एक्ट 1991 में सजा को तीन माह से बढ़ाकर तीन साल कर दिया जाए। 6 दिसंबर 92 के मुकदमों का निस्तारण कर दोषियों को जल्द सजा दिलाई जाए।

अयोध्या में अन्य मस्जिद, इमामबाड़ों, बारगाहों व दरगाहों की मरम्मत की इजाजत दी जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि एएसआई की देखरेख वाली पुरानी मस्जिदों, इमामबाड़ों में नमाज की इजाजत दी जाए। उन्होंने बताया कि ये सभी प्रस्ताव सर्वसम्मति के पारित किए गए हैं।

मुस्लिमों के बारे में धारणा बदलना चाहते हैं: नकवी

सेवानिवृत्त जज बीडी नकवी ने कहा कि बहुसंख्यक हिंदुओं की धारणा बन गई है कि अयोध्या में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। हम हिंदुओं को जमीन गिफ्ट करके मुस्लिमों के प्रति उनकी धारणा बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा, वक्फ एक्ट में मुस्लिम जमीन की अदला-बदली कर सकते हैं। अयोध्या में मस्जिद नहीं भूमि है। यह मुस्लिमों की तरफ से हिंदुओं को तोहफे के रूप में दी जा सकती है। 

उन्होंने कहा, भारत में 90 फीसदी मुस्लिम कनवर्टेड हैं। भले ही धर्म बदल गए लेकिन हिंदू और मुस्लिम भाई हैं फिर वे दुश्मनों की तरह क्यों रहें ? उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर एक साल के काम चल रहा है। अदालत 1995 में ही कह चुकी है कि कोर्ट के आदेश के बजाय अदालत के बाहर समाधान बेहतर है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक मध्यस्थता की कोशिश चलनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed