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छठे वेतन आयोग की विसंगतियां एक लाख कर्मियों की बनी समस्या

Sat, 02 Jul 2016 12:49 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 02 Jul 2016 12:49 PM IST
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major issues with seventh pay commission
डेमो

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सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें भले ही कई संवर्गों के लिए बल्ले-बल्ले करने वाली रही हों, पर प्रदेश के गुप दो और ग्रुप दो व एक के बीच के संवर्गों के लगभग एक लाख कर्मचारियों के लिए ये समस्याएं ही बढ़ाएंगी। अगर इन संवर्गों की छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर न की गईं और मौजदा ढांचे पर ही सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वेतन का निर्धारण कर दिया गया तो इन्हें नुकसान होगा। 

कारण यह है कि कई संवर्ग के कर्मचारियों को इस समय पहले एक समान वेतनमान में काम करने वाले अपने समकक्षों से कम वेतन पर काम करना पड़ रहा है तो अवर अभियंताओं और उनके समकक्ष तमाम कर्मचारियों का ग्रेड पे अपने से नीचे संवर्ग वालों के बराबर या उनसे कम हो गया है।

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दरअसल, पांचवें वेतन आयोग की रिपोर्ट तक तो सब ठीक-ठाक चला, पर छठे वेतन आयोग ने जब वेतनमान की व्यवस्था खत्म कर ग्रेड पे और वेतन बैंड की व्यवस्था की तो उसके बाद यह विसंगति उत्पन्न हो गई।
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खासतौर से यह विसंगति तब और बढ़ी जब 2011-2012 में कई संवर्गों का नया वेतन ढांचा निर्धारित किया गया। विसंगति का शिकार होने वालों में सबसे ज्यादा सांख्यिकी, कृषि, गन्ना, सहकारिता, खाद्य विभाग की आपूर्ति और मार्केटिंग शाखा, बाल विकास पुष्टाहार, पंचायत, चिकित्सा जैसे विभागों के कर्मचारी हैं।

यह है बानगी

major issues with seventh pay commission
कार्यालय - फोटो : डेमो

वर्ष 1986 में ग्रुप दो के इन सभी कर्मचारियों को प्रदेश में 470-735 रुपये का वेतनमान मिलता था। इसी ग्रुप में सचिवालय के सहायक समीक्षा अधिकारियों का पद आता था। पांचवें वेतन आयोग की रिपोर्ट तक सभी का समान वेतन रहा, पर छठे वेतन आयोग के बाद सहायक समीक्षा अधिकारियों का तो ग्रेड पे 4600 रुपये हो गया।

वहीं, इसी के समकक्ष पदों पर काम करने वाले बाकी विभागों के कर्मचारियों का ग्रेड पे 2800 रुपये ही रह गया। सांख्यिकी, सहकारिता और आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने लड़ाई लड़ी तो भी उनका ग्रेड पे बढ़ाया गया, लेकिन यह 4200 ही हो पाया। बाकी का ग्रेड पे आज भी 2800 ही है। 

साफ है कि पांचवें वेतन आयोग तक समान वेतन में काम करने वाले समान संवर्ग के इन कर्मचारियों को आज तीन श्रेणियों में अलग-अलग वेतन पर काम करना पड़ रहा है। यह भी विसंगति वेतन विसंगतियों को दुरुस्त करने के लिए 1986 में ग्रुप दो व एक के बीच वेतनमान का एक नया ढांचा 515 से 860 रुपये का बनाया गया था। इसमें अवर अभियंताओं सहित कुछ अन्य कर्मचारी संवर्गों को रखा गया था। 

छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने में पता नहीं कहां से चूक हुई कि इस ढांचे में भी वेतन विसंगतियां उत्पन्न हो गईं। पहले इनसे कम वेतनमान पर काम करने वाले आज 4600 ग्रेड पे पा रहे हैं, पर इनका 4200 ही ग्रेड पे ही है।

दिलचस्प बात तो यह है कि इनसे नीचे के वेतनमान में काम करने वाले सांख्यिकी, सहकारिता और आपूर्ति विभाग के कर्मचारियों का भी ग्रेड पे अब इनके बराबर हो गया है। इसे ही ठीक करने की लड़ाई इस समय अवर अभियंता लड़ रहे हैं।

छठे वेतन आयोग से पहले समान वेतनमान के कर्मचारी

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सातवां वेतन आयोग - फोटो : डेमो

ग्रुप दो
सहायक समीक्षा अधिकारी, सांख्यिकी, कृषि, गन्ना, सहकारिता, आपूर्ति, मार्केटिंग, बाल विकास, पंचायत, चिकित्सा
संख्या : लगभग 75 हजार
वर्तमान स्थिति
सहायक समीक्षा अधिकारी : ग्रेड पे 4600
सांख्यिकी, सहकारिता, आपूर्ति : ग्रेड पे 4200
शेष कर्मचारी : ग्रेड पे 2800
 
ग्रुप दो से  ऊपर और ग्रुप एक से नीचे का संवर्ग
अवर अभियंता और ग्रुप दो से पदोन्नति पाने वाले कर्मचारी
संख्या : लगभग 25 हजार
वर्तमान स्थिति
कुछ का : ग्रेड पे 4200
कुछ का : ग्रेड पे 4600
 
राज्य कर्मचारियों के लगभग 18 संवर्ग वेतन विसंगति के शिकार हैं। समय-समय पर हुई वार्ताओं में मुख्य सचिव समिति ने भी इस बात को माना है। सुपरवाइजरी श्रेणी के सभी कर्मचारियों का ग्रेड पे नियमानुसार 4600 ही किया जाना चाहिए। 

साथ ही ऊपर के वेतनमान में काम करने वालों को 4800 का ग्रेड पे दिया जाना चाहिए। इन्हें ठीक किए बगैर अगर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की कोशिश की गई तो विसंगति और बढ़ जाएगी। इसे कर्मचारी स्वीकार नहीं करेंगे।
- हरिकिशोर तिवारी, अध्यक्ष, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद

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