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यूपी बोर्ड का हाल ःयहां गणित के शिक्षक चेक करेंगे चित्रकला की कॉपियां
Wed, 06 Mar 2019 01:44 AM IST
manoj tiwari
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला लखनऊ
Published by: manoj tiwari
Updated Wed, 06 Mar 2019 01:44 AM IST
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लखनऊ। यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन कार्य शुरू होने वाला है। पहली बार इतनी जल्दी कॉपियों की चेकिंग का कार्य शुरू होगा। मूल्यांकन केद्रों पर बोर्ड की कॉपियां पहुंचने लगी हैं। वहीं बोर्ड ने कॉपियों जांचने के लिए शिक्षकों के नियुक्ति पत्र भी भेज दिए हैं। मंगलवार से नियुक्ति पत्रों का वितरण भी शुरू हो गया। मगर इनमें तमाम गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। कहीं गणित के शिक्षक को चित्रकला की कॉपियां जांचने की जिम्मेदारी दे दी गई है तो सामाजिक विज्ञान के शिक्षक को अंग्रेजी विषय की।
बोर्ड ने शिक्षकों के जो नियुक्ति पत्र भेजे हैं उनमें कई शिक्षकों के विषयों के बारे में गलत जानकारी दे दी गई है। अंग्रेजी के शिक्षक को लेकर ज्यादा गलतियां की गई हैं।
डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिन शिक्षकों को गलत विषय का नियुक्ति पत्र दिया गया है वे अपने प्रधानाचार्या से संशोधन कराकर मूल्यांकन केंद्र पर उपलब्ध फॉर्म भरकर अपने मूल विषय की कॉपियां जांच सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके मूल विषय की कॉपियां जिस केंद्र पर गई हैं, उन्हें उसी केंद्र पर जाकर कॉपियां जांचनी होंगी। चार मूल्यांकन केद्रों पर चेकिंग के लिए कॉपियां पहुंचने लगी हैं। राजकीय इंटर कॉलेज हुसैनाबाद में इंटर की कॉपियां, अमीनाबाद इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की कॉपियां, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में हाईस्कूल व इंटर की कॉपियां और राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में इंटर की कॉपियां जांची जाएंगी। करीब 16 लाख कॉपियों को जांचने के लिए चार हजार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मूल्यांकन के पहले दिन 10 मार्च को डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) कॉपियां जांचकर परीक्षकों को बताएंगे। 11 मार्च से विधिवत कॉपियों की चेकिंग शुरू हो जाएगी। करीब 400 डीएचई की तैनाती की गई है। मूल्यांकन कार्य सुबह 10 से शाम पांच बजे तक होगा। सभी डीएचई को निर्देश दिए गए हैं कि एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल के कम से कम 50 और इंटर की 40 कॉपियों को जांचेगा।
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मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित
बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन कार्य के दौरान परीक्षक व डीएचई मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। ऐसेा करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कॉपियां जांची जाएंगी। मूल्यांकन केंद्रों पर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। अवार्ड ब्लैंक पर किसी भी प्रकार के फ्लयूड के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई गई है। अवार्ड ब्लैंक पर यदि ऐसा मिला तो परीक्षक को डिबार कर दिया जाएगा। अवार्ड ब्लैंक शीट पर मूल्यांकन के अंक चढ़ाए जाते हैं।
प्रधानाचार्य भी करेंगे ड्यूटी
कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की ड्यूटी केंद्रों पर डीएचई के रूप में लगाई है। प्रधानाचार्यों ने इसपर आपत्ति जताई है। डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड ने जिन प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाई है उन्हें मूल्यांकन कार्य करना अनिवार्य है। वहीं कई निजी विद्यालयों ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि बोर्ड ने जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है, उनमें से कई विद्यालय छोड़ चुके हैं। उधर, डीआईओएस ने सीसीएल वाली शिक्षिकाओं का भी अवकाश रद्द करते हुए उन्हें अनिवार्य रूप से ड्यूटी जॉइन करने का निर्देश जारी किया है।
मूल्यांकन के बहिष्कार से होगी परेशानी
