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Lucknow News: ज्ञानभारतम् मिशन से सुरक्षित होंगी पांडुलिपियां
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लखनऊ। यूपी राजकीय अभिलेखागार में ज्ञानभारतम् मिशन के तहत बुधवार को आयोजित पांडुलिपि अभिरुचि कार्यशाला का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में श्रीमद्भगवद्गीता की दुर्लभ संस्कृत पांडुलिपि आकर्षण का केंद्र रही। वर्ष 1967 की इस पांडुलिपि में भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित सात सुंदर चित्रों के साथ भगवद्गीता के सभी 700 श्लोक संकलित हैं। रामचरितमानस की प्राचीन हिंदी पांडुलिपि ने भी प्रतिभागियों को आकर्षित किया। कार्यक्रम में ज्ञानभारतम् निर्देशिका और कोलोनियल लखनऊ नामक दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। डॉ. वंदना सिंह ने ज्ञानभारतम् पोर्टल, मोबाइल ऐप और पांडुलिपि सर्वेक्षण पर विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि ज्ञानभारतम् मिशन के जरिये देश में करीब एक करोड़ पांडुलिपियों को एकत्रित और संरक्षित करने की दिशा में काम होगा। विशिष्ट अतिथि बीबीएयू के सह प्राध्यापक डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि पांडुलिपियां हमारी बौद्धिक विरासत की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर हैं। कार्यशाला में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया।
प्रदेश की सांस्कृतिक व ज्ञान परंपरा देश की सबसे बड़ी धरोहर...
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि ज्ञानभारतम् मिशन जैसी पहल केवल पांडुलिपियों के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय इतिहास, दर्शन, साहित्य और लोक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देना है।
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मुख्य अतिथि पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि ज्ञानभारतम् मिशन के जरिये देश में करीब एक करोड़ पांडुलिपियों को एकत्रित और संरक्षित करने की दिशा में काम होगा। विशिष्ट अतिथि बीबीएयू के सह प्राध्यापक डॉ. सुशील कुमार पाण्डेय ने कहा कि पांडुलिपियां हमारी बौद्धिक विरासत की सबसे महत्वपूर्ण धरोहर हैं। कार्यशाला में 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और दुर्लभ पांडुलिपियों का अवलोकन किया।
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प्रदेश की सांस्कृतिक व ज्ञान परंपरा देश की सबसे बड़ी धरोहर...
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि प्रदेश की सांस्कृतिक और ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि ज्ञानभारतम् मिशन जैसी पहल केवल पांडुलिपियों के संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारतीय इतिहास, दर्शन, साहित्य और लोक ज्ञान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देना है।
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