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मनरेगा की सफाई के लिए जारी, कड़े दिशा निर्देश
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 20 May 2014 02:44 AM IST
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वर्ष 2014-15 में मनरेगा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। जिसमें सुधार लाने के लिए कड़े निर्देश दिए गए हैं।
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केस एक- सलोन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में 65 लाख रुपये से अधिक उपलब्ध होने के बाद भी मात्र 14 लाख रुपये ही खर्च किए जा सके।
खीरों ब्लॉक में भी 36 लाख में मात्र दो लाख रुपये ही खर्च किए गए हैं।
केस दो- रोहनियां ब्लॉक क्षेत्र में मनरेगा में दो महीने से एक भी श्रमिक को काम नहीं मिला।
इसके अलावा महराजगंज व डीह में मनरेगा की दशा बेहद खराब है। तमाम प्रयास के बाद भी प्रगति सुधरने का नाम नहीं ले रही।
केस तीन- जगतपुर, ऊंचाहार, डलमऊ और गौरा सहित कई ब्लॉकों के सैकड़ों मनरेगा श्रमिकों को काम के बाद भी मजदूरी नहीं मिली है।
इसलिए ग्राम पंचायतों में कार्य ठप हैं। सामग्री का भी भुगतान नहीं हो पा रहा है।
वहीं रायबरेली जिले में मनरेगा पूरी तरह से दम तोड़ चुकी है। अधिकारियों की ओर से ध्यान न देने के कारण प्रदेश में जिला सबसे पीछे पहुंच गया है।
शासन से कडे़ निर्देश मिलने के बाद अब मनरेगा में दम भरने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों को चेताया गया है कि जिस दिन वह एमआईएस की सूचना नहीं देंगे, उस दिन उनका वेतन काट दिया जाएगा।
इसके अलावा कर्मचारियों को भी चेताया गया है। बीडीओ व एपीओ को नोटिस जारी करके प्रगति सुधारने के आदेश दिए गए हैं।
वित्तीय वर्ष 2014-15 में मनरेगा की प्रगति सबसे खराब हो गई है। जिला स्तर से सही ढंग से पर्यवेक्षण कार्य न होने के कारण स्थिति बेहद चिंताजनक है।
रोहनियां ब्लॉक में तो अब तक एक भी श्रमिक को रोजगार नहीं दिया गया है। इसके अलावा अन्य ब्लॉकों की दशा भी खराब है। ऐसी स्थिति में श्रमिक पलायन करने लगे हैं।
जिले की प्रगति खराब होने पर ग्राम्य विकास आयुक्त ने नाराजगी जताई है। शासन के निर्देश पर अब मनरेगा में दम भरने का काम शुरू किया गया है।
सभी बीडीओ और अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारियों को कड़ा पत्र लिखकर प्रगति को सुधारने के आदेश दिए गए हैं।
जिस दिन काम नहीं उस दिन एपीओ को वेतन नहीं देने के निर्देश तक जारी किए गए हैं।
उपायुक्त मनरेगा एसके उपाध्याय का कहना है कि कड़ा पत्र जारी किया गया है। इसके बाद भी सुधार न आने पर कार्रवाई की जाएगी।