फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Many projects are pending in spgi hospital.

जानिए, कैसे लग गया इस जाने-माने हॉस्पिटल पर दाग

Mon, 08 Dec 2014 10:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 08 Dec 2014 10:25 AM IST
विज्ञापन
Many projects are pending in spgi hospital.

संजय गांधी पीजीआई के 25 साल के स्वर्णिम सफर को कई अधूरे प्रोजेक्ट दाग लगा रहे हैं। ट्रॉमा सेंटर चार साल से बना खड़ा है, लेकिन वहां इलाज नहीं मिल रहा है। हाईटेक लाइब्रेरी का भवन आठ साल पिछड़ चुका है।

विज्ञापन


ओपीडी का भवन खड़ा है, लेकिन ठेकेदार और कार्यदायी संस्था की लड़ाई से फिनिशिंग का काम छह महीने से बंद है। हालत ये है कि तीन बड़े प्रोजेक्ट लेट होने से यहां पढ़ाई से लेकर इलाज की व्यवस्था में दिक्कतें आ रही हैं।
विज्ञापन


एसजीपीजीआई में प्रदेश की हाईटेक सात मंजिला लाइब्रेरी के लिए वर्ष 2006 में भूमि पूजन हुआ था। तय हुआ था कि 2011 दिसंबर में इसे पीजीआई प्रशासन को हैंडओवर कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक इसका सिर्फ ढांचा ही बनकर तैयार हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन


लाइब्रेरी के प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों की मानें तो 150 करोड़ रुपये की लागत से ‘टर्न की’ के आधार पर इस लाइब्रेरी का निर्माण हो रहा था, लेकिन अस्पताल के अधिकारियों की लापरवाही से यह 2014 के अंत में भी अधूरा पड़ा है।

प्रदेश की पहली हाईटेक लाइब्रेरी

Many projects are pending in spgi hospital.

हाईटेक लाइब्रेरी में ग्राउंड फ्लोर पर बिजनेस सेंटर, कैफे, इंटरटेनमेंट की व्यवस्था की योजना है। तो पहले से पांचवें फ्लोर तक लाइब्रेरी बननी है। टॉप फ्लोर को पूरी तरह से आईटी सेक्शन के रूप में विकसित जाना है।

जहां ऑनलाइन मेडिकल जर्नल देखने के लिए कम्प्यूटर और 24 घंटे वाई-फाई की सुविधा प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि प्रदेश में यह लाइब्रेरी अपनी तरह की इकलौती होगी।

इस लाइब्रेरी से किताबों और मेडिकल जरनल को बाहर ले जाना मुमकिन नहीं होगा। पूरी लाइब्रेरी सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहेगी। जर्नल और किताबों में रेडियो फ्रीक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन डिवाइस (आरफएफआईडी) लगी होंगी।

इससे उन्हें लाइब्रेरी से बाहर नहीं ले जाया जा सकेगा। इसके अलावा लाइब्रेरी में जाने केलिए ‘फिंगर प्रिंट आइडेंटीफिकेशन’ की व्यवस्था की जाएगी। इससे कोई बाहरी व्यक्ति वहां प्रवेश नही कर सकेगा।

सात मंजिला नई ओपीडी का निर्माण बीते तीन सालों से जारी है। अस्पताल प्रशासन ने पेशेंट फ्रेंडली ओपीडी बनाए जाने का दावा किया था, लेकिन छह माह से ओपीडी का निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप है।

200 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस ओपीडी में मरीजों के बैठने, लेटने और लाइन लगने की दिक्कत से छुटकारा दिलाने के साथ फूड कोर्ट और गिफ्ट शॉप बनाए जाने की योजना है।

इससे इलाज के लिए इंतजार करने के दौरान मरीजों और तीमारदारों को हल्का-फुल्का रिफ्रेशमेंट भी मिल सके।

यहां एटीएम और मोबाइल चार्जर जैसी सुविधाएं भी दिखाने का दावा किया गया था, लेकिन यूपीआरएनएन और ठेकेदार की लड़ाई से ये प्रोजेक्ट डेढ़ साल देरी देरी से चल रहा है।

झगड़े में फंस गया प्रोजेक्ट

Many projects are pending in spgi hospital.

एसपीजीआई के पूर्व निदेशक प्रो. आरके शर्मा ने दावा किया था कि नई ओपीडी दिसंबर तक शुरू हो जाएगी। भवन की फिनिशिंग के साथ ही हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम, फार्मेसी का कार्य भी साथ-साथ चल रहा है।

इससे एक साथ सभी सेवाएं शुरू की जा सकेंगी, लेकिन ये कार्य ठप पड़ा हुआ है। इस ओपीडी का निर्माण कार्य 2011 में शुरू हुआ था। जबकि पुरानी ओपीडी को बने 25 साल से अधिक हो चुके हैं। तब से अब तक मरीजों की संख्या में कई गुना अंतर आ चुका है।

हालत ये है कार्यदायी संस्थान यूपीआरएनएन और ठेकेदार के बीच झगड़े का खामियाजा संस्थान को भुगतान पड़ रहा है। हॉस्पिटल इन्फॉर्मेशन सिस्टम, पिक्चर आर्काइवल सिस्टम, साइक्लोट्रॉन मशीन की तरह ये प्रोजेक्ट भी वहां के अधिकारियों के भ्रष्टाचार का शिकार हो गई है।

एसपीजीआई के निदेशक प्रोफेसर राकेश कपूर ने बताया कि ओपीडी का निर्माण पूरा कराने के लिए एमडी यूपीआरएनएन से बात की गई है। उनका कहना है कि कोर्ट में ठेकेदार के साथ केस चल रहा है। जल्दी ही उसे सॉल्व कर लिया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed