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कनाडा से लौटे युवक ने की खुदकुशी, एक साल पहले पिता ने मां की गोली मारकर हत्या के बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था

Tue, 10 Aug 2021 01:54 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 01:54 AM IST
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man suicide after return from canada
लखनऊ। नाका कोतवाली क्षेत्र के पानदरीबा में सालभर पहले कनाडा से लौटे आदित्य सिंह ने सोमवार सुबह फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पिछले साल ही उसके ट्रांसपोर्टर पिता ने मां की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को भी गोली से उड़ा लिया था।
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पानदरीबा स्थित बंदर कोठी निवासी ट्रांसपोर्टर अनुरूप सिंह ने 20 अगस्त 2020 को लाइसेंसी पिस्टल से पत्नी मधु सिंह की गोली मारकर हत्या करने के बाद खुद को गोली से उड़ा लिया था। घटना के दो महीने बाद कनाडा में रहने वाला अनुरूप का बड़ा बेटा आदित्य सिंह (26) यहां आया था। वह छोटे भाई आर्यन को भी कनाडा में शिफ्ट करना चाहता था। कनाडा में रह रही आदित्य की पत्नी निराली दीक्षित लगातार फोन कर उसे वापस बुला रही थी। मगर कुछ पारिवारिक कारणों के चलते वह कनाडा नहीं जा पा रहा था। माता-पिता की असामयिक मौत और कनाडा न जा पाने की वजह से आदित्य डिप्रेशन में था। इसके चलते वह शराब पीने लगा था। शनिवार सुबह पानदरीबा स्थित कोठी के बाथरूम में उसका शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। आदित्य के मामा धीरेंद्र सिंह निवासी निरालानगर की सूचना पर नाका कोतवाली के उपनिरीक्षक नीरज द्विवेदी ने छानबीन कर शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा है।
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चंद महीने ही पति संग रह पाई निराली
लखनऊ। आदित्य कनाडा के एक बड़े होटल व जिम में नौकरी करता था। पिछले साल ही उसने वहां रहने वाली भारतीय मूल की निराली दीक्षित से लव मैरिज की थी। मगर शादी के कुछ महीने बाद ही माता-पिता की मौत होने पर अक्तूबर 2020 में आदित्य कनाडा से भारत आ गया था। परिवारीजनों के मुताबिक, रविवार रात उसकी पत्नी से फोन पर बात हुई थी। सोमवार सुबह उसने खुदकुशी कर ली। रिश्तेदारों ने निराली को फोन कर आदित्य के खुदकुशी करने की खबर दी।
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एक साल में चार मौतें, वीरान हो गई बंदर कोठी
लखनऊ। आदित्य के दादा हरबंस सिंह बंदराें के नामी डॉक्टर थे। इसी के चलते उनका आलीशान मकान पूरे इलाके में बंदर कोठी के नाम से मशहूर है। पिछले साल आदित्य के माता-पिता की मौत के कुछ दिन बाद ही दादा हरबंस सिंह का कोरोना से निधन हो गया था। कोठी में सिर्फ आर्यन व उसकी दादी ही बची थीं। आर्यन और आदित्य को परेशान देख उनकी मौसी अपने बेटे संग आकर इसी कोठी में रह रही थीं। सालभर के भीतर परिवार में चार लोगों के असामयिक निधन से कोठी वीरान सी हो गई है।
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