मायावती का पलटवार, कहा मुलायम को पागलखाने भेजो
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मुलायम द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का करारा जवाब देते हुए मायावती ने कहा कि मुलायम का दिमागी संतुलन बिगड़ चुका है, उन्हें पागल खाने भेज देना चाहिए।
मायावती ने यादव को महिला व दलित विरोधी बताते हुए चुनाव आयोग से उनकी चुनावी सभाओं पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने मुलायम का मानसिक संतुलन बिगड़ने का आरोप लगाते हुए उन्हें आगरा के पागलखाने में इलाज के लिए भर्ती कराने को कहा है।
बसपा मुखिया ने कहा कि मुलायम ने चुनावी लाभ के लिए जातीय हिंसा भड़काने की योजना के तहत यह बयान दिया है।
बसपा अध्यक्ष ने रात सवा आठ बजे अपने माल एवेन्यू स्थित आवास पर आनन-फानन में प्रेसवार्ता बुलाकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
भड़क सकते हैं दंगे
मायावती ने बताया कि वह सुबह मतदान और दिन की दो जनसभाओं को संबोधित कर राजधानी लौटीं तो सपा मुखिया द्वारा मेरे संबंध में आपत्तिजनक, महिला विरोधी, गरिमाहीन और गिरी हुई मानसिकता से दिए गए निंदनीय बयान की जानकारी मिली।
पहले वह इस संबंध में सुबह बात करना चाहती थी लेकिन प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं के आक्रोश की खबर आ रही थी।
इससे जातीय दंगे भड़क सकते हैं और देश भर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है।
ऐसे में बाकी चुनाव को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए मौके की नजाकत, समझदारी और सूझबूझ से काम लेते हुए कार्यकर्ताओं से संयम बरतने को कहा है।
कार्यकर्ताओं से आक्रोश का जवाब बाकी दो चरणों में सपा का सफाया कर बसपा को ज्यादा से ज्यादा सीटें जिताने की अपील की है।
मुलायम का बयान
चुनावी दौर में नेताओं का एक दूसरे पर बयान देना जारी है। फैजाबाद में एक्र रैली के दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने मायावती पर आपत्तिजनक बयान दे दिया।
फैजाबाद के जीआईसी में बुधवार को आयोजित रैली में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की बसपा सुप्रीमो मायावती को लेकर फिर जुबान फिसली।
उन्होंने मायावती को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की और कहा कि इनको श्रीमती कहूं, कुवांरी, बेटी या फिर बहन..।
राजकीय इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए सपा सुप्रीमो मुलायम ने मायावती की ओर से बार-बार मुसलमान-मुसलमान कहे जाने को लेकर कहा कि ‘हम अयोध्या में खड़े हैं।
याद आया बाबरी विध्वंस
सब जानते हैं कि क्या हुआ था और उसमें कौन-कौन था? बैठे लोग जानते हैं कि किसने संघर्ष किया था। तब ये (कांग्रेस व बसपा) कहां थे? तब ये कहते थे कि वहां पैखाना बनवा दो।
याद है.. कहा था लड़ाई ही बंद हो जाएगी। पैखाना बनवा दो। रेलवे स्टेशन पर जाते हैं, हवाई अड्डे पर जाते हैं। काहे की लड़ाई..।
हिंदू-मुस्लिम दोनों के लिए पैखाना बनवा दो। यह कांशीराम का बयान है।’ ये इनका (मायावती) का बयान है। श्रीमती का..। श्रीमती कहूं, कुंवारी, बेटी कहें या फिर बहन?
अब ये (बसपा-कांग्रेस वाले) बयान देते हैं। कुछ भी कहते हैं और कुछ भी करते हैं? उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की कथनी व करनी में भेद नहीं है।
मुस्लिमों को लुभाने की होड़
गौरतलब है कि मायावती और मुलायम सिंह यादव दोनों ही मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं।
इसी सिलसिले में एक रैली के दौरान मायावती ने भी मुस्लिम वोट पाने के लिए बयान दिया था कि अगर केंद्र में बसपा के नेतृत्व में सरकार बनती है तो वह सच्चर कमेटी की सिफारिशें लागू करेंगी।
उन्होने बसपा को मुस्लिम हितैषी पार्टी करार देते हुए कहा था कि हमारी ही पार्टी ने सर्वाधिक 19 उम्मीदवारों को टिकट दिया है।