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छह मेडिकल कॉलेजों और एक संस्थान में सवर्ण आरक्षण फंसा, एमसीआई ने दी सीटें बढ़ाने की नहीं दी अनुमति
Tue, 16 Jul 2019 09:53 AM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 16 Jul 2019 09:53 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
पांच नए स्वशासी मेडिकल कॉलेजों, बदायूं मेडिकल कॉलेज और राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ग्रेटर नोएडा में 2019-20 में गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण नहीं मिलेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने इन सभी में एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने से मनाकर दिया है। अब शासन ने सीटें बढ़ाने के लिए सचिव स्तर के अधिकारी को सीटें बढ़ाने के संबंध में सरकार का पक्ष रखने केलिए स्वास्थ्य मंत्रालय भेजा है।
राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ग्रेटर नोएडा, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं, स्वशासी मेडिकल कॉलेज बस्ती, बहराइच, अयोध्या, शहजहांपुर, फिरोजाबाद में पहली बार 100-100 सीटों के हिसाब से 2019-20 सत्र में कुल 700 सीटें बढ़ी हैं।
इन सभी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम श्ुरू करने के लिए पहली बार एमसीआई ने अनुमति दी है। जितनी सीटों पर प्रवेश के लिए अनुमति मिली है, उनमें 10 फीसदी गरीब सवर्णों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जब आवेदन किया गया था, उस समय मेडिकल कॉलेजों में सुविधाएं 100 सीटों को मानक बनाकर विकसित की गई थी।
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इस समय नीट यूजी की पहली काउंसलिंग हो चुकी है। सभी मेडिकल कॉलेजों की लगभग सभी सीटें भर चुकी हैं। शासन के अधिकारियों को उम्मीद थी कि सेकेंड काउंसलिंग शुरू होने तक सवर्ण आरक्षण के तहत अतिरिक्त सीटें मिल जाएंगी लेकिन एमसीआई ने सीटें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
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राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान ग्रेटर नोएडा, राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं, स्वशासी मेडिकल कॉलेज बस्ती, बहराइच, अयोध्या, शहजहांपुर, फिरोजाबाद में पहली बार 100-100 सीटों के हिसाब से 2019-20 सत्र में कुल 700 सीटें बढ़ी हैं।
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इन सभी को एमबीबीएस पाठ्यक्रम श्ुरू करने के लिए पहली बार एमसीआई ने अनुमति दी है। जितनी सीटों पर प्रवेश के लिए अनुमति मिली है, उनमें 10 फीसदी गरीब सवर्णों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है। पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए जब आवेदन किया गया था, उस समय मेडिकल कॉलेजों में सुविधाएं 100 सीटों को मानक बनाकर विकसित की गई थी।
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इस समय नीट यूजी की पहली काउंसलिंग हो चुकी है। सभी मेडिकल कॉलेजों की लगभग सभी सीटें भर चुकी हैं। शासन के अधिकारियों को उम्मीद थी कि सेकेंड काउंसलिंग शुरू होने तक सवर्ण आरक्षण के तहत अतिरिक्त सीटें मिल जाएंगी लेकिन एमसीआई ने सीटें बढ़ाने की अनुमति नहीं दी।
बताया जा रहा है कि चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने उच्चाधिकारियों के साथ इस मामले में मुख्यमंत्री से वार्ता की थी। उनके निर्देश के बाद सचिव चिकित्सा शिक्षा मुकेश मेश्राम को स्वास्थ्य मंत्रालय दिल्ली भेजा गया है। जिससे सीटों को बढ़ाने में प्रदेश सरकार का पक्ष रखा जा सके। यदि सीटें नहीं बढ़ी तो जिन सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिली है, उन्हीं में गरीब सवर्णों को प्रवेश दिया जा सकता है।
बढ़ चुकी है 310 सीटें
गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के तहत प्रदेश में 310 एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज झांसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को एमसीआई ने बढ़ी हुई सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है।
देश भर में जिन मेडिकल कॉलेजों को एमसीआई ने पहली बार प्रवेश की अनुमति दी है, वहां गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के तहत सीटें नहीं दी गई हैं। इनमें से अधिकतर मेडिकल कॉलेज जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करके बनाए गए हैं। पता चला है कि एक-दो राज्यों में अतिरिक्त सीटों प्रवेश की अनुमति दी गई है। सीटें बढ़ाने के मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव स्तर के अधिकारी स्वास्थ्य मंत्रालय गए हैं।
प्रो.केके गुप्ता
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा
बढ़ चुकी है 310 सीटें
गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के तहत प्रदेश में 310 एमबीबीएस की सीटें बढ़ाई हैं। राजकीय मेडिकल कॉलेज झांसी, गोरखपुर, इलाहाबाद, कानपुर, उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान संस्थान सैफई और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज को एमसीआई ने बढ़ी हुई सीटों पर प्रवेश की अनुमति दी है।
देश भर में जिन मेडिकल कॉलेजों को एमसीआई ने पहली बार प्रवेश की अनुमति दी है, वहां गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण के तहत सीटें नहीं दी गई हैं। इनमें से अधिकतर मेडिकल कॉलेज जिला चिकित्सालयों को उच्चीकृत करके बनाए गए हैं। पता चला है कि एक-दो राज्यों में अतिरिक्त सीटों प्रवेश की अनुमति दी गई है। सीटें बढ़ाने के मामले में मुख्यमंत्री के निर्देश पर सचिव स्तर के अधिकारी स्वास्थ्य मंत्रालय गए हैं।
प्रो.केके गुप्ता
महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा