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लविवि : पीएम-उषा योजना में मिले 100 करोड़ रुपये
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लखनऊ। आर्थिक तंगी से जूझ रहे लखनऊ विश्वविद्यालय ने केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) कार्यक्रम के तहत 100 करोड़ रुपये का अनुदान हासिल किया है। इस अनुदान से लविवि में क्लासरूम, पुस्तकालय, प्रयोगशाला और प्रेक्षागृह का निर्माण हो सकेगा।
लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक विकास के लिए चल रहे तीन दिवसीय भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम के आयोजन के दौरान ही इसकी सूचना मिली। लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, यह फंडिंग लविवि को उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
नई शिक्षा नीति लागू करने में मिलेगी मदद
नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का हो गया है। ऐसे में विवि को अतिरिक्त कक्षाओं की जरूरत होगी। प्रयोगशाला की क्षमता भी बढ़ानी होगी। अनुदान मिलने के बाद यह काम करने में आसानी होगी।
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इसलिए महत्वपूर्ण है यह अनुदान
लविवि का बजट पिछले 25 साल से फ्रीज है। ऐसे में लविवि को हर साल 40 करोड़ रुपये का तय अनुदान मिलता है। पिछले 25 साल में वेतन मद का खर्च ही चार गुना पहुंच चुका है। बाकी खर्च भी बढ़े हैं। ऐसे में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की फीस और परीक्षा फीस से मिला पैसा ही लविवि का सहारा था। आर्थिक तंगी की वजह से लविवि में अभी तक प्रेक्षागृह नहीं बन सका है। कक्षाओं की कमी का आलम यह है कि अभिनवगुप्त संस्थान तक में अन्य विभागों की कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। एकमुश्त सौ करोड़ रुपये मिलने के बाद यह काम हो सकेंगे।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में शैक्षणिक विकास के लिए चल रहे तीन दिवसीय भारतीय संस्थागत नेतृत्व समागम के आयोजन के दौरान ही इसकी सूचना मिली। लविवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने उच्च शिक्षा को आगे बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता के लिए आभार व्यक्त किया। उनके अनुसार, यह फंडिंग लविवि को उत्कृष्टता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
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नई शिक्षा नीति लागू करने में मिलेगी मदद
नई शिक्षा नीति लागू होने के बाद स्नातक पाठ्यक्रम चार साल का हो गया है। ऐसे में विवि को अतिरिक्त कक्षाओं की जरूरत होगी। प्रयोगशाला की क्षमता भी बढ़ानी होगी। अनुदान मिलने के बाद यह काम करने में आसानी होगी।
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इसलिए महत्वपूर्ण है यह अनुदान
लविवि का बजट पिछले 25 साल से फ्रीज है। ऐसे में लविवि को हर साल 40 करोड़ रुपये का तय अनुदान मिलता है। पिछले 25 साल में वेतन मद का खर्च ही चार गुना पहुंच चुका है। बाकी खर्च भी बढ़े हैं। ऐसे में स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की फीस और परीक्षा फीस से मिला पैसा ही लविवि का सहारा था। आर्थिक तंगी की वजह से लविवि में अभी तक प्रेक्षागृह नहीं बन सका है। कक्षाओं की कमी का आलम यह है कि अभिनवगुप्त संस्थान तक में अन्य विभागों की कक्षाएं संचालित करनी पड़ रही हैं। एकमुश्त सौ करोड़ रुपये मिलने के बाद यह काम हो सकेंगे।