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क्या सिर्फ यूपी के बच्चे खा सकेंगे मनपसंद मैगी?

Sun, 07 Jun 2015 08:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 07 Jun 2015 08:11 AM IST
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Maggi sample lab test in Lucknow.

बच्चों की सेहत के लिए खतरा बनी मैगी के एक के बाद एक लैब नमूने देश के अन्य राज्यों की टेस्टिंग लैब में जहां फेल हो रहे हैं वहीं लखनऊ लैब ने मैगी के तीन नमूनों को जांच के बाद क्लीनचिट दे दी है।

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एक माह से अधिक समय से सर्वे सैंपलिंग के लिए जांच को लैब भेजे गए मैगी के 12 में से तीन नमूनों की टेस्ट रिपोर्ट देर शाम एफएसडीए मुख्यालय को सौंपी गई।

इन तीनों ही में किसी भी तरह की मिलावट न होने के बात कहते हुए खतरनाक लेड की मात्रा और मोनोसोडियम ग्लूकामेट (एमएसजी) को भी निर्धारित मानक में पाए जाने के आधार पर ही नमूनों को ओके बताया गया है।
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लखनऊ जन विश्लेषण प्रयोगशाला द्वारा लेटलतीफी के बाद मैगी के 12 में से तीन नमूनों की रिपोर्ट शनिवार देर शाम जारी कर दी गई। जबकि एक दिन पहले ही केंद्रीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसए) मैगी के नौ उत्पादों को प्रतिबंधित कर इसकी बिक्री पर रोक लगा दी।
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एफएसएसए की इंफोरसमेंट इकाई ने यह निर्णय विभिन्न राज्यों में हुई मैगी नमूनों की लैब टेस्टिंग अनसेफ श्रेणी में फेल आने के बाद लिया। इसके बाद ही प्रदेश के खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के आयुक्त ने भी मैगी बिक्री को प्रतिबंधित इसका स्टाक शीघ्र वापस लेने के निर्देश दिए। इसके साथ ही अन्य ब्रांड के नूडल्स की सैंपलिंग भी करने को कहा था।

न ही मिलावट और न ही लेड ज्यादा

Maggi sample lab test in Lucknow.

जिला एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी (डीओ) जेपी सिंह ने बताया कि देर शाम लैब से मैगी के तीन नमूनों की जांच रिपोर्ट में किसी भी तरह की गड़बड़ी न पाए जाने पर मैगी को पास बताया गया है।

उन्होंने बताया कि लैब एनालिस्ट द्वारा जांच रिपोर्ट में किसी भी तरह की मिलावट के साथ ही मानक से अधिक लेड अथवा एमएसजी न पाए जाने की बात कही गयी है।

इतना ही नहीं जांच रिपोर्ट में मैगी नमूने को पैकेजिंग एक्ट के तहत भी पास बताया गया है। मैगी के इन नमूनों की विस्तृत जांच रिपोर्ट मिलने बाद लैब जांच पर चर्चा की जा सकेगी।

गोरखपुर से कोलकाता लैब तक फेल हुए थे नमूने

पहले गोरखपुर जनविश्लेषण प्रयोगशाला और इसके बाद कोलकाता की रेफरल लैब में हुए बाराबंकी के मैगी सैंपल की जांच में इसे सेहत के लिए खतरनाक माना गया था।

इसमें जानलेवा लेड की मात्र तय मानक से सात से आठ गुना अधिक मिली थी। इसके साथ ही इसमें एमसीजी (मोनोसोडियम ग्लूकामेट) भी था। जबकि पैकेट पर इस संबंध में कोई वैधानिक चेतावनी नहीं थी।

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