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UP Cabinet: शिक्षकों को मिलेगा कैशलेस इलाज, विस्थापित बंगाली हिंदुओं के पुनर्वास को मंजूरी; पढ़ें अहम फैसले

Fri, 30 Jan 2026 07:23 AM IST
आकाश द्विवेदी डिजिटल डेस्क, लखनऊ
डिजिटल डेस्क, लखनऊ Published by: आकाश द्विवेदी Updated Fri, 30 Jan 2026 07:23 AM IST
सार

UP Cabinet : यूपी कैबिनेट ने बड़ा फैसला लेते हुए शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मियों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने को मंजूरी दी है। सरकारी व निजी अस्पतालों में इलाज संभव होगा। साथ ही हिंदू बंगाली परिवारों के स्थायी पुनर्वासन को भी स्वीकृति मिली। इन फैसलों से लाखों लोग लाभान्वित होंगे। पढ़ें अहम फैसले...

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Major decisions by the UP Cabinet: Teachers will now receive cashless medical treatment... and Hindu Bengali f
यूपी कैबिनेट मीटिंग। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

UP Cabinet : उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों कर्मियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को कैबिनेट बैठक हुई। जिसमें कई अहम फैसले लिए गए। अब प्रदेश के माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी और उनके आश्रित परिवार सरकारी के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे।

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इससे 15 लाख शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। इस पर समग्र रूप से लगभग 448 करोड़ रुपये का व्यय होगा। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने प्रेसवार्ता में कैबिनेट के निर्णयों की जानकारी दी। बैठक में कुल 32 प्रस्ताव आए, जिनमें 30 को कैबिनेट की मंजूरी मिली। आइए विस्तार से पढ़ते हैं कैबिनेट के अहम फैसले... 
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शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद मिलेगा लाभ

कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी। स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को वेरिफिकेशन के बाद योजना का लाभ मिलेगा। 

वेरिफिकेशन के लिए जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि पहले से जो लोग केंद्र या राज्य द्वारा संचालित किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान से आच्छादित हैं, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।

विधानमंडल का बजट सत्र 9 फरवरी से, 11 को पेश होगा बजट

विधानमंडल का बजट सत्र आगामी 9 फरवरी से शुरू होगा। वहीं 11 फरवरी को प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में विधानमंडल का बजट सत्र शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई।

वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि सत्र के पहले दिन 9 फरवरी को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण होगा। तत्पश्चात 10 फरवरी को सदन में दिवंगत सदस्यों के निधन पर शोक व्यक्त किया जाएगा। वहीं 11 फरवरी को सुबह 11 बजे वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट प्रस्तुत किया जाएगा। बजट में सरकार का फोकस विकास, जनकल्याण, बुनियादी ढांचे और आर्थिक मजबूती पर रहेगा। विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही की अवधि कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में तय की जाएगी।

बांग्लादेश से विस्थापित 99 हिंदू बंगाली परिवारों का होगा स्थायी पुनर्वासन

कैबिनेट ने पूर्वी पाकिस्तान (वर्तमान बांग्लादेश) से विस्थापित होकर यूपी में रह रहे हिंदू बंगाली परिवारों के पुनर्वासन को लेकर मानवीय फैसला लिया है। कैबिनेट ने मेरठ में निवास कर रहे विस्थापितों के पुनर्वास संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी है।

बता दें कि मेरठ की तहसील मवाना के ग्राम नंगला गोसाई में पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 99 हिंदू बंगाली परिवार झील की भूमि पर लंबे समय से अवैध रूप से निवास कर रहे हैं। कैबिनेट के फैसले के बाद इन सभी 99 परिवारों का पुनर्वासन कानपुर देहात जिले की रसूलाबाद तहसील के दो गांवों में किया जाएगा।

भैंसाया गांव में पुनर्वास विभाग के नाम दर्ज 11.1375 हेक्टेयर (27.5097 एकड़) भूमि पर 50 परिवारों को तथा ताजपुर तरसौली में पुनर्वास विभाग के नाम अंकित 10.530 हेक्टेयर (26.009 एकड़) भूमि पर शेष 49 परिवारों को बसाया जाएगा। 

प्रत्येक परिवार को 0.50 एकड़ भूमि आवंटित की जाएगी। यह भूमि प्रीमियम अथवा लीज रेंट पर 30 वर्ष के पट्टे पर दी जाएगी, जिसे आगे 30-30 वर्ष के लिए नवीनीकृत किया जा सकेगा। इस प्रकार पट्टे की अधिकतम अवधि 90 वर्ष होगी। यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ विस्थापित परिवारों के सम्मानजनक और सुरक्षित पुनर्वासन को सुनिश्चित करेगा। लंबे समय बाद इन परिवारों को स्थायी ठिकाना और सुरक्षित भविष्य मिल सकेगा।


 

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वित्त मंत्री सुरेश खन्ना - फोटो : सोशल मीडिया

उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी 

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति तेज करने को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार ने ऊर्जा क्षेत्र को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। भरोसेमंद, सस्ती और निर्बाध बिजली आपूर्ति, निवेश और रोजगार के लक्ष्य को प्राप्त करने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसी सोच के अंतर्गत प्रदेश में बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक स्तर पर सुधार लागू किए गए हैं। प्रदेश सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को मैन्युफैक्चरिंग और निवेश का प्रमुख केंद्र बनाना है।

