फिर टूटा अपना दल, सांसद हरिवंश ने बनाया ‘अखिल भारतीय अपना दल’, अनुप्रिया मिलेंगी अमित शाह से
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अपना दल का एक और विभाजन हो गया। प्रतापगढ़ से अपना दल के सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने अखिल भारतीय अपना दल का गठन किया है। इसके अध्यक्ष जगदीश पटेल बनाए गए हैं जबकि हरिवंश सिंह खुद महासचिव होंगे।
वाराणसी के अनिल कुमार पटेल को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। हरिवंश सिंह मंगलवार को दारुलशफा के कॉमन हाल में मंगलवार को होने वाले कार्यकर्ता सम्मेलन में अपने नए दल के गठन का विधिवत एलान करेंगे। वहीं, अनुप्रिया पटेल भाजपा से विवादों को सुलझाने के लिए 27 को अमित शाह से मुलाकात करेंगी।
वर्ष 2014 में अपना दल से अनुप्रिया पटेल के अलावा हरिवंश सिंह सांसद चुने गए थे। अनुप्रिया पटेल केंद्र सरकार में राज्य मंत्री बनीं। अनुप्रिया का जब उनकी मां कृष्णा पटेल से विवाद शुरू हुआ तो हरिवंश ने कृष्णा पटेल का साथ दिया। इसके चलते उनकी अनुप्रिया से दूरियां बन गईं थीं। इसके चलते अनुप्रिया खेमे ने अपना दल (सोनेलाल) का गठन कर लिया था। यह विवाद अभी अदालत में लंबित है।
उधर, पिछले दिनों कृष्णा पटेल की अगुवाई वाले अपना दल के सम्मेलन में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव शामिल हुए थे। इसके बाद तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे।
कृष्णा पटेल ने ही दिया था टिकट
हरिवंश ने कहा है कि कृष्णा पटेल ने ही उन्हें 2014 के लोकसभा चुनाव में प्रतापगढ़ से टिकट दिया था, इसलिए वह उनके साथ खड़े हुए थे। कृष्णा पटेल ने शिवपाल सिंह यादव की प्रसपा (लोहिया) से समझौता कर लिया है। वह किसी भी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का साथ नहीं छोड़ सकते हैं, इसलिए उन्होंने अखिल भारतीय अपना दल का गठन किया है। वह खुद इसके राष्ट्रीय महासचिव हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात पर मंगलवार को वह नए दल के गठन को लेकर अपना दल के संस्थापक सोनेलाल पटेल के करीबी लोगों के बीच अपनी बात रखेंगे।
अपना दल ने 28 फरवरी को बुलाई राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक
अपना दल (एस) व भाजपा के गठबंधन में गतिरोध को दूर करने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 27 फरवरी को अनुप्रिया पटेल को बातचीत के लिए बुलाया है। यह मुलाकात इसलिए महत्वपूर्ण है कि अपना दल (एस) ने 28 फरवरी को राष्ट्रीय व प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक बुलाई है। इसमें विचार किया जाएगा कि भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखा जाए या नहीं। दल के नेताओं के रुख से लग रहा है कि एनडीए से अलग होने का फैसला भी हो सकता है।