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Triple Murder: हथियारों का शौकीन... हत्या करने के पांच साल बाद भी बनवा लिया था शस्त्र लाइसेंस, लल्लन की कहानी
Sun, 04 Feb 2024 10:23 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 04 Feb 2024 10:23 AM IST
सार
Malihabad Triple Murder Case: लखनऊ के मलिहाबाद के मोहम्मदनगर तालुकेदारी गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान छह फीट जमीन को लेकर हुए विवाद में हिस्ट्रीशीटर ने अपने बेटे और साथियों के साथ घर में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मां-बेटे और चचेरे भाई को मार डाला। वारदात सीसीटीवी में कैद हो गई।
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Lucknow Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लखनऊ के मलिहाबाद के तिहरे हत्याकांड की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस की लचर पैरवी के कारण आरोपी लल्लन का शस्त्र लाइसेंस खारिज नहीं हो सका। खास बात ये है कि लल्लन खान उर्फ सिराज ने वर्ष 1974 में पहली हत्या की थी और उसके पांच साल बाद ही शस्त्र लाइसेंस बनवा लिया।
पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1980 में मलिहाबाद पुलिस ने सिराज की हिस्ट्रीशीट खोली थी और तभी आरोपी के शस्त्र लाइसेंस के लिए पुलिस रिपोर्ट भी भेजी गई थी।
जिला प्रशासन की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी लल्लन के नाम दो शस्त्र लाइसेंस हैं। डीबीबीएल गन का लाइसेंस उसने एक जून 1979 को बनवाया था, जिसकी पुलिस रिपोर्ट हसनगंज कोतवाली से लगी थी।
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वहीं, दूसरी एनपी बोर रायफल का लाइसेंस उसने एक जुलाई 1980 को बनवाया था। हालांकि 25 अगस्त 1992 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने लल्लन के दोनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।
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पुलिस की लापरवाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 1980 में मलिहाबाद पुलिस ने सिराज की हिस्ट्रीशीट खोली थी और तभी आरोपी के शस्त्र लाइसेंस के लिए पुलिस रिपोर्ट भी भेजी गई थी।
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जिला प्रशासन की पड़ताल में सामने आया है कि आरोपी लल्लन के नाम दो शस्त्र लाइसेंस हैं। डीबीबीएल गन का लाइसेंस उसने एक जून 1979 को बनवाया था, जिसकी पुलिस रिपोर्ट हसनगंज कोतवाली से लगी थी।
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वहीं, दूसरी एनपी बोर रायफल का लाइसेंस उसने एक जुलाई 1980 को बनवाया था। हालांकि 25 अगस्त 1992 को तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट ने लल्लन के दोनों शस्त्र लाइसेंस निलंबित कर दिए थे।
Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद आरोपी ने डीएम के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की। 29 अप्रैल 1994 को हाईकोर्ट ने तत्कालीन डीएम के आदेश को स्थगित कर शस्त्र लाइसेंस बहाल कर दिए थे। इसके बाद से आरोपी दो शस्त्र लेकर घूम रहा था।
Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
दूसरी ओर, 30 साल से पुलिस की ओर से लल्लन के शस्त्र लाइसेंसों को निरस्त करने के लिए कोई पैरवी ही नहीं की गई। इसी के चलते लल्लन की लाइसेंसी रायफल से तीन लोगों की हत्या कर दी गई।
Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
मुकदमों की भरमार, फिर भी शांत रही पुलिस
लल्लन ने काकोरी निवासी हबीब की हत्या कर दी थी। तीन दिन बाद हबीब का शव एक भट्ठे पर मिला था। उसके खिलाफ पहली एफआईआर काकोरी थाने में हत्या की दर्ज हुई थी।
लल्लन ने काकोरी निवासी हबीब की हत्या कर दी थी। तीन दिन बाद हबीब का शव एक भट्ठे पर मिला था। उसके खिलाफ पहली एफआईआर काकोरी थाने में हत्या की दर्ज हुई थी।
Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
लल्लन पर काकोरी थाने में दो, वजीरगंज में एक, चौक में सात, हरदोई के गोकुल बेहटा थाने में एक और मलिहाबाद कोतवाली में सात मुकदमे दर्ज हैं। अब सवाल ये है कि आरोपी के खिलाफ मुकदमों की भरमार थी, इसके बावजूद उसके शस्त्र लाइसेंसों को निरस्त क्यों नहीं कराया गया?
Lucknow Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
पैमाइश के वक्त छह फीट जमीन को लेकर हुआ विवाद, मां-बेटे समेत तीन की हत्या
आपको बता दें कि लखनऊ के मलिहाबाद के मोहम्मदनगर तालुकेदारी गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान छह फीट जमीन को लेकर हुए विवाद में शुक्रवार को हिस्ट्रीशीटर ने अपने बेटे और साथियों संग मिलकर घर में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मां-बेटे और चचेरे भाई की हत्या कर दी। असलहा लहराते हुए आरोपी फरार हो गए।
आपको बता दें कि लखनऊ के मलिहाबाद के मोहम्मदनगर तालुकेदारी गांव में जमीन की पैमाइश के दौरान छह फीट जमीन को लेकर हुए विवाद में शुक्रवार को हिस्ट्रीशीटर ने अपने बेटे और साथियों संग मिलकर घर में घुसकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाकर मां-बेटे और चचेरे भाई की हत्या कर दी। असलहा लहराते हुए आरोपी फरार हो गए।
Lucknow Triple Murder
- फोटो : अमर उजाला
सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात कैद हो गई। घटना की सूचना पर पुलिस कमिश्नर समेत अन्य अधिकारी, फोरेंसिक टीम और प्रशासन के अफसर मौके पर पहुंचे। एफआईआर दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मुख्य आरोपी समेत अन्य की तलाश में पांच टीमें लगाई गई हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
गांव निवासी हिस्ट्रीशीटर लल्लन खान का गांव के ही रहने वाले फरीद खान (लल्लन के रिश्ते में दामाद) से जमीन का विवाद चल रहा था। इस जमीन में दो और भी हिस्सेदार हैं। शुक्रवार को मीठेनगर में विवादित जमीन की पैमाइश होनी थी। फरीद के अलावा अन्य दोनों पक्षों के लोग मौके पर मौजूद थे। वहां पैमाइश के दौरान छह फीट जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया।
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- फोटो : अमर उजाला
विवाद की जानकारी होते ही बीच रास्ते से फरीद वापस घर लौट गए थे। उधर, लल्लन इस विवाद के पीछे फरीद की साजिश मान रहा था। वह वहां से तुरंत (करीब साढ़े तीन बजे) अपने बेटे फराज खान व अन्य साथियों के साथ थार से फरीद के घर पहुंच गया। वे ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने लगे। इसमें फरीद के (15) वर्षीय बेटे हंजला, पत्नी फरहीन (35) और बीच-बचाव करने पहुंचे फरीद के चाचा मुनीर (55) को गोलियां लग गईं। मौके पर ही तीनों की मौत हो गई। पुलिस ने लल्लन के ड्राइवर अशरफी को गिरफ्तार कर लिया है। लल्लन और उसका बेटा अभी फरार हैं।