औद्योगिक विकास के लिए 24 घंटे अबाधित बिजली आपूर्ति को सुनिश्चित करना प्रमुख लक्ष्य है। बीते वर्षों में नए पावर प्लांट की स्थापना, ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार और सब स्टेशनों के निर्माण से बिजली व्यवस्था में सुधार हुआ है। औद्योगिक क्षेत्रों और एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के आसपास बिजली अवसंरचना को विशेष रूप से मजबूत किया गया है। 

ताकि उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति मिल सके और उत्पादन प्रभावित न हो।  प्रदेश में निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए वर्ष 2017  से  नवंबर, 2025 के मध्य तक 15,87,369 डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफार्मर स्थापित किये जा चुके हैं। 33/11 केवी क्षमता वाले 765  नए सब स्टेशन बनाये गए। 2,455  पुराने विद्युत् उपकेन्द्रों की क्षमता बढ़ाई गई है।

कम लागत की बिजली को प्रदेश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने का अहम साधन माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि सस्ती बिजली मिलने से उद्योगों की उत्पादन लागत घटेगी, जिससे वे घरेलू और वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक नीतियों में ऊर्जा लागत को नियंत्रण में रखने पर जोर दिया गया है। निवेशकों को स्थिर दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जा रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों का असर निवेश माहौल पर भी दिखाई दे रहा है। बेहतर बिजली आपूर्ति के कारण मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर में नए निवेश प्रस्ताव सामने आ रहे हैं। औद्योगिक इकाइयों का मानना है कि स्थिर बिजली आपूर्ति से उत्पादन की निरंतरता बनी रहती है, जिससे परियोजनाओं की समयसीमा और लागत दोनों नियंत्रित रहती हैं। 

योगी सरकार के द्वारा औद्योगिक इकाइयों के विस्तार को लेकर उठाये जा रहे कदमों से प्रदेश में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। सस्ती और निर्बाध बिजली से फैक्ट्रियों का संचालन आसान होगा और नई इकाइयों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे। रोजगार सृजन को सरकार की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें ऊर्जा व्यवस्था को मजबूत आधार के रूप में देखा जा रहा है।

फर्जीवाड़ा रोकने के लिए पर रजिस्ट्री दस्तावेजों का डिजिटलीकरण 6 महीने में

उत्तर प्रदेश में उप निबंधक कार्यालयों में पंजीकृत पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन को लेकर योगी सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में वर्ष 2002 से 2017 तक पंजीकृत विलेखों की स्कैनिंग व इंडेक्सिंग की परियोजना अवधि को अगले 6 माह तक बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है। यह परियोजना पहले ही अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और इसके लिए सरकार ने किसी अतिरिक्त बजट की आवश्यकता नहीं बताई है।

इस योजना को पहले वर्ष 2022 में 95 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। बाद में व्यावहारिक कारणों से इसमें देरी होने पर जुलाई 2024 में परियोजना की अवधि बढ़ाते हुए कुल लागत 123.62 करोड़ रुपये कर दी गई थी। वित्तीय वर्ष 2024-25 के अंत तक इस योजना पर 109.05 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं और शेष कार्य उपलब्ध बजट में ही पूरा कर लिया जाएगा।  

99% से अधिक इंडेक्सिंग, 98% स्कैनिंग पूरी

प्रदेशभर में इस परियोजना के तहत इंडेक्सिंग का 99.11 प्रतिशत और स्कैनिंग का 98.37 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। अधिकांश जिलों में यह कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। फिलहाल एटा, वाराणसी, मुरादाबाद, मैनपुरी, लखनऊ, अलीगढ़, हाथरस, आगरा, सहारनपुर व प्रयागराज में कुछ कार्य शेष है, जिसे अगले 6 माह में पूरा कर लिया जाएगा।

दो स्तर पर हो रही जांच व सत्यापन

डिजिटाइजेशन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर दस्तावेज का दो स्तर पर सत्यापन किया जा रहा है। पहले स्तर पर सहायक महानिरीक्षक निबंधन द्वारा जांच की जा रही है, जबकि दूसरे स्तर पर मंडलों और वृत्तों के उप महानिरीक्षक निबंधन द्वारा पुनः परीक्षण किया जा रहा है। यह प्रक्रिया शत-प्रतिशत सत्यापन तक जारी रहेगी। पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से कूटरचना व फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और जमीन-जायदाद से जुड़े रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित हो सकेंगे।

9351 सहायक मोटरयान निरीक्षक पदों पर होगी भर्ती

परिवहन विभाग 351 पदों पर सहायक मोटरयान निरीक्षकों के पदों पर भर्ती करेगा। बृहस्पतिवार को कैबिनेट में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। प्रदेश में तीन नए परिवहन परिक्षेत्रों के गठन को भी हरी झंडी मिल गई है। इसमें गोरखपुर, बुंदेलखंड (झांसी) और अयोध्या शामिल हैं। इन तीन परिक्षेत्रों के गठन के बाद प्रदेश में कुल 9 परिक्षेत्र हो जाएंगे।

सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी सड़क सुरक्षा (एआरटीओ) के 36 पद सृजित किए गए हैं। इन पदों पर भी जल्द भर्ती होंगी। हादसों पर अंकुश लगाने संबंधी कार्यवाही, निगरानी समेत अन्य अहम जिम्मेदारी एआरटीओ सड़क सुरक्षा के पास रहेगी।

परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि फैसलों से सड़क सुरक्षा, राजस्व वृद्धि, प्रशासनिक दक्षता के साथ साथ रोजगार सृजन को भी रफ्तार मिलेगी। जो नए परिक्षेत्र गठित होंगे वहां पर एक एक उप परिवहन आयुक्त, प्रधान सहायक व स्टेनोग्राफरों के पदों पर भर्ती की जाएगी।

 

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यूपी कैबिनेट की बैठक में फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

ई-वाहनों पर राहत

कैबिनेट ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 के तहत प्रदेश में खरीदे और पंजीकृत इलेक्ट्रिक वाहनों को नीति के चौथे व पांचवें वर्ष में पंजीकरण शुल्क और रोड टैक्स में सौ फीसदी की छूट देने संबंधी अधिसूचना को भी मंजूरी दी है।

घर बैठे डीएल करें अपडेट, नहीं लगाने होंगे चक्कर

ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी चार सेवाओं का उपयोग अब आम लोग घर बैठे कर सकेंगे। इसमें ड्राइविंग लाइसेंस में जन्मतिथि परिवर्तन, पहाड़ी क्षेत्र में वाहन चलाने की अनुमति, पंजीकरण संख्या प्रतिधारण और गैर-उपयोग सूचना परमिट की सुविधा ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

बरेली और मुरादाबाद में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला की स्थापना

छात्रों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने व विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए मुरादाबाद और बरेली में विज्ञान पार्क और नक्षत्रशाला की स्थापना की जाएगी। इसके लिए कार्यदायी संस्था बनाई गई है। इस आशय के प्रस्ताव को बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग आम जनमानस एवं विशेषकर विज्ञान के विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि उत्पन्न करने एवं विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए हर मंडल में विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला की स्थापना कर रहा है। 

लखनऊ और आगरा के बाद अब बरेली और मुरादाबाद में इसकी स्थापना की जा रही है। मुरादाबाद में मुरादाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-बरेली मार्ग पर विकसित की जाने वाली गोविंदपुरम आवासीय योजना के अन्तर्गत 4.6 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित किया गया है।

इस योजना के सेंट्रल पार्क में विज्ञान पार्क एवं नक्षत्रशाला की स्थापना के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के पास भूमि की उपलब्धता एवं निर्माण परियोजनाओं को लागू किये जाने के लिए पर्याप्त तकनीकी स्टाफ व अन्य आवश्यक संसाधन होने के दृष्टिगत प्राधिकरण को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।

विभाग के प्रमुख सचिव पंधारी यादव ने बताया कि बरेली में बनने वाला साइंस पार्क और नक्षत्रशाला विकास प्राधिकरण बरेली के रामगंगानगर आवासीय योजना में 5.33 एकड़ भूमि में 3000 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। इसके लिए बरेली विकास प्राधिकरण को कार्यदाई संस्था नामित करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।

कैबिनेट ने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के निधन पर जताया शोक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को आयोजित कैबिनेट की बैठक में महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए शोक प्रस्ताव पारित किया गया।  कैबिनेट ने 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती में हुई विमान दुर्घटना में अजित पवार व अन्य लोगों के निधन को दुखद बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की और दिवंगत पुण्यात्माओं की शांति की कामना की।

सदस्यों ने कहा कि अजित पवार ने अपने महाराष्ट्र की जनता से गहरा जुड़ाव रखते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण के लिए कार्य किया। गरीबों एवं वंचितों को सशक्त बनाने तथा महाराष्ट्र के विकास के लिए उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्मरणीय रहेगी।

बहराइच के आपदा प्रभावित 136 परिवारों को मिलेंगे पक्के आवास

बहराइच के राजस्व ग्राम भरथापुर के आपदा प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने के प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी। बीती 29 अक्तूबर को कौड़ियाल नदी में नाव पलटने से 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी, जिससे प्रभावित परिवारों को अब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत पक्के आवास मुहैया कराए जाएंगे। हादसे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2 नवंबर को गांव का हवाई सर्वेक्षण किया था और पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने की घोषणा की थी।

मुख्यमंत्री की घोषणा के क्रम में बृहस्पतिवार को कैबिनेट ने भरथापुर गांव के 136 परिवारों को विस्थापित कर मिहींपुरवा तहसील के ग्राम पंचायत सेमरहना में पुनर्वासित करने की मंजूरी दी है। इसके लिए करीब 1.70 हेक्टेयर भूमि राजस्व विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया डीएम बहराइच पूरी करेंगे। नई बस्ती का नामकरण मुख्यमंत्री की अनुमति से किया जाएगा। 

सभी परिवारों को अलग-अलग भूखंड आवंटित किए जाएंगे, जहां मुख्यमंत्री आवास योजना एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पक्के मकान दिए जाएंगे। नई बस्ती में सड़क, नाली, सीसी रोड, इंटरलॉकिंग टाइल्स, ग्रीन बेल्ट, एलईडी स्ट्रीट लाइट और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

इन कार्यों को लोक निर्माण विभाग, ग्राम्य विकास विभाग और जल जीवन मिशन के माध्यम से कराया जाएगा। प्रत्येक परिवार को भूमि आवंटन की जिम्मेदारी एसडीएम मिहींपुरवा (मोतीपुर) को दी गई है। सभी सुविधाएं विकसित होने के बाद यह बस्ती ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी जाएगी।

वन विभाग के पैकेज के अतिरिक्त मिलेगा लाभ

जो परिवार पहले से अपने पुराने स्थान को खाली कर वन विभाग या अन्य विभागों को भूमि सौंप चुके हैं, उन्हें वन विभाग से मिलने वाले पैकेज के अतिरिक्त यह पुनर्वास सुविधा भी प्रदान की जाएगी। बता दें कि भरथापुर गांव एक ओर गेरुआ नदी और दूसरी ओर कौड़ियाल नदी से घिरा है। वहीं उत्तर दिशा में वन्य जीव क्षेत्र और नेपाल सीमा है। गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण लोगों को केवल नाव के सहारे आवागमन करना पड़ता है, जिससे हर समय उनकी जान का खतरा बना रहता है।

सहमति न बनने से अटका नोएडा मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन का प्रस्ताव, मंत्रिमंडल ने नहीं दी मंजूरी

नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन के गठन से जुड़ा प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में विचार के लिए प्रस्तुत किया गया, लेकिन तकनीकी कारणों से सहमति नहीं बन पाने के कारण इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। प्रस्ताव को फिलहाल रोक दिया गया है।  आगे की प्रक्रिया के लिए पुनः परीक्षण की आवश्यकता जताई गई है।

बैठक के दौरान प्रस्ताव के प्रशासनिक ढांचे, अधिकारों के बंटवारे और मौजूदा विकास प्राधिकरणों के साथ समन्वय को लेकर स्पष्ट सहमति नहीं बन पाई। कुछ मंत्रियों ने वित्तीय भार, नए पदों के सृजन और संचालन व्यवस्था पर विस्तृत अध्ययन की जरूरत बताई, जबकि अन्य सदस्यों ने पहले से कार्यरत संस्थाओं की भूमिका को प्रभावित होने की आशंका जताई।

मंत्रिमंडल का मत था कि बिना व्यापक सहमति और स्पष्ट रोडमैप के इस तरह के बड़े प्रशासनिक बदलाव को लागू करना व्यावहारिक नहीं होगा। इसी कारण प्रस्ताव को तत्काल स्वीकृति देने के बजाय रोकते हुए संबंधित विभागों से पुनः विचार-विमर्श कर संशोधित प्रस्ताव लाने के निर्देश दिए गए हैं। बताया गया है कि आगे इस विषय पर विभिन्न विभागों और हितधारकों से राय लेकर नया मसौदा तैयार किया जाएगा। तब तक नोएडा क्षेत्र में वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ही कामकाज जारी रहेगा।

मुजफ्फरनगर की गंगा किसान सहकारी चीनी मिल का होगा आधुनिकीकरण

कैबिनेट ने मुजफ्फरनगर के मोरना स्थित गंगा किसान सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने और नई तकनीक से मिल का आधुनिकीकरण करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। मिल की वर्तमान क्षमता 2500 टीसीडी है, जिसे बढ़ाकर पहले 3500 टीसीडी और बाद में 5000 टीसीडी तक किया जाएगा। दरअसल, चीनी मिल के जर्जर प्लांट व पुरानी तकनीक की वजह से किसानों को लाभ नहीं हो रहा था। 

नई आधुनिक मशीनरी लगने से उत्पादन बढ़ेगा और संचालन में दक्षता आएगी। सबसे लाभ सीधे गन्ना किसानों को मिलेगा। नई तकनीक के कारण पेराई क्षमता बढ़ने से गन्ना किसानों की आय भी दोगुनी किए जाने और समय से गन्ना मूल्य भुगतान सुनिश्चित किए जाने में सहायता मिलेगी। 

इस पहल से किसानों की आय बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से मजबूत होंगे। यह कदम गन्ना किसानों को उनका हक दिलाने और सहकारी मिल के जरिए कृषि को मजबूत करने की दिशा में अहम है। नई आधुनिक मिल की स्थापना से क्षेत्र के किसानों का भरोसा बढ़ेगा और उत्पादन के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

यूपी में 4000 ईंट भट्ठों को मिलेगा वैधानिक दर्जा, नए संशोधन से नियमन की राह हुई आसान

उत्तर प्रदेश में ईंट भट्ठों के संचालन को लेकर लंबे समय से चले आ रहे कानूनी और प्रशासनिक विवाद को सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वर्ष 2012 की ईंट भट्ठा स्थापना स्थल मानक नियमावली में प्रस्तावित प्रथम संशोधन से प्रदेश के लगभग 4000 पुराने ईंट भट्ठों को नियमन के दायरे में लाकर उन्हें वैध मान्यता देने का रास्ता साफ हो गया है। इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण मानकों के साथ संतुलन बनाते हुए रोजगार और निर्माण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

