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गोसाईगंज डकैती के मुख्य अभियुक्त ने किया सरेंडर, पुलिस को चकमा देकर पहुंचा कोर्ट

Mon, 11 Mar 2019 03:10 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Mon, 11 Mar 2019 03:10 PM IST
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madhukar mishra surrendered in court in connection with gosaiganj robbery.
बरामद हुई सीसीटीवी फुटेज में आरोपी। - फोटो : amar ujala

गोसाईगंज में पुलिस के साथ मिलकर डकैती डालने के मामले में अधिवक्ता मधुकर मिश्रा को गिरफ्तार करने के लिए लखनऊ पुलिस तलाश करती रहीं। लेकिन मिश्रा उसके हाथ न आया, बल्कि उसने अपने पर चल रहे मारपीट और बलवा के साल 2015 के केस में लखनऊ की जिला अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। जज ने उसे 16 मार्च तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है और अगली सुनवाई 16 मार्च को रखी गई है।

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इससे पहले मिश्रा ने स्पेशल सीजेएम हिमांशु दयाल श्रीवास्तव के समक्ष आत्मसमर्पण की अर्जी दी थी। इसमें बताया था कि उस पर 2015 में गाजीपुर थाने में केस दर्ज हुआ था। उस पर घर में घुसकर मारपीट और बलवा करने के आरोप थे। वह इस मामले में जज के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहता है। इस पर कोर्ट ने अभियोजन अधिकारी से मामले के विषय में पूछा, जिन्होंने बताया कि पुलिस ने इस मामले में मिश्रा के खिलाफ चार्जशीट प्रस्तुत कर दी है। 
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इसके बाद करीब एक बजे मधुकर मिश्रा ने जज के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। उसने मामले में जमानत के लिए अर्जी नहीं दी और जज ने उसे 16 तारीख तक के लिए न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। 16 मार्च को अगली सुनवाई रखी गई है, जिसमें उसे कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश जेल अधिकारियों को दिए गए हैं।

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सेंट्रल बार ने किया निलंबित

दूसरी ओर अधिवक्ता की अपराध में संलिप्तता को देखते हुए सेंट्रल बार एसोसिएशन की एक बैठक बार अध्यक्ष आदेश सिंह द्वारा बुलाई गई। इस बारे में महामंत्री संजीव पांडेय ने बताया कि बैठक में मधुकर मिश्रा की डकैती में संलिप्तता सामने आने पर सेंट्रल बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी ने उसके कृत्य और आचरण की कड़ी निंदा की। वहीं मामले की जांच चलने तक उसकी प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी। वहीं अगर उसे मामले में सजा होती है तो बार उप्र बार काउंसिल को पत्र लिखा जाएगा कि मिश्रा की सदस्यता खत्म की जाए। 
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