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Lucknow News: रक्त संबंधों में विवाह से बच्चों में बढ़ रहीं दिमागी बीमारियां
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डाॅ. उदयभान पांडेय।
लखनऊ। बच्चों में विकसित होने वाली कई दिमागी बीमारियों की एक बड़ी वजह अपने ही रक्त संबंधों में विवाह है। ऑटिज्म, डिस्लेक्सिया, मिर्गी, सेरिब्रल पैल्सी, एडीएचडी जैसी बीमारियों की वजह से बच्चों का जीवन दूभर हो जाता है। उनके परिजनों को भी आजीवन तनाव और मुश्किलों से गुजरना पड़ता है।
ये बातें अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय से आए भारतवंशी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उदयभान पांडेय ने आईआईटीआर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक काॅन्फ्रेंस में बृहस्पतिवार को कहीं। उन्होंने कहा कि शोध में सामने आया है कि कुछ समुदायों में अपने ही रक्त संबंधों में विवाह (कांसैंगुनस मैरेज) के नतीजे में ऑटोसोमल रिसेसिव-जीन की वजह से पिछली पीढ़ियों की छिपी बीमारियां उभरकर सामने आ जाती हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान व उपचार की दिशा में शोध और फंडिंग को बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही जीनोम सीक्वेंसिंग की दिशा में और बेहतर काम करने की जरूरत है। भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) परिसर में बृहस्पतिवार को चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक कांफ्रेंस-अर्थ 2024 के दूसरे दिन अन्य कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने क्लाईमेट चेंज व पर्यावरण प्रदूषण से पैदा हो रहे खतरों और उनके समाधान पर मंथन किया। देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी. कानूनगो, अमेरिका केंटुकी से आए वैज्ञानिक डॉ. संजय श्रीवास्तव आदि ने भी यहां अपनी बात रखी।
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ये बातें अमेरिका के पीट्सबर्ग विश्वविद्यालय से आए भारतवंशी वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उदयभान पांडेय ने आईआईटीआर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक काॅन्फ्रेंस में बृहस्पतिवार को कहीं। उन्होंने कहा कि शोध में सामने आया है कि कुछ समुदायों में अपने ही रक्त संबंधों में विवाह (कांसैंगुनस मैरेज) के नतीजे में ऑटोसोमल रिसेसिव-जीन की वजह से पिछली पीढ़ियों की छिपी बीमारियां उभरकर सामने आ जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि भारत में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों की पहचान व उपचार की दिशा में शोध और फंडिंग को बढ़ाने की जरूरत है। साथ ही जीनोम सीक्वेंसिंग की दिशा में और बेहतर काम करने की जरूरत है। भारतीय विष विज्ञान अनुसंधान संस्थान (आईआईटीआर) परिसर में बृहस्पतिवार को चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक कांफ्रेंस-अर्थ 2024 के दूसरे दिन अन्य कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने क्लाईमेट चेंज व पर्यावरण प्रदूषण से पैदा हो रहे खतरों और उनके समाधान पर मंथन किया। देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. डी. कानूनगो, अमेरिका केंटुकी से आए वैज्ञानिक डॉ. संजय श्रीवास्तव आदि ने भी यहां अपनी बात रखी।
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