उप्र राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष आरपी सिंह के अनुसार, वर्ष 2012 में पहली बार ईंट भट्ठों की स्थापना के लिए स्थल मानक तय किए गए थे। इसके बाद भारत सरकार ने वर्ष 2022 में नई नियमावली लागू की, जिसके तहत राज्य सरकारों को दूरी संबंधी मानकों को और कठोर करने का अधिकार मिला। अब प्रस्तावित संशोधन में आबादी से भट्ठों की न्यूनतम दूरी को 1 किलोमीटर से घटाकर 800 मीटर करने का प्रावधान किया गया है। इससे नए भट्ठों की स्थापना आसान होगी और निर्माण क्षेत्र को आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध हो सकेगा।

इसके साथ ही भट्ठों के आपसी दूरी मानक में भी बदलाव प्रस्तावित है। जहां 2022 की नियमावली में यह दूरी 800 मीटर तय थी, वहीं संशोधन के बाद इसे 1 किलोमीटर करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि क्षेत्रीय संतुलन और पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके।
सबसे अहम पहलू यह है कि वर्ष 2012 से पहले स्थापित वे ईंट भट्ठे, जिन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लिया था, उन्हें अब जिला पंचायत, वाणिज्य कर, खनन विभाग या अन्य विभागों से प्राप्त अनुमतियों के आधार पर वैध माना जा सकेगा। इससे करीब 4000 भट्ठों को राहत मिलेगी। 

सरकार का अनुमान है कि इससे 30 से 40 हजार लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा और बाजार में लाल ईंटों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे आम लोगों को मकान निर्माण के लिए सस्ती दरों पर ईंट उपलब्ध हो सकेंगी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि संशोधन लागू होने के बाद ईंट भट्ठा उद्योग में पारदर्शिता बढ़ेगी और नियमन के जरिए अवैध संचालन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

सड़कों के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी

कैबिनेट ने दो सड़कों के चौड़ीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है। वाराणसी-चंदौली में पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) चकिया राज्यमार्ग 11.235 किमी चौड़ा किया जाएगा। इसमें 325.93 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इससे सीएनसी रेलिंग, विक्टोरियन इलेक्टि्क पोल, इंट्रेंस गेट, फुटओवर ब्रिज और हेरिटेज स्तंभ का कार्य कराया जाएगा।

यह वाराणसी को सोनभद्र, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, प्रयागराज के साथ-साथ बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। इस पर कोयला मंडी, ट्रकों की बॉडी बनाने की वर्कशॉप और रेलवे स्टेशन होने की वजह से जाम की समस्या बनी रहती है। इसका चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण होने से यातायात सुगम होगा, जिससे क्षेत्र का विकास भी होगा।

देवरिया-कसया मार्ग का होगा चौड़ीकरण

कैबिनेट ने देवरिया में देवरिया-कसया मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। लोक निर्माण विभाग द्वारा 31.500 किमी मार्ग के चौड़ीकरण करने में 292.06 करोड़ रुपये की लागत आएगी। साथ ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को देवरिया शहर एवं भगवान बुद्ध की महा परिनिर्वाण स्थली कुशीनगर और नेपाल जाने में सुविधा होगी। साथ ही जिले का चहुंमुखी विकास होगा।

458 करोड़ से पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जलापूर्ति

उत्तर प्रदेश में लखनऊ और हरदोई में विकसित हो रहे पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क में औद्योगिक जलापूर्ति के लिए 458.5 करोड़ की धनराशि को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी। हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग द्वारा केंद्र सरकार की सहायता से लखनऊ में एक हजार एकड़ भूमि पर वस्त्र एवं परिधान पार्क की स्थापना की जा रही है।

इस धनराशि से टेक्सटाइल पार्क में स्वच्छ जलापूर्ति के लिए 16 एमएलडी का टीटीपी , 8.25 एमएलडी का इनटेक वेल, पंप हाउस व मुख्य पाइप लाइन और 4.50 एमएलडी का ट्यूबवेल पंप हाउस व पाइप लाइन बनाई जाएगी। इस पार्क में औद्योगिक इकाईयों को प्लग एंड प्ले सुविधा, 132 केवी विद्युत केंद्र, औद्योगिक जलापूर्ति, पेयजल आपूर्ति, सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाइट की सुविधाएं राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही हैं, जबकि पार्कों को निजी निवेशक द्वारा विकसित किया जाएगा।

वहीं पार्क में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाईयों को पानी की आपूर्ति के लिए उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा 16 एमएलडी का टीटीपी स्थापित किया जाएगा। साथ ही गोमती नदी के पानी को स्वच्छ करके आपूर्ति के लिए 8.25 एमएलडी का प्लांट और भूगर्भ जल की जलापूर्ति के लिए 4.50 एमएलडी का ट्यूबवेल पंप हाउस स्थापित किया जाएगा। इस पार्क में 10 हजार करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। अभी तक छह हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं।

