मदरसों को सौगात देने की सारी बाधाएं दूर, जल्द ही होगी घोषणा
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सूबे की सरकार ने मदरसों को अनुदान देने की सभी बाधाएं दूर कर ली हैं। समय मिलने के कारण मदरसा संचालकों ने अपने सभी मानक पूरे कर लिए हैं। इसके चलते अब शेष 48 मदरसों को भी अनुदान मिल जाएगा। इस संबंध में शीघ्र ही कैबिनेट में प्रस्ताव रखा जाएगा।
प्रदेश में जब सपा सरकार बनी थी तो उस समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 147 मदरसों को अनुदान देने की घोषणा की थी, लेकिन जुलाई 2015 में सरकार 99 मदरसों को ही अनुदान दे पाई थी।
वह भी तब संभव हो पाया था जब सरकार ने अनुदान के लिए जरूरी मानक घटा दिए थे। इसके बाद भी, 48 मदरसे अनुदान से वंचित रह गए थे।
सरकार ने इसके लिए वर्ष 2003 तक मान्यता प्राप्त मदरसों से ही आवेदन मांगे थे और इनको ही मानक पूरा करने के लिए समय दिया था। इनमें भी ज्यादातर मदरसे जमीन के मालिकाना हक के मानक को पूरा नहीं कर पा रहे थे।
जमीनों पर मालिकाना हक को लेकर था विवाद
अनुदान की शर्त है कि मदरसा जिस जमीन पर संचालित है, वह मदरसे के नाम पर होनी चाहिए, लेकिन ज्यादातर मदरसे जिस जमीन पर स्थापित हैं उनमें मालिकाना हक को लेकर विवाद है। एक ही खसरा नंबर पर कई लोगों के नाम दर्ज हैं।
इस पर यह कहा गया था कि यदि मदरसा संचालक अपने नाम पर जमीन के कागज दिखा देंगे तो उन्हें अनुदान मिल जाएगा। अब एक वर्ष बाद इन मदरसों ने अपने सारे विवाद दूर कर मानक पूरे कर लिए हैं।
अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग ने इनके प्रस्तावों का परीक्षण भी कर लिया है, जिसको कैबिनेट में रखा जाएगा। अनुदान मिलने के बाद वहां पढ़ाने वाले शिक्षकों को सरकार वेतन के लिए अनुदान देगी।
अनुदान के ये हैं फायदे
अनुदान मिलने के बाद मदरसों में 12 शिक्षकों (आलिया के लिए चार, फौकानिया के लिए तीन व तहतानिया के लिए पांच) के अलावा प्रधानाचार्य और दो कर्मचारियों के पद स्वीकृत हो जाते हैं। इन सभी को सरकार वेतन देती है। इससे सरकार पर प्रति मदरसा करीब 50 लाख रुपये सालाना का बोझ पड़ता है।