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के दो संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार किया है। इसको लेकर विभाग की चिंता बढ़ गई है। मूल्यांकन में परीक्षकों की कमी हो सकती है। डीआईओएस ने बताया कि जिन सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक मूल्यांकन कार्य करने नहीं आएंगे, उनका उस दिन का वेतन काट दिया जाएगा। वहीं उन्होंने सभी वित्तविहीन विद्यालयों को निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों को परीक्षक और डीएचई के रूप में नियुक्त किया गया है उन्हें कार्यमुक्त कर दें ताकि वे 10 मार्च को मूल्यांकन ड्यूटी जॉइन कर सकें। यदि उनके शिक्षक मूल्यांकन कार्य से अनुपस्थित रहे तो विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
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बोर्ड ने शिक्षकों के जो नियुक्ति पत्र भेजे हैं उनमें कई शिक्षकों के विषयों के बारे में गलत जानकारी दे दी गई है। अंग्रेजी के शिक्षक को लेकर ज्यादा गलतियां की गई हैं।
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डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि जिन शिक्षकों को गलत विषय का नियुक्ति पत्र दिया गया है वे अपने प्रधानाचार्या से संशोधन कराकर मूल्यांकन केंद्र पर उपलब्ध फॉर्म भरकर अपने मूल विषय की कॉपियां जांच सकते हैं। ऐसी स्थिति में उनके मूल विषय की कॉपियां जिस केंद्र पर गई हैं, उन्हें उसी केंद्र पर जाकर कॉपियां जांचनी होंगी। चार मूल्यांकन केद्रों पर चेकिंग के लिए कॉपियां पहुंचने लगी हैं। राजकीय इंटर कॉलेज हुसैनाबाद में इंटर की कॉपियां, अमीनाबाद इंटर कॉलेज में हाईस्कूल की कॉपियां, राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में हाईस्कूल व इंटर की कॉपियां और राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में इंटर की कॉपियां जांची जाएंगी। करीब 16 लाख कॉपियों को जांचने के लिए चार हजार शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। मूल्यांकन के पहले दिन 10 मार्च को डिप्टी हेड एग्जामिनर (डीएचई) कॉपियां जांचकर परीक्षकों को बताएंगे। 11 मार्च से विधिवत कॉपियों की चेकिंग शुरू हो जाएगी। करीब 400 डीएचई की तैनाती की गई है। मूल्यांकन कार्य सुबह 10 से शाम पांच बजे तक होगा। सभी डीएचई को निर्देश दिए गए हैं कि एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल के कम से कम 50 और इंटर की 40 कॉपियों को जांचेगा।
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मोबाइल फोन का इस्तेमाल वर्जित
बोर्ड की कॉपियों के मूल्यांकन कार्य के दौरान परीक्षक व डीएचई मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। ऐसेा करने पर विधिक कार्रवाई की जाएगी। सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में कॉपियां जांची जाएंगी। मूल्यांकन केंद्रों पर बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है। अवार्ड ब्लैंक पर किसी भी प्रकार के फ्लयूड के इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाई गई है। अवार्ड ब्लैंक पर यदि ऐसा मिला तो परीक्षक को डिबार कर दिया जाएगा। अवार्ड ब्लैंक शीट पर मूल्यांकन के अंक चढ़ाए जाते हैं।
प्रधानाचार्य भी करेंगे ड्यूटी
कई विद्यालयों के प्रधानाचार्यों की ड्यूटी केंद्रों पर डीएचई के रूप में लगाई है। प्रधानाचार्यों ने इसपर आपत्ति जताई है। डीआईओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि बोर्ड ने जिन प्रधानाचार्यों की ड्यूटी लगाई है उन्हें मूल्यांकन कार्य करना अनिवार्य है। वहीं कई निजी विद्यालयों ने यह शिकायत दर्ज कराई है कि बोर्ड ने जिन शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है, उनमें से कई विद्यालय छोड़ चुके हैं। उधर, डीआईओएस ने सीसीएल वाली शिक्षिकाओं का भी अवकाश रद्द करते हुए उन्हें अनिवार्य रूप से ड्यूटी जॉइन करने का निर्देश जारी किया है।
मूल्यांकन के बहिष्कार से होगी परेशानी
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के दो संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर मूल्यांकन कार्य का बहिष्कार किया है। इसको लेकर विभाग की चिंता बढ़ गई है। मूल्यांकन में परीक्षकों की कमी हो सकती है। डीआईओएस ने बताया कि जिन सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षक मूल्यांकन कार्य करने नहीं आएंगे, उनका उस दिन का वेतन काट दिया जाएगा। वहीं उन्होंने सभी वित्तविहीन विद्यालयों को निर्देश दिया है कि जिन शिक्षकों को परीक्षक और डीएचई के रूप में नियुक्त किया गया है उन्हें कार्यमुक्त कर दें ताकि वे 10 मार्च को मूल्यांकन ड्यूटी जॉइन कर सकें। यदि उनके शिक्षक मूल्यांकन कार्य से अनुपस्थित रहे तो विद्यालय के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।