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सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये दबाए हैं नामी स्कूल, रजिस्ट्री कराना व किस्त जमा करना भूले
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 20 Aug 2018 02:47 PM IST
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लखनऊ के 120 से अधिक स्कूल-कॉलेज ऐसे हैं, जो कई सालों से सरकारी खजाने के करोड़ों रुपये दबाए हुए हैं। एलडीए को तो आर्थिक नुकसान हो रहा है। वहीं निबंधन विभाग को भी रजिस्ट्री कराने के लिए स्टांप शुल्क नहीं मिल पा रहा है।
एलडीए के शुरुआती आकलन के मुताबिक, करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया ऐसे स्कूलों पर निकल रहा है। ऐसे स्कूलों की फाइलें अब एलडीए में खंगाली जा रही हैं।
एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि अभी पिछले दिनों में शैक्षिक संस्थानों को हुए आवंटनों की कुल फाइलों की जांच कराई गई है।
आशियाना कॉलोनी और जानकीपुरम में हुए इन आवंटनों की जांच में पता चला है कि छह करोड़ रुपये तक बकाया स्क ूल संचालकों पर निकल रहा है। दो भूखंड तो जांच में ऐसे मिले हैं जहां अब केवल बिल्डिंग ही खड़ी है। मूल आवंटी किसी दूसरे को भूखंड भी बेच चुका है। ऐसे में वहां स्कूल की जगह दूसरे व्यावसायिक उपयोग तक हो रहे हैं।
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सब्सिडी ली, पर रकम नहीं चुकाई
कानपुर रोड पर बसी आशियाना कॉलोनी में प्राइमरी स्कूल का भूखंड 60 प्रतिशत की सब्सिडी लेकर एलडीए से आवंटित कराया गया। इस भूखंड की करीब 28 साल के बाद भी न रजिस्ट्री कराई गई है, न एलडीए का बकाया पैसा जमा किया गया।
इस स्कूल में दो साल पहले तक एक डिग्री कॉलेज चलता रहा। अब भूखंड पर बनी इमारत में डांस क्लासेज और शादियां कराई जा रही हैं। एलडीए को स्कूल संचालक को करीब छह करोड़ रुपये और निबंधन विभाग को 40 लाख रुपये स्टांप के रूप में जमा करने हैं।
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एलडीए के शुरुआती आकलन के मुताबिक, करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक बकाया ऐसे स्कूलों पर निकल रहा है। ऐसे स्कूलों की फाइलें अब एलडीए में खंगाली जा रही हैं।
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एलडीए के एक अधिकारी ने बताया कि अभी पिछले दिनों में शैक्षिक संस्थानों को हुए आवंटनों की कुल फाइलों की जांच कराई गई है।
आशियाना कॉलोनी और जानकीपुरम में हुए इन आवंटनों की जांच में पता चला है कि छह करोड़ रुपये तक बकाया स्क ूल संचालकों पर निकल रहा है। दो भूखंड तो जांच में ऐसे मिले हैं जहां अब केवल बिल्डिंग ही खड़ी है। मूल आवंटी किसी दूसरे को भूखंड भी बेच चुका है। ऐसे में वहां स्कूल की जगह दूसरे व्यावसायिक उपयोग तक हो रहे हैं।
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सब्सिडी ली, पर रकम नहीं चुकाई
कानपुर रोड पर बसी आशियाना कॉलोनी में प्राइमरी स्कूल का भूखंड 60 प्रतिशत की सब्सिडी लेकर एलडीए से आवंटित कराया गया। इस भूखंड की करीब 28 साल के बाद भी न रजिस्ट्री कराई गई है, न एलडीए का बकाया पैसा जमा किया गया।