कृषि और औद्योगिक भूमि पर एक समान देना होगा विकास शुल्क

प्रदेश में औद्योगिक इकाई लगाने वालों को बड़ी सहूलियत देते हुए सरकार ने औद्योगिक इकाईयों के भवनों का नक्शा पास कराने के लिए लगने वाले बाह्य विकास शुल्क की दरों को कम करने का फैसला किया है।  वहीं, कृषि व औद्योगिक भूमि पर नक्शा पास कराने के लिए जहां अब एक समान शुल्क देना होगा।

वहीं, आवासीय व व्यावसायिक भूमि के लिए अलग-अलग शुल्क की दरें तय की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट में आवास विभाग के प्रस्ताव पर 'उत्तर प्रदेश नगर योजना और विकास (विकास शुल्क का निर्धारण, उद्हण एवं संग्रहण) संशोधित नियमावली को मंजूरी दे दी है। संशधित नियमावली जारी होने के बाद नई दरें लागूं होंगी।

बता दें कि पहले नक्शा पास कराने के लिए सभी प्रकार के भू-उपयोग पर विकास शुल्क की दरें एक समान थीं। वर्तमान नियमावली के तहत पहले बाह्य विकास शुल्क की गणना में भू-उपयोग पर विचार नहीं किया जाता था। आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक व कृषि भू-उपयोग के लिए सामान दरें थीं। अब कृषि व औद्योगिक भूमि पर आवासीय और व्यावसायिक से कम बाह्य विकास शुल्क लगेगा। नगर निकाय सीमा के बाहर नक्शा पास करने की दरें कम कर दी गई हैं।

पहले सीमा के अंदर और बाहर एक समान दरें थीं। इसी तरह बेस एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) की तुलना में अतिरिक्त क्रय किए गए एफएआर पर अधिक विकास शुल्क लिया जाएगा। संशोधित नियमावली के लागू होने से जरूरी सुविधाओं जैसे महायोजना मार्ग, खुले स्थल, एसटीपी व अन्य जनसुविधाओं के लिए विकास प्राधिकरणों के पास विकास शुल्क के रूप में पैसा उपलब्ध रहेगा।
इस प्रकार होंगी दरें

प्रस्ताव के मुताबिक औद्योगिक/वेयरहाउसिंग अनिर्मित निकाय सीमा में 2000 वर्ग मीटर तक 2708200 रुपये व निकाय सीमा से बाहर 1969600 रुपये, कृषि अनिर्मित 1000 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 1624920 रुपये व सीमा से बाहर 1181760 रुपये और नव अधिसूचित क्षेत्र में अनिर्मित 1000 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 1354100 व सीमा से बाहर 984800 रुपये विकास शुल्क लगेगा। 

आवासीय में प्लॉटेड निर्मित 100 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 12310, अनिर्मित 100 वर्ग मीटर निकाय सीमा में 121869 व निकाय सीमा से बाहर 88632 रुपये लगेगा। 200 वर्ग मीटर निर्मित 49240 रुपये व अनिर्मित भूखंड के लिए 487476 व निकाय सीमा के बाहर भूखंडों का नक्शा पास कराने पर 354528 रुपये वर्ग मीटर शुल्क रखा गया है।
अपार्टमेंट या ग्रुप हाउसिंग के लिए दरें

अपार्टमेंट या ग्रुप हाउसिंग के लिए विकास शुल्क की दरें अलग-अलग की गई हैं। 100 आवास तक 100%, 100 से 125 तक 105%, 125 से 150 तक 110% बाह्य विकास शुल्क लगेगा। इससे अधिक यानी 150 से 175 तक 115% और 175 से 200 आवास या फ्लैट होने पर 120% विकास शुल्क लिया जाएगा। प्रत्येक अतिरिक्त 25 आवासीय इकाइयों के लिए 5% अधिक दरें की गई हैं।



 

पीसीएस जे की भर्ती में अब तीन साल की वकालत जरूरी

प्रदेश सरकार ने पीसीएस जे के पदों पर भर्ती के लिए तीन साल वकालत का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। कैबिनेट ने इसके लिए उप्र न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दे दी है। यह संशोधन हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर किया गया है।

संशोधन के अनुसार पीसीएस (न्यायिक) सेवा की सीधी भर्ती में तीन साल के विधि व्यवसाय यानी वकालत की अनिवार्यता का प्रावधान शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है। इन पदों पर भर्ती के लिए पहले सिर्फ विधि स्नातक (एलएलबी) होना पर्याप्त था। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षाओं में तीन साल का अनुभव अनिवार्य किया था। 

इसे सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों से अपने यहां लागू करने के निर्देश दिए गए थे। इसीलिए राज्य सरकार ने यह संशोधन किया है। प्रशिक्षण व पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। प्रक्रिया को और स्पष्ट करने के लिए नए नियम भी जोड़े गए हैं। सरकार के अनुसार, इन संशोधनों से न्यायिक सेवा की भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी।
 

25 साल पुराने भवनों व औद्योगिक भवनों के स्थान पर बना सकेंगे अपार्टमेंट

प्रदेश में 25 साल पुराने भवनों और तीन साल से बंद पड़े औद्योगिक भवनों को ध्वस्त करके उसके स्थान पर अपार्टमेंट या हाउसिंग सोसायटी बनाने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि इसके लिए न्यूनतम 2000 वर्ग मीटर का क्षेत्रफल होना अनिवार्य होगा। इसके लिए आवास विभाग ने उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 तैयार किया है। इसे कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

