एलयू हॉस्टल में उपद्रव करने वाली छात्राओंं को भेजा जा रहा है घर
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लखनऊ विश्वविद्यालय के ‘कैलाश’ की प्रोवोस्ट द्वारा हॉस्टल खाली करने के बाद गुरुवार को माहौल सामान्य करने की प्रक्रिया शुरू हो गई। कार्य परिषद के आदेश को पूरा करने के लिए चीफ प्रोवोस्ट कार्यालय से उपद्रव में शामिल रहीं छात्राओं के अभिभावकों को फोन कर बुलाया जा रहा है।
फिलहाल अभिभावकों से छात्राओं को घर ले जाने को कहा जा रहा है। उन्हें हॉस्टल देने पर बाद में विचार होगा। हालांकि, इसमें कुछ छात्राएं ऐसी भी हैं जो उपद्रव में नहीं, लेकिन दबाव की वजह से धरने में शामिल थीं। संभावना है कि माफी मांगने पर उन्हें छोड़ दिया जाए।
कैलाश छात्रावास की प्रोवोस्ट प्रो. शीला मिश्रा ने बुधवार देररात कुलपति प्रो. एसबी निमसे की मान-मनौव्वल के बाद हॉस्टल खाली किया था। दरअसल, भ्रष्टाचार और छात्राओं से बदतमीजी के आरोप की वजह से प्रोवोस्ट को रविवार को सात दिन के लिए हॉस्टल से बाहर रहने के लिए कहा गया था।
उनके स्थान प्रो. मनुका खन्ना को हॉस्टल का चार्ज दिया गया था। मगर, प्रो. शीला ने छात्राओं की आड़ लेकर हॉस्टल खाली करने से मना कर दिया था। यहां तक कि मंगलवार रात छात्राओं ने बाहर आकर धरना शुरू कर दिया।
छात्राओं के साथ शामिल छात्रों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की करने के साथ ही शिक्षकों के आवासों पर भी हमला बोला था। इस मामले में छात्रों की पहचान कर नामजद रिपोर्ट कराई गई है जबकि छात्राओं को फिलहाल हॉस्टल से बाहर किया जा रहा है।
कैलाश हॉस्टल से प्रोवोस्ट के पलायन करने के बाद बुधवार रात उनके समर्थन वाली छात्राओं ने अन्य छात्राओं को धमकाना शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सात दिन बाद प्रोवोस्ट के आने पर उनका जीना मुश्किल कर दिया जाएगा।
प्रोवोस्ट के चले जाने की वजह से अन्य छात्राओं में थोड़ी हिम्मत बंधी थी। इस वजह से वे भी भिड़ गईं। मामला इतना बढ़ा कि मारपीट होते-होते बची। हॉस्टल के स्टाफ ने किसी तरह दोनों गुटों की छात्राओं को अलग किया।
...तो हॉस्टल छोड़ देंगी छात्राएं
मंगलवार की घटना के बाद किसी अनहोनी की आशंका के चलते गुरुवार को भी विवि परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएससी के जवान तैनात रहे। यहां तक कि सीओ महानगर हरेंद्र यादव खुद कमान संभाले दिखे। पुलिस ने परिसर में मार्च किया।
परीक्षा होने की वजह से परिसर में भी चारों तरफ पुलिस तैनात रही। प्रोवोस्ट और अन्य लोगों पर नामजद रिपोर्ट दर्ज होने की वजह से परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। आलम यह था कि बुधवार को धरना प्रदर्शन करने वाला एक भी छात्र गुरुवार को परिसर में नहीं दिखा।
लखनऊ विश्वविद्यालय में बड़ी संख्या में पुलिस और पीएससी तैनात थी। इसके बावजूद मुख्य ग्राउंड की दीवार हॉस्टल की ओर से तोड़ने की जुर्रत की गई। हॉस्टल के गार्ड ने प्रॉक्टर कार्यालय को सूचित किया कि करीब सौ लड़के अचानक दीवार तोड़ने की कोशिश कर रहे थे। गार्ड को आता देख वे भाग गए। हालांकि, गार्ड के आते-आते दीवार की कई ईंटें वे गिरा चुके थे।
कैलाश हॉस्टल की छात्राओं ने प्रो. शीला से खुद को खतरा होने की बात कही है। गुरुवार को हॉस्टल की दो दर्जन से ज्यादा छात्राओं ने चीफ प्रॉक्टर प्रो. निशि पांडेय के पास इस संबंध में पत्र सौंपा है।
छात्राओं का कहना है कि उन्हें प्रोवोस्ट से खतरा है।
प्रोवोस्ट ने उन्हें धमका रखा है कि जांच पूरी होने के बाद जब वे लौटेंगी तब छात्राओं को देख लेंगी। छात्राओं ने पत्र में कहा है कि अगर प्रो. शीला मिश्रा वापस प्रोवोस्ट का चार्ज लेती हैं तो उन्हें हॉस्टल छोड़ना पड़ेगा।