इस स्कूल में दो साल पहले तक एक डिग्री कॉलेज चलता रहा। अब भूखंड पर बनी इमारत में डांस क्लासेज और शादियां कराई जा रही हैं। एलडीए को स्कूल संचालक को करीब छह करोड़ रुपये और निबंधन विभाग को 40 लाख रुपये स्टांप के रूप में जमा करने हैं।
डिफॉल्टर भी नहीं बचेंगे, वसूला जाएगा किराया
डेमो
इसी तरह गोमतीनगर में एक नामी स्कूल ने एलडीए से 18 साल पहले जमीन आवंटित कराई। सुविधा की वजह से आवासीय से भी कम दरों में आवंटित भूखंड पर स्कूल तो अब भी चल रहा है।
लेकिन, करीब 3.5 करोड़ रुपये एलडीए को जमा नहीं किए गए। यह पैसा ब्याज सहित है। वहीं इसकी रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी है, जिससे निबंधन विभाग को भी रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
वीसी केे निर्देश पर हुई जांच में एलडीए के कॉस्ट विभाग ने ऐसे भूखंडों के आवंटियों से उस अवधि का किराया भी वसूलने की संस्तुति की है। जोकि, बाकी किस्त जमा नहीं करके बाद डिफॉल्टर बने हुए हैं। कुछ का आवंटन निरस्त किया जाना था, लेकिन उस समय के अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा नहीं हो सका।
लेकिन, करीब 3.5 करोड़ रुपये एलडीए को जमा नहीं किए गए। यह पैसा ब्याज सहित है। वहीं इसकी रजिस्ट्री भी नहीं हो सकी है, जिससे निबंधन विभाग को भी रेवेन्यू का नुकसान हो रहा है।
वीसी केे निर्देश पर हुई जांच में एलडीए के कॉस्ट विभाग ने ऐसे भूखंडों के आवंटियों से उस अवधि का किराया भी वसूलने की संस्तुति की है। जोकि, बाकी किस्त जमा नहीं करके बाद डिफॉल्टर बने हुए हैं। कुछ का आवंटन निरस्त किया जाना था, लेकिन उस समय के अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा नहीं हो सका।
ब्याज ही बहुत ज्यादा है
डेमो
क्या नियम है?
एलडीए से शैक्षिक संस्थाओं को 60 प्रतिशत सब्सिडी देकर भूखंड का आवंटन करने का नियम है। ऐसे में स्कूल संचालकों को केवल 40 प्रतिशत कीमत ही देकर रजिस्ट्री करानी होती है। स्कूलों की मांग पर कुछ भाग कीमत का जमा कराकर कब्जा दे दिया जाता है। इस पर स्कूल संचालक अपना निर्माण और संचालन शुरू कर देते हैं।
ऐसे स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिन्होंने भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं कराई है। अधिकतर स्कूलों पर एलडीए का भी बकाया है। ब्याज ही बहुत ज्यादा हो गया है। एलडीए को अगर यह पैसा मिल जाए तो करोड़ों रुपये की आय एलडीए को होने की संभावना है। - मुकेश अग्रवाल, डिप्टी कॉस्ट अकाउंटेंट, एलडीए
एलडीए से शैक्षिक संस्थाओं को 60 प्रतिशत सब्सिडी देकर भूखंड का आवंटन करने का नियम है। ऐसे में स्कूल संचालकों को केवल 40 प्रतिशत कीमत ही देकर रजिस्ट्री करानी होती है। स्कूलों की मांग पर कुछ भाग कीमत का जमा कराकर कब्जा दे दिया जाता है। इस पर स्कूल संचालक अपना निर्माण और संचालन शुरू कर देते हैं।
ऐसे स्कूलों की संख्या बहुत ज्यादा है, जिन्होंने भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं कराई है। अधिकतर स्कूलों पर एलडीए का भी बकाया है। ब्याज ही बहुत ज्यादा हो गया है। एलडीए को अगर यह पैसा मिल जाए तो करोड़ों रुपये की आय एलडीए को होने की संभावना है। - मुकेश अग्रवाल, डिप्टी कॉस्ट अकाउंटेंट, एलडीए