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लखनऊ: लोहिया संस्थान में काम पर लौटे सीनियर डॉक्टर, जूनियरों की हड़ताल जारी, कल गेट पर जड़ दिया था ताला
Thu, 22 Aug 2024 02:00 PM IST
रोहित मिश्र
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
अमर उजाला सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
Published by: रोहित मिश्र
Updated Thu, 22 Aug 2024 02:00 PM IST
सार
लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में गुरुवार को सीनियर डॉक्टरों ने मरीजों को देखना शुरू कर दिया है। बुधवार को यहां ताला जड़ दिया गया था।
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लोहिया अस्पताल में हड़ताल पर बैठे डॉक्टर
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विस्तार
कोलकाता की घटना को लेकर पूरे देश में डॉक्टरों में आक्रोश है। इस बीच गुरुवार को लोहिया संस्थान की ओपीडी मामूली रूप से बहाल हुई। सीनियर डॉक्टरों ने मरीज देखने शुरू कर दिए। दूसरी तरफ जूनियर डॉक्टरों का धरना अभी भी जारी है। डॉक्टरों के हड़ताल करने से ओपीडी में लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। इसे पहले बुधवार को डॉक्टरों ने पूरी तरह से काम बंद कर रखा था।
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बुधवार को जड़ दिया था ताला
कोलकाता में डॉक्टर के साथ हुई बर्बरता की आड़ में रेजिडेंट डॉक्टरों की अराजकता भी शुरू हो गई है। डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में बुधवार को रेजिडेंट डॉक्टरों ने मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया था। इससे आक्रोशित मरीजों और तीमारदारों ने संस्थान के सामने की मुख्य सड़क पर जाम लगा दिया। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मरीजों-तीमारदारों को समझाकर जाम खुलवाया।
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बुधवार सुबह बारिश हो रही थी। बारिश के बीच सुबह 8 बजे किसी तरह मरीज और तीमारदार लोहिया संस्थान पहुंचे। रेजिडेंट डॉक्टरों ने यहां पर पहले ही ताला जड़ा हुआ था। मरीजों और तीमारदारों ने कुछ देर इंतजार किया। जब