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Lucknow News: मनपसंद वर चुनें, शादी हम करवाएंगे
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सबहेड- महिला समूहों की पहल, निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह का लिया संकल्प
माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जो पैसे मांगते हैं, उन्हें बेटी कभी न दीजिए..., कन्यादान महादान है। इस संकल्प के साथ एक अनूठी पहल शुरू की है माया यादव और उनकी टीम ने। इसमें वे एक तरफ जहां माता-पिता को दहेज न देने और लेने का संकल्प करवा रही हैं तो दूसरी तरफ निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में योगदान के लिए लोगों को प्रेरित भी कर रही हैं। महज छह माह के भीतर उन्होंने 13 निर्धन परिवारों की बेटियों की शादी कराई है। उन्होंने ऐसे जरूरतमंदों से अपील की है कि वे यदि बेटी का विवाह करवा पाने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो परेशान न हों, मनपसंद वर चुनें, शादी हम सब करवाएंगे।
1100 रुपये के योगदान से शुरुआत
माया यादव ने बताया कि शहर में एक सोसाइटी ने सामूहिक विवाह में हमसे योगदान करने को कहा था। हम लोगों ने 1100 रुपये का संकल्प लिया, देखते-देखते सवा लाख रुपये इकट्ठा हो गए। इस बीच एक मित्र के घर में काम करने वाली बाई ने बेटी की शादी कर पाने में आर्थिक असमर्थता जताई। यह भी बताया कि जिसके घर वो शादी कर रही है, वो लोग नकद और बाइक मांग रहे हैं। हम लोगों ने उसको समझाया और कहा कि जाकर बताएं कि वे दहेज नहीं देंगी। उसने वैसा ही किया, हालांकि लड़के वाले मान गए। इसके बाद हम लोगों ने उनसे बात कर कुछ दिन इंतजार करने को कहा। इस बीच अपने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ऐसे लोगों का पता किया कि किस घर में बेटी की शादी होनी है। इस तरह एक से शुरुआत की और 13 रजिस्ट्रेशन हुए।
वैवाहिक वर्षगांठ पर खर्च का 70 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को
माया यादव ने बताया कि इस कार्य में मोनिका जैन, गौरी, अनुराधा, मीनू समेत अन्य सहयोगी लगे हैं। खास बात है कि हम किसी से पैसा नहीं लेते, बल्कि समूह के सदस्य अपनी वैवाहिक वर्षगांठ के आयोजन पर होने वाले खर्च का 70 फीसदी हिस्सा, बेटियों के विवाह पर खर्च करते हैं। रजिस्ट्रेशन आने के बाद हम जरूरत के सामानों की एक लिस्ट बनाकर सदस्यों में बांट देते है, उसी के अनुसार सभी अपना योगदान करते हैं।
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माई सिटी रिपोर्टर
लखनऊ। जो पैसे मांगते हैं, उन्हें बेटी कभी न दीजिए..., कन्यादान महादान है। इस संकल्प के साथ एक अनूठी पहल शुरू की है माया यादव और उनकी टीम ने। इसमें वे एक तरफ जहां माता-पिता को दहेज न देने और लेने का संकल्प करवा रही हैं तो दूसरी तरफ निर्धन परिवारों की बेटियों के विवाह में योगदान के लिए लोगों को प्रेरित भी कर रही हैं। महज छह माह के भीतर उन्होंने 13 निर्धन परिवारों की बेटियों की शादी कराई है। उन्होंने ऐसे जरूरतमंदों से अपील की है कि वे यदि बेटी का विवाह करवा पाने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं तो परेशान न हों, मनपसंद वर चुनें, शादी हम सब करवाएंगे।
1100 रुपये के योगदान से शुरुआत
माया यादव ने बताया कि शहर में एक सोसाइटी ने सामूहिक विवाह में हमसे योगदान करने को कहा था। हम लोगों ने 1100 रुपये का संकल्प लिया, देखते-देखते सवा लाख रुपये इकट्ठा हो गए। इस बीच एक मित्र के घर में काम करने वाली बाई ने बेटी की शादी कर पाने में आर्थिक असमर्थता जताई। यह भी बताया कि जिसके घर वो शादी कर रही है, वो लोग नकद और बाइक मांग रहे हैं। हम लोगों ने उसको समझाया और कहा कि जाकर बताएं कि वे दहेज नहीं देंगी। उसने वैसा ही किया, हालांकि लड़के वाले मान गए। इसके बाद हम लोगों ने उनसे बात कर कुछ दिन इंतजार करने को कहा। इस बीच अपने व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए ऐसे लोगों का पता किया कि किस घर में बेटी की शादी होनी है। इस तरह एक से शुरुआत की और 13 रजिस्ट्रेशन हुए।
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वैवाहिक वर्षगांठ पर खर्च का 70 फीसदी हिस्सा जरूरतमंदों को
माया यादव ने बताया कि इस कार्य में मोनिका जैन, गौरी, अनुराधा, मीनू समेत अन्य सहयोगी लगे हैं। खास बात है कि हम किसी से पैसा नहीं लेते, बल्कि समूह के सदस्य अपनी वैवाहिक वर्षगांठ के आयोजन पर होने वाले खर्च का 70 फीसदी हिस्सा, बेटियों के विवाह पर खर्च करते हैं। रजिस्ट्रेशन आने के बाद हम जरूरत के सामानों की एक लिस्ट बनाकर सदस्यों में बांट देते है, उसी के अनुसार सभी अपना योगदान करते हैं।
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