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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Mahakumbh 2025: Diwali of industries in Mahakumbh, Lakshmi raining on every district

Mahakumbh 2025: महाकुंभ में उद्योगों की हुई दिवाली, हर जिले पर बरस रहीं लक्ष्मी, जमकर हो रहा कारोबार

Sat, 18 Jan 2025 09:05 AM IST
ishwar ashish अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ
अभिषेक गुप्ता, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 18 Jan 2025 09:05 AM IST
सार

महाकुंभ 2025 के कारण छोटे कारीगरों व छोटी इकाइयों के पास 10 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर हैं। आयोजन से राज्य सरकार को दो लाख करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है।

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Mahakumbh 2025: Diwali of industries in Mahakumbh, Lakshmi raining on every district
महाकुंभ का आयोजन। - फोटो : amar ujala

विस्तार

धार्मिक आयोजन कैसे किसी प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनते हैं, इसका साक्षात प्रमाण है प्रयागराज महाकुंभ। लगभग 40 करोड़ श्रद्धालुओं के स्वागत को तैयार महाकुंभ में सभी 75 जिलों के कारीगरों से लेकर उद्यमी तक प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े हैं। सिर्फ 45 दिन में 35 देशों के बराबर आबादी आकर्षित करने वाला यह महा आयोजन उद्योगों के लिए दिवाली से कम नहीं है। अकेले 10 हजार करोड़ रुपये के ऑर्डर छोटे कारीगरों और छोटी इकाइयों के पास हैं।

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महाकुंभ में राज्य सरकार का 7,500 करोड़ रुपये का बजट है। इस खर्च से करीब 25 हजार करोड़ रुपये के राजस्व और दो लाख करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। महाकुंभ ने जूता-चप्पल सिलने वाले कारीगर से लेकर हेलीकॉप्टर चलाने वाली कंपनी तक के लिए कमाई के रास्ते खोले हैं।
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इसके अतिरिक्त किराने के सामान से 4000 करोड़ रुपये, खाद्य तेल से 2500 करोड़, सब्जियों से 2200 करोड़, बिस्तर, गद्दे, चादर, तकिया व कंबल आदि से 900 करोड़, दूध व अन्य डेयरी उत्पाद से 4200 करोड़, हॉस्पिटैलिटी से 2500 करोड़ और अन्य क्षेत्रों से कम से कम 3000 करोड़ रुपये की कमाई होगी। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के यूपी प्रमुख महेंद्र गोयल के मुताबिक महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की बुनियादी जरूरत से जुड़ी चीजों से ही 17,310 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा।
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स्मॉल इंडस्ट्रीज एंड मैन्यूफैक्चर्स एसोसिएशन के मुताबिक पूजा सामग्री, कपड़े, स्मृति चिह्नों की खरीदारी में हस्तशिल्प, रेडीमेड और खाद्य पदार्थों का व्यापार फल-फूल रहा है। इनका लाभ हर जिले को हस्तशिल्पियों को मिल रहा है। तो कपड़े में गौतमबुद्धनगर, कानपुर, गाजियाबाद, बनारस, मिर्जापुर और उन्नाव के कारीगरों व उद्यमियों को सीधा लाभ मिला है।

ये जिले भी हुए मालामाल

भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, बिजली व पानी की आपूर्ति और सुरक्षा व्यवस्था ने गोरखपुर, मेरठ, हापुड़, लखनऊ, सीतापुर, कन्नौज, इटावा और झांसी को मालामाल किया है। पर्यटन, परिवहन, पानी, पूजापाठ की सामग्री आदि ने मथुरा, वाराणसी, कानपुर, हरदोई, फर्रुखाबाद, कानपुर देहात और बागपत को करोड़ों रुपये का काम दिया है। प्रदेश के 82 बड़े ब्रांड्स और देश के 178 ब्रांड्स ने भी अस्थायी रूप से 9000 युवाओं को रोजगार दिया है। टेंट सिटी ने स्थायी रूप से 2000 से ज्यादा रोजगार दिए हैं।

महाकुंभ ने खोले हर जिले के लिए रोजगार और आय के रास्ते
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल के मुताबिक महाकुंभ ने हर जिले के लिए रोजगार और आय के रास्ते खोले हैं। होटल, रेस्टोरेंट, खाने-पीने के खोमचे, हवाई यात्रा, रेल और सड़क परिवहन की मांग 80 गुना तक बढ़ेगी। वहीं, निर्माण, सुरक्षा, सफाई व स्वास्थ्य सेवाओं में लगभग 10 हजार श्रमिकों व अकुशल कारीगरों को रोजगार मिलेगा। इनकी सर्वाधिक आपूर्ति गोंडा, देवरिया, बलिया, महराजगंज, कुशीनगर, कानपुर, कौशांबी, चित्रकूट, महोबा, बांदा, हमीरपुर और गाजीपुर से हो रही है।

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