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महेश हत्याकांड का खुलासा : परिचित ने बेल्ट से कसकर मारा, मौके पर छूटी चप्पल से फंसा, डोरी से खुला राज

Thu, 15 May 2025 12:47 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 15 May 2025 12:47 AM IST
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Mahesh murder case solved: An acquaintance hit him hard with a belt, got trapped by the slippers left at the scene, the secret was revealed with a string
महेश हत्याकांड का खुलासा : परिचित ने बेल्ट से कसकर मारा, मौके पर छूटी चप्पल से फंसा, डोरी से खु
लखनऊ। नगराम के कुबहरा गांव में चार मई को हुई महेश (35) की हत्या का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया कि हत्या मृतक के परिचित मंशाराम ने ही की थी। दोनों शराब के नशे में थे। इसी दौरान हुए विवाद के बाद मंशाराम ने पहले महेश की पिटाई की और फिर बेल्ट से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी।
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पुलिस के अनुसार, गुमराह करने के लिए महेश का शव पास में ही एक कब्र पर रख दिया था। वारदात के बाद से आरोपी बेल्ट की जगह डोरी बांधकर घूम रहा था। मंशाराम ने घटना स्थल पर अपनी एक चप्पल भी छोड़ दी थी, जिसका दूसरा जोड़ा उसके घर से बरामद किया गया है। कड़ियां से कड़ियां जोड़कर पुलिस आरोपी तक पहुंची।
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एसीपी मोहनलालगंज रजनीश कुमार के अनुसार, महेश का शव पांच मई की सुबह गांव के बाहर सहजराम की कब्र पर मिला था। महेश की पत्नी सुनीता ने गांव के रामदीन रावत, उनके बेटे दीपू, लवकुश, लवकुश की मां विनीता, बहन रेशमा और गोसाईंगंज के कर्बला मीसा गांव निवासी सुरेंद्र कुमार के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई थी।
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पुलिस ने करीब 55 लोगों से पूछताछ की और सभी के बयान वीडियो रिकॉर्ड किए। जांच के दौरान पाया गया कि मंशाराम आमतौर पर बेल्ट पहनता था, लेकिन घटना के बाद से वह डोरी बांध रहा था। पूछताछ में जब उसे एक बेल्ट दिखाई गई तो उसने पहले कहा कि वह बेल्ट महेश ले गया था, लेकिन बाद में हत्या स्वीकार कर ली।

मंशाराम ने कबूला कि वह और महेश एक खाली प्लॉट में बैठकर शराब पी रहे थे। नशे में महेश गालीगलौज करने लगा। गुस्से में आकर उसने पहले धक्का दिया, इससे महेश के सिर में चोट आई और फिर बेल्ट से गला कसकर उसकी जान ले ली।

शव को कब्र पर रखकर दूसरे परिवार को फंसाने की रची थी साजिश
हत्या के बाद मंशाराम ने गांव के कुछ लोगों को फंसाने के इरादे से शव को सहजराम की कब्र पर रख दिया। दरअसल, तीन साल पहले सहजराम ने आत्महत्या की थी और सुसाइड नोट में महेश व सुनीता को दोषी ठहराया था। इसी का फायदा उठाकर मंशाराम ने मामले को भटकाने की कोशिश की। मंशाराम ने इससे पहले नशे में रामदीन की मड़ैया भी जला दी थी, जिससे उसका उनके परिवार से विवाद हुआ था। वह इस मामले में भी रामदीन को फंसाना चाहता था।


पुलिस टीम को 25 हजार का इनाम : जांच में जिन लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई थी, उनकी लोकेशन गांव में ही पाई गई और किसी की संलिप्तता नहीं मिली। पुलिस ने बगैर दबाव में आए किसी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं किया। डीसीपी दक्षिणी निपुण अग्रवाल ने घटना का सफल खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
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