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मनरेगा फर्जीवाड़ा: पंचायत सचिव, प्रधान व महिला मेट दोषी, रिकवरी का आदेश

Wed, 27 Nov 2024 02:08 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Nov 2024 02:08 AM IST
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MNREGA fraud: Panchayat secretary, head and female mate guilty, order for recovery

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सूरज शुक्ला



लखनऊ। नियमों को दरकिनार कर मनरेगा के जॉब कार्ड बनाकर भुगतान किए जाने के मामले में माल के पंचायत सचिव, ग्राम प्रधान और महिला मेट को दोषी बनाया गया है। तीनों से भुगतान की गई रकम की रिकवरी की जाएगी।

दरअसल माल ब्लॉक की शिकायत मिली थी कि बहिर गांव निवासी सुनील कुमार और प्राची का मनरेगा का जॉब कार्ड नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया है। शिकायत का संज्ञान लेकर जांच के आदेश हुए। परियोजना निदेशक विकास मिश्रा ने जांच की।
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जांच में सामने आया कि दोनों जॉब कार्ड धारक मनरेगा के लिए पात्र नहीं हैं। इसके बावजूद उनके कार्ड बनाए गए। सुनील के जॉब कार्ड (748) पर 4266 और प्राची के जॉब कार्ड (747) पर 16,353 रुपये का भुगतान किया गया। जांच रिपोर्ट में पंचायत सचिव, प्रधान और महिला मेट को दोषी ठहराया गया, क्योंकि सत्यापन से लेकर जॉब कार्ड बनवाने और भुगतान कराने की प्रक्रिया में इनकी ही भूमिका रही। इसलिए अब इनसे ये पूरी रकम रिकवर की जाएगी।
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दिल्ली में नौकरी, मनरेगा से भुगतान

अफसरों ने बताया कि जांच में पाया गया कि सुनील कुमार दिल्ली में नौकरी करता है। इसके बाद भी मनरेगा के जॉब कार्ड पर उसको मजदूरी का भुगतान किया गया। इससे आरोप पुख्ता हो गए। वहीं, प्राची के मामले में सामने आया कि एक परिवार में एक से अधिक जॉब कार्ड बनाए गए, जो नियमानुसार गलत है।



आखिर अफसरों पर कार्रवाई क्यों नहीं

पूरे मामले से साफ है कि जिम्मेदारों की मिलीभगत के बिना फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। इसके बावजूद सिर्फ तीन लोगों को दोषी बनाया गया और उन्हीं से रिकवरी करने के आदेश दिए गए। सवाल है कि अन्य उच्चाधिकारियों की कोई जिम्मेदारी है या नहीं? अफसरों को कार्रवाई से क्यों बचाया गया?




इसी मामले में लोकपाल पर हुआ था हमला

मनरेगा लोकपाल आरआर जैसवार पिछले महीने इसी मामले की जांच करने मौके पर गए थे। उस दौरान उन पर हमला हुआ था। बंधक बनाया गया था। मामले में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। लोकपाल पर हमला इसीलिए किया गया था, जिससे मामले में कार्रवाई न हो सके। फिलहाल उस केस की जांच पुलिस कर रही है।
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