प्रस्तावित नीति के तहत इस श्रेणी की भूमि पर नया अपार्टमेंट के नक्शा कराने के लिए लगने वाले विकास शुल्क में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी।  वहीं, हाउसिंग सोसायटी के लिए विकास शुल्क में 25 प्रतिशत छूट देने का प्रावधान किया गया है। इस नीति का लाभ निजी के साथ ही सरकारी कॉलोनियों के मामले में भी मिलेगा।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसले के मुताबिक प्रदेश में पहली बार यह नीति लागू की जा रही है। इससे शहरी क्षेत्रों में रियल स्टेट क्षेत्र में निर्माण कार्य बढ़ेंगे और रोजगार के द्वार भी खुलेंगे। प्रस्ताव के मुताबिक एकल आवासीय या एकल भवन इस नीति के दायरे में नहीं आएंगे। लीज पर आवंटित भूमि जैसे नजूल भूमि, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और अन्य शासकीय भूमि जिसके फ्री-होल्ड में परिवर्तन नहीं हुआ है, वे भी इसके दायरे में नहीं आएंगे।

प्रस्ताव के मुताबिक तीन साल से बंद पड़े उद्योग और सक्षम प्राधिकारी द्वारा घोषित रुग्ण इकाइयों को तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी। नॉन कंफार्मिंग उद्योग, जिन्हें विस्तार की जरूरत होने या शहर के अंदर चालू रखने में व्यवहारिक कठिनाइयां होने से अन्य क्षेत्रों में पुर्नस्थापना की इच्छुक होने, शासकीय, निगमों की खाली, कारागार, बस टर्मिनल, डिपो (बस स्टाप को छोड़कर) तथा इसी प्रकार के अन्य उपयोग जो शहर के घने बसे भीड़ वाले क्षेत्रों में स्थित हो उसे तोड़कर बनाने की अनुमति दी जाएगी।

भवन विकास उपविधि के अनुसार अनुमन्य बेसिक एफएआर के ऊपर एक प्रतिशत अतिरिक्त दिया जाएगा। किसी भी पुराने भवन को तोड़कर उसके स्थान पर नया बनाने के दौरान वहां रहने वालों को दूसरे स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जाएगी या उसको किराए दिया जाएगा। मकानों का आवंटन उसी प्रकार से किया जाएगा, जो जैसे रह रहा था। ऐसा न होने पर लाटरी से मकानों या फ्लैटों का आवंटन किया जाएगा।

विकास प्राधिकरणों द्वारा पुनर्विकास योजना का काम स्वयं किया जाएगा। वे चाहेंगे तो पीपीपी, निजी बिल्डरों के माध्यम से तोड़ कर बनवा सकेंगे। हाउसिंग सोसायटी या रेजीडेंट वेलफेयर सोसायटी द्वारा भी इस योजना में काम कर सकेंगे। इनके द्वारा संबंधित विकास प्राधिकरणों को आवेदन देना होगा। इसके लिए दो तिहाई सदस्यों की सहमति जरूरी होगी। इस नीति में निर्माण कार्य तीन साल में पूरा करना होगा अधिकतम दो वर्ष का विस्तार दिया जाएगा। ईडब्ल्यूएस व एलआईजी के 10-10 फीसदी मकान बनाने पर शेल्टर फीस में छूट दी जाएगी।

 

जेवर एयरपोर्ट का विस्तार...सात गांवों की जमीनों का होगा अधिग्रहण

जेवर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए सात गांवों की जमीनों का अधिग्रहण होगा। इसके लिए बृहस्पतिवार को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। अधिग्रहण में 3913 करोड़ की धनराशि व्यय होगी। जेवर एयरपोर्ट के विस्तार के लिए छह गांवों की 1181.2793 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई है।

वहां के लोगों के विस्थापन के लिए सात गांवों की जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है। कैबिनेट ने इसके लिए अनुमोदन कर दिया है। इसके अलावा एयरपोर्ट के विस्तार के लिए जिन 49 गांवों में विस्थापितों के लिए जमीनें अधिग्रहित की गई थीं उसको लेकर कैबिनेट में कार्योत्तर अनुमोदन दिया गया। 

प्रतिबंधित प्लास्टिक पर विज्ञापन होर्डिंग लगाने पर रोक

राज्य सरकार ने प्रतिबंधित प्लास्टिक पर विज्ञापन होर्डिंग लगाने पर रोक लगा दी है। भवन या परिसर में विज्ञापन लगाने से पहले इसे संरचरात्मक इंजीनियर से प्रमाणित करवाना होगा। यही नहीं मेला, जादू शो, संगीत समारोह जैसे आयोजनों का विज्ञापन लगाने के लिए अस्थायी लाइसेंस नगर निगमों से लेना होगा। कैबिनेट की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में ये निर्णय लिए गए।

बैठक में उप्र नगर निगम (आकाश चिह्न और विज्ञापनों का विनियमन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी गई। इसके मुताबिक अब नगर निगमों द्वारा अधिकतम 12 साल के लिए विज्ञापन का लगाने का ठेका एजेंसियों को दिया जाएगा। शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन सीमित संख्या में लगेंगे। विज्ञापन का ठेका देने के लिए नगर निगमों में नगर आयुक्त की अध्यक्षता में तकनीकी समिति बनेगी। 

