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दस्तकारी भरेगी नई उड़ान, मेट्रो को मिलेगी रफ्तार

Fri, 11 Jul 2014 12:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 11 Jul 2014 12:38 PM IST
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metro project acclerate, boom in handloom sector

केंद्रीय बजट में लखनऊ मेट्रो परियोजना को आर्थिक रजामंदी मिलने से जहां शहर की रफ्तार बढ़ेगी और सूबे की राजधानी आधुनिकता की ओर जाएगी।

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टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित होने से शहर की धरोहर के रूप में विकसित हो चुकी दस्तकारी को विकास की नई ऊंचाइयां मिलेंगी। इतना ही नहीं, इस काम से जुड़े लाखों हुनरमंद हाथ भी समृद्धि होंगे।
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चिकन, जरदोजी और आरी के कारोबार और इससे जुड़े कारीगरों और कारोबारियों को केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आम बजट में बड़ा तोहफा दिया है।

उन्होंने बृहस्पतिवार को आम बजट के दौरान लखनऊ में टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित करने की घोषणा की।

इस तरह के कई  टेक्सटाइल क्लस्टर गुजरात में पहले से ही विकसित किए जा चुके हैं। टेक्सटाइल क्लस्टर जोन विकसित होने से लखनऊ सहित बाराबंकी और टांडा तक के बुनकरों, दस्तकारों और कपड़ा क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
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शहर में कहीं करीब 300 एकड़ क्षेत्र में यह जोन विकसित किया जाएगा। इसमें लीडा और यूपीएसआईडीसी जैसी एजेंसियों की भी केंद्र सरकार मदद मिलेगी।

इस जोन से दस्तकारों को तो लाभ मिलेगा ही, नए रोजगार का भी सृजन होगा। राजधानी से हर साल चिकन के कपड़ों का देश के भीतर ही करीब 1000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।

इसके अलावा विदेशों में भी निर्यात किया जाता है। आरी और जरदोजी की कढ़ाई वाले वस्त्रों को निर्यात भी लगभग 500 करोड़ रुपये सालाना है।

ऐसे में टेक्सटाइल्स क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को अगर अपनी यूनिट लखनऊ में लगाने का मौका मिलने से यहां के कारीगरों को काफी लाभ होगा।

इसके लिए जल्द ही केंद्र सरकार की टीम लखनऊ आकर इस जोन के लिए मुफीद जगह की तलाश करेगी।

1300 करोड़ मेट्रो के लिए
आम बजट में लखनऊ मेट्रो रेल परियोजना को केंद्र सरकार से वित्तीय मंजूरी दे दी गई है। केंद्र ने लखनऊ और अहमदाबाद मेट्रो परियोजना को एक ही श्रेणी में रखते हुए 100 करोड़ रुपये का हेड क्रिएट किया है।

लखनऊ मेट्रो की कितनी राशि है, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। वैसे अहमदाबाद और लखनऊ के पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए कुल 2420 करोड़ रुपये अंशदान की घोषणा की र्गई है।

इसमें से लखनऊ के खाते में करीब 1300 करोड़ रुपये आएंगे। केंद्र सरकार से 6800 करोड़ रुपये की लखनऊ मेट्रो प्रोजक्ट के लिए अगले चार साल में करीब 1300 करोड़ रुपये मिलने हैं।


इसके अलावा ऋण में भी केंद्र सरकार की मदद की जरूरत होगी। आम बजट-2014-15 में लखनऊ मेट्रो के लिए हेड बनाया जाना एक बड़ी खुशखबरी मानी जा रही है।

इसका सीधा मतलब है कि केंद्र सरकार ने इस परियोजना को आर्थिक तौर पर भी सहमति दे दी है। सैद्धांतिक सहमति पिछले साल ही दी जा चुकी थी। अमौसी से मुंशी पुलिया के बीच 23 किमी के नार्थ साउथ कॉरिडोर के लिए कुल 6800 करोड़ का बजट चार साल के लिए चाहिए।

इसमें से प्राइमरी सेक्शन (ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग) का पूरा खर्च राज्य सरकार अपने हिस्से से कर रही है। 6800 करोड़ में से करीब 3500 करोड़ बतौर ऋण और बकाया रकम में 50-50 फीसदी केंद्र और राज्य को देना होगा।

शहर की जनता के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी है। इस परियोजना में केंद्र का यह धन टोकन मनी भर है, मगर इससे हमारे सारे रास्ते खुल गए हैं।

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