चौथी फेल शातिर ने पुलिस वालों से की वसूली, दिखाया रौब
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चिनहट पुलिस ने सीएम के ओएसडी शंभू यादव का नाम लेकर थानेदारों से वसूली करने वाले लखीमपुर खीरी के धौरहरा में गुलरी का पुरवा निवासी संतराम वर्मा को शनिवार दोपहर को गिरफ्तार कर लिया।
संतराम चौथी फेल है लेकिन बातचीत के अंदाज से उसने लखनऊ जोन के आईजी जकी अहमद, लखनऊ रेंज के डीआईजी डीके चौधरी, एसएसपी राजेश कुमार पांडेय सहित कई जिलों के डीएम-एसपी के होश उड़ा दिए।
ओएसडी का नाम लेकर वह अफसरों को फोन कर रौब गांठता था। अफसर संबंधित थानेदारों को उसका काम करने के निर्देश देते थे। यही नहीं संतराम फर्जी मुकदमे दर्ज कराकर लोगों से वसूली करता था। उसने मदद के नाम पर कई एसपी, सीओ और थानेदारों से वसूली भी की। एसएसपी ने बताया कि संतराम बीते करीब आठ महीने से पुलिसकर्मियों को ठग रहा था।
भतीजे की हत्या में है आरोपी
संतराम नि:शक्त है। उसके खिलाफ अपने भतीजे की हत्या का मुकदमा चल रहा है। एसएसपी ने बताया कि वर्ष 2006 में संतराम के खिलाफ लखीमपुर के धौरहरा थाना में एफआईआर दर्ज हुई थी। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जमानत पर छूटने के बाद वह राजधानी आ गया और यहां कठौता झील के पास झोपड़ी बनाकर रहने लगा। कई अधिकारियों का वह घरेलू नौकर रहा। राजधानी आकर उसने पूजा यादव नाम की युवती से प्रेम विवाह किया। इससे संतराम के दो बच्चे भी हैं।
इस तरह पान वाले से की ठगी
संतराम ने बताया कि ठगी उसने ममेरे भाई संदीप से सीखी थी। सीएम के ओएसडी का नाम लेकर एक बार उसने चिनहट एसओ शशिशेखर यादव को फोन किया। उनसे कहा कि वह दिल्ली में हैं और ड्राइवर का मोबाइल फोन पान की दुकान में छूट गया है। मोबाइल फोन दिला दो या उसकी कीमत अदा करा दो। उसने एसओ से पूछा कि तुम काम करा लोगे या मैं ऊपर बात करूं। इस पर एसओ ने उसे काम कराने का भरोसा दिया।
संदीप ने संतराम को ड्राइवर बनाकर चिनहट थाना भेजा जहां एसओ ने पान की दुकान वाले को बुलाकर उसे 4000 रुपये दिलवाए। इसी तरह संतराम मोबाइल चोरी, मारपीट व छेड़छाड़ की फर्जी शिकायत लेकर थाना पहुंच जाता था। बाद में संदीप से सीखकर संतराम ने खुद ओएसडी बनकर पुलिस अधिकारियों को फोन करने शुरू कर दिए।
लालबत्ती लगी कार से चलता है संदीप
संतराम ने बताया कि संदीप ने एमबीए किया है और लालबत्ती लगी कार से आता-जाता है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि संदीप किस नेता से जुड़ा है। कहीं वह लालबत्ती लगी कार से ठगी करने वाला गैंग तो नहीं चला रहा है। एसएसपी ने कहा कि संदीप को पकड़ने के लिए टीमें लगाई गई हैं।
आईजी को फोन करने पर फूटा भांडा
संतराम ने आईजी जोन को फोन कर झांसे में लेने की कोशिश की लेकिन इस बार दांव उलटा पड़ गया। उसने बीती 21 दिसंबर को आईजी को फोन कर खुद को ओएसडी शंभू यादव बताया। उसने कहा कि लखीमपुर एसपी को तत्काल मेरे नंबर पर संपर्क करने के लिए कहें।
आईजी ने ओएसडी के कार्यालय पर संपर्क किया तो पता चला कि उन्होंने कोई फोन नहीं किया है। इसके बाद संतराम की जांच कराई गई। सर्विलांस टीम ने उसकी कॉल डिटेल निकलवाई तो भांडा फूट गया।
थानेदारों से कैश के अलावा लिए मंहगे तोहफे
संदीप के पास पुलिस-प्रशासन के अफसरों के सीयूजी नंबर की सूची है। वह अफसरों से संतराम को अपने नौकरी की गरीबी का हवाला देते हुए मदद के लिए कहता था। अफसरों के कहने पर संतराम को थानेदार रुपये देते थे।
गोमतीनगर एसओ श्यामबाबू शुक्ला ने उसे 15000, सीतापुर एसपी ने 8000, गोंडा एसपी ने 5000, सीतापुर के एक सीओ के अलावा सीओ आलमबाग राजेश कुमार श्रीवास्तव, एसएसपी के पीआरओ, चिनहट एसओ, गाजीपुर एसओ से उसने चार-चार हजार रुपये वसूले। कई पुलिस अफसरों ने संतराम को मंहगे गिफ्ट भी दिलाए।
पत्नी व रिश्तेदार से लिखवाई रेप और छेड़छाड़ की रिपोर्ट
संतराम ने दूर की रिश्तेदार की तरफ से विभूतिखंड थाना में रेप का फर्जी मामला दर्ज कराया। उसने पत्नी की तरफ से घर में घुसकर छेड़छाड़ की रिपोर्ट भी लिखाई। दोनों मामलों की सर्विलांस सेल प्रभारी धीरेंद्र शुक्ला और उपनिरीक्षक अनुराग मिश्रा ने छानबीन कर एक रिपोर्ट आला अफसरों को भेजी।
संतराम की कॉल डिटेल में आरोपियों से सौदेबाजी करने के साक्ष्य मिलने पर शुक्रवार को चिनहट एसओ की तरफ से चिनहट कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एसएसपी ने कहा कि संतराम व उसकी पत्नी और रिश्तेदार की तरफ से दर्ज फर्जी मुकदमे खारिज किए जाएंगे।
इन अफसरों को किए फोन
संतराम ने चार बार सचिवालय में किसी गुप्ता जी से फोन पर बात की। आईजी लखनऊ जोन और एसएसपी लखनऊ को दो-दो बार फोन किया। एक बार डीआईजी लखनऊ रेंज को कॉल की। एसपी सीतापुर से आठ बात बात की। उसने एएसपी ट्रांसगोमती, एएसपी पूर्वी, डीएम खीरी, सीतापुर के धौरहरा सीओ, बाराबंकी के सीओ सिटी सहित राजधानी के माडर्न कंट्रोल रूम और बाराबंकी के पुलिस कंट्रोल रूम में संपर्क किया।
एसओ चिनहट से 12, एसओ गोमतीनगर 11 व एसओ गुडंबा से सात बार संपर्क किया। उसने सौ से अधिक बार पुलिस-प्रशासन के अफसरों को कॉल की। शातिर को दबोचने वाली टीम में चिनहट थाना के दरोगा राकेश यादव, सिपाही प्रमोद पांडेय, देवेंद्र सिंह, मनोज यादव, प्रदीप तिवारी, सूरज सिंह, सरताज अहमद और सर्विलांस सेल के सिपाही नौशाद खान शामिल हैं।