नई नियमावली में नगर निगम क्षेत्रों में विज्ञापन एवं होर्डिंग की अनुमति, शुल्क निर्धारण और निगरानी की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। अवैध, असुरक्षित और अनियमित होर्डिंग पर सख्त नियंत्रण किया जाएगा। नियमावली लागू होने से विज्ञापनों से होने वाली आय से नगर निगमों के राजस्व में वृद्धि होगी और लोगों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

साथ ही डिजिटल माध्यमों व डिजिटल डिस्प्ले को प्रोत्साहन दिया जाएगा। नई नीति को प्रदेश के वन ट्रिलियन डॉलर इकोनामी के लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि विज्ञापन क्षेत्र में पारदर्शिता और निवेश बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

सीएम फेलो को आयु सीमा में छूट, अतिरिक्त अंक भी

प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में सीएम फेलो को आयु सीमा में अधिकतम तीन वर्ष तक की छूट के साथ ही अतिरिक्त अंक भी देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दी गई।

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवाओं (प्रतियोगी परीक्षा के लिए मुख्यमंत्री अध्येतावृत्ति के अनुसंधानविदो के लिए आयु सीमा एवं अधिमान का शिथिलीकरण) नियमावली 2026 को स्वीकृति प्रदान कर दी है। राज्य सरकार ने कई विभागों में सीएम फेलो के रूप में युवाओं को तैनात किया है। इनके जरिये सरकार अपनी योजनाओं का संचालन के साथ ही निगरानी में सहयोग लेती है। इन युवाओं को प्रदेश सरकार की नौकरियों में छूट देने करने का निर्णय लिया है।

नियमावली के अनुसार सीएम फेलो के रूप में एक वर्ष, दो वर्ष व तीन वर्ष पूरा करने वाले युवाओं को आयु सीमा में क्रमश: एक, दो व तीन साल की छूट दी जाएगी। कार्यकाल की गणना विज्ञापन वर्ष की जुलाई के प्रथम दिवस से मानी जाएगी। जिन अभ्यर्थियों को पहले से आयु में छूट मिली है, उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा।

फेलो के रूप में एक वर्ष पूरा करने वाले युवाओं को 100 अंक वाले पेपर में एक अंक, दो वर्ष पूरा करने वालों को दो और तीन वर्ष पूरा करने वालों को तीन अंक अधिमान के रूप में मिलेंगे। मुख्य परीक्षाओं में जिनमें 101 से 500 अंक का पेपर है, वहां एक वर्ष वाले युवा को 1.5 नंबर, जबकि दो वर्ष पूरा करने वालों को तीन अंक मिलेंगे। तीन वर्ष की सेवा पूरी करने वालों को 4.5 अंक अधिमान के रूप में दिए जाएंगे।

इसी तरह 501 से एक हजार अंक वाली मुख्य परीक्षा में एक वर्ष पूरा करने वाले को दो, दो वर्ष पूरा करने वाले को चार और तीन वर्ष पूरा करने वालों को छह अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे। एक हजार से ज्यादा अंक वाली परीक्षाओं में एक वर्ष वाले को 2.5, दो वर्ष वाले को पांच एवं तीन वर्ष वाले को 7.5 अतिरिक्त अंक मिलेंगे।

वाराणसी के 18 वार्डों को मिलेगी जलभराव से निजात

प्रदेश सरकार ने वाराणसी के 18 वार्डों में सीवरेज से होने वाले जलभराव की समस्या से निजात दिलाने के लिए सीवर लाइन बिछाने का फैसला किया है। अमृत-2 के तहत भेलुपूर जोन से संबंधित इन वार्डों में 26649.44 लाख रुपये की लागत से सीवर लाइन बिछाया जाएगा। कैबिनेट सीवर लाइन बिछाने पर पर आने वाले खर्च को मंजूरी दे दी है।

बता दें कि भेलुपुर जोन के भेलुपुर दुर्गाकुंड, नरिया, सरायनंदन और जोल्हा उत्तरी समेत तमाम मुहल्लों में सीवरेज की निकासी न होने से नागरिकों को पूरे साल जलभराव जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। इसके मद्देनजर नगर विकास विभाग ने इन क्षेत्रों में सीवर लाइन बिछाने की कार्ययोजना तैयार की है। चूंकि यह काम अटल नवीकरण और शहरी रुपांतरण मिशन (अमृत-2) के होना है। इसलिए इसपर खर्च होने वाली धनराशि प्रदेश व केंद्र सरकार और नगर निगम मिलकर करेंगे।

गोरखपुर में सीवरेज योजना के लिए 721.40 करोड़ मंजूर

इसके अलावा कैबिनेट ने गोरखपुर में जोन-3 में सीवरेज योजना के लिए भी 72140.41 लाख रुपये खर्च करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव के मुताबिक इस परियोजना से शहर के 17 वार्डों में रहने वाले 195947 आबादी को सीवर की सुविधा मिलेगी। वहीं, 43604 घरों को सीवर से जोड़ा जाएगा।

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