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मिड-डे मील: घोड़े-खच्चरों के बीच बच्चों को मिलता है खाना
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Wed, 24 Jul 2013 09:53 AM IST
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बिहार में हुए हादसे के बाद भी मिड-डे मील योजना के संचालन में लगे जिम्मेदारों की नींद नहीं खुल रही है।
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भोजन की गुणवत्ता पर कोई भी ध्यान नहीं दे रहा है। आलम ये है कि उतरेठिया क्षेत्र में मिड-डे मील बनाने को लेकर उसे बांटने तक में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
फिर भी कार्यदायी संस्था से लेकर जिम्मेदारों को कोई फिक्र नहीं है। उतरेठिया के 18 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिड-डे मील वितरण की जिम्मेदारी एक ही कार्यदायी संस्था के पास है।
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संस्था द्वारा भोजन रिक्शा-ट्रॉली और ड्रमों में लादकर स्कूलों में पहुंचाया जाता है। मंगलवार सुबह प्राथमिक विद्यालय राम भरोसे मैकूलाल में घोड़े-खच्चरों के बीच गंदे माहौल में बच्चों को मिड-डे मील बांटा गया।
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इस संस्था की लापरवाही का आलम ये है कि प्राथमिक विद्यालय घोसियाना में 45 मिनट तक मिड-डे मील से भरे पीपे सड़क के किनारे खुले पड़े रहे। संस्था के कर्मचारियों ने पीपों को ढंकने तक की जहमत नहीं उठाई।
यही हाल कुम्हार मंडी स्थित क्रमोत्तर प्राथमिक विद्यालय का भी रहा। प्राथमिक विद्यालय घोसियाना की प्रधानाध्यापिका सुशीला और प्राथमिक विद्यालय तेलीबाग जोन-1 की प्रधानाध्यापिका शीला गुप्ता ने बताया कि कार्यदायी संस्था मिड-डे मील की सब्जी को छीलकर साफ करने तक की जहमत नहीं उठाती है।
उधर, बीकेटी में जनप्रतिनिधियों ने मंगलवार को एक बार फिर बीएसए को पत्र लिखकर मिड-डे मील की गुणवत्ता सुधारने की मांग की है।