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Modi Cabinet : जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस, ओबीसी के साथ दलितों की हिस्सेदारी बरकरार

Mon, 10 Jun 2024 04:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ
सुधीर कुमार सिंह, लखनऊ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 10 Jun 2024 04:17 AM IST
सार

सीटें कम होने के बाद भी यूपी के कोटे से जहां 10 मंत्री बनाए गए हैं, वहीं हर वर्ग व समाज को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है।

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Modi Cabinet: Focus on ethnic and regional balance,
Modi Cabinet 3.0 - फोटो : X/bjp4India

विस्तार

यूपी में भाजपा की सीटें भले ही कम हुई हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूपी की हिस्सेदारी के साथ ही जातीय और क्षेत्रीय संतुलन का खास ख्याल रखा है । सीटें कम होने के बाद भी यूपी के कोटे से जहां 10 मंत्री बनाए गए हैं, वहीं हर वर्ग व समाज को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। जातीय समीकरण के लिहाज से ओबीसी और दलितों की हिस्सेदारी में कोई कमी नहीं रखा है। हालांकि मोदी,02 में कैबिनेट मंत्री रहे कई मंत्रियों के चुनाव हार जाने की वजह से इस बार यूपी के हिस्से में सिर्फ दो ही कैबिनेट मंत्री बने हैं।

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बता दें कि पिछली सरकार में यूपी से मोदी समेत कुल 15 मंत्री थे, जिसमें 4 कैबिनेट मंत्री और शेष राज्यमंत्री थे। इस लिहाज से इस बार यूपी से सिर्फ राजनाथ सिंह और राज्यसभा सदस्य हरदीप पुरी ही कैबिनेट मंत्री बने हैं। पिछली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे महेन्द्र नाथ पांडेय और स्मृति ईरानी चुनाव हार गई हैं। इस वजह से भी इस बार कैबिनेट मंत्रियों की संख्या घटी हैं। फिर भी मोदी ने हारी हुई सीटों के अनुपात में हिस्सेदारी में उतनी कमी न करते हुए अगड़े-पिछड़ों के साथ दलितों के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।
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जातीय समीकरण का ध्यान
यूपी में कम सीटें आने के बाद भी मोदी ने सामाजिक समीकरण के ताने-बाने का ख्याल रखा है। मोदी ने इस बार दो ठाकुर, दो कुर्मी, एक-एक ब्राम्हण, लोध, जाट और सिख जाति को मौका दिया है। जबकि दलित समाज से इस बार भी दो लोगों को मंत्री बनाया गया है। इसमें एसपी सिंह बघेल को जहां दुबारा मौका दिया है, वहीं बांसगांव के सांसद कमलेश पासवान को पहली बार जगह मिली है। पिछली बार इस समाज से कौशल किशोर मंत्री थे. लेकिन इस बार वह चुनाव हार गए हैं।
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सबसे अधिक संख्या ओबीसी की
मोदी-03 में यूपी से सबसे अधिक भागीदारी ओबीसी को मिली है। प्रधानमंत्री समेत कुल 4 ओबीसी चेहरों को मंत्री बनाया गया है। इनमें मोदी के अलावा कुर्मी समाज से अनुप्रिया पटेल और पंकज चौधरी को मंत्री बनाया गया है। अनुप्रिया 2014 से लगातार मंत्रिमंडल में हैं, जबकि चौधरी को दूसरी बार लगातार मौका मिला है। जबकि लोध समाज से बीएल वर्मा और जाट चेहरे के तौर रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी मंत्री बनाए गए हैं। हालांकि इस बार ब्राम्हण चेहरे के तौर सिर्फ जितिन प्रसाद को ही मिला है।

क्षेत्रीय संतुलन पर भी फोकस
इस बार मोदी मंत्रिमंडल में भले ही यूपी से मंत्रियों की संख्या कम हुई है, लेकिन क्षेत्रीय संतुलन का खास ख्याल रखा गया है। अवध क्षेत्र में सिर्फ दो सीट जीतने के बावजूद राजनाथ से सिंह के साथ गोंडा से जीते कीर्तिवर्धन सिंह को मंत्री बनाकर अवध क्षेत्र को सम्मान दिया है, वहीं गोरखपुर क्षेत्र से पंकज चौधरी और कमलेश पासवान को मौका देकर क्षेत्रीय व ओबीसी और दलित फैक्टर को साधने की कोशिश की है। इसी तरह पूर्वांचल से खुद मोदी के अलावा अनुप्रिया को शामिल हैं।

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