हिफाजत के नाम पर 7 माह में बिके 12 करोड़ के असलहे
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रविवार को आलमनगर में कार में बैठ कर शराब पीते समय पिस्तौल से खेल रहे युवकों से गोली चल गई।
इसी तरह सोमवार को गोमतीनगर में एक स्कूल में वेतन लेने पहुंचे लाइब्रेरियन पर स्कूल संचालिका के दबंग बेटे व स्कूल के सचिव ने लाइसेंसी रिवॉल्वर से फायरिंग कर दी।
ये चंद उदाहरण यह बताने के लिए काफी हैं कि लाइसेंसी हथियार कितने गैरजिम्मेदार लोगों के हाथ का खिलौना बन गए हैं।
सेफ्टी के नाम पर लिए जा रहे ये असलहे स्टेटस सिंबल का जरिया बन गए हैं। आंकड़े भी कुछ ऐसा ही बताते हैं। वर्तमान वित्तीय वर्ष के महज सात महीनों में ही शहरवासियों ने 12 करोड़ से अधिक की लागत के 1372 असलहे अपनी सुरक्षा के नाम पर खरीद डाले हैं।
बंदूक राइफल, रिवॉल्वर व पिस्टल के इस शौक की वजह से शहर में हर साल वैध असलहों की खरीद का ग्राफ लगातार चढ़ता जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि असलहा खरीदने से ज्यादा लाइसेंस लेने वालों की कतार है।
बीते तीन माह में ही यह दो गुना तक पहुंच गई है। लाइसेंस आवेदकों की लगातार बढ़ती संख्या देख कर तो यही लगने लगा है कि शायद शहर का हर दसवां व्यक्ति अपने को असुरक्षित मान रहा है।
ये रहे आंकड़े
जिला प्रशासन के दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2010 में शहर में पूरे साल में 1205 बंदूक, राइफल, पिस्टल व रिवॉल्वर खरीदे गए। वर्ष 2011 में 1409, 2012 में 1,115 असलहे निजी सुरक्षा के नाम पर खरीदे गए।
वर्ष 2013 में तो असलहों की खरीद-फरोख्त का ग्राफ अचानक ऊंचा चढ़ने लगा। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक जनवरी से 31 जुलाई 2013 के दौरान मात्र सात महीनों में ही बंदूक, राइफल, रिवॉल्वर व पिस्टल खरीदने वालों की संख्या 1372 तक पहुंच गई जबकि अभी साल खत्म होने में पांच माह का समय बाकी है।
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से खुले बाजार तक का विकल्प
सामान्यत: लाइसेंस बनने के बाद ऑर्डिनेंस फैक्ट्री से सरकार द्वारा नियंत्रित रेट पर असलहा खरीद होती है जबकि कुछ पैसे वाले खुले बाजार से भी इन्हें खरीद कर अपने इस महंगे शौक को पूरा करते हैं।
वर्तमान में नियंत्रित दर पर बंदूक खरीद में 30 से 35 हजार, राइफल खरीद पर 1.10 लाख, पिस्टल खरीद में 66 से 70 हजार और रिवॉल्वर खरीद में 85 से 95 हजार रुपये तक का खर्च आता है जबकि खुले बाजार में यह कीमत एक लाख से तीन लाख तक होती है।
इन सात महीनों में ही शहरवासी अब तक 379 बंदूक पर 1.14 करोड़ रुपये, 129 राइफल पर 1.42 करोड़ रुपये, 288 पिस्टल पर १.90 करोड़ रुपये, व 576 रिवॉल्वर पर 4.90 करोड़ रुपये खर्च कर चुके हैं।
इसमें अगर दस फीसदी असलहे खुले बाजार से खरीदे जाने की बात मान ली जाए तो इस साल अब तक असलहा खरीद का खर्च 12 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाता है।
यूं बढ़ रहे असलहा प्रेमी
2010 2011 2012 2013
[1 जून से 31 जुलाई]
बंदूक 23315 24161 30117 37976
राइफल 8461 8605 7821 7475
रिवॉल्वर-पिस्टल 31776 32775 39940 45451
स्वीकृति 1205 1409 1115 1372
आपत्ति 3997 519 401 566
संस्तुति लंबित 24161 30119 37976 43105
संस्तुति सहित वापस 2150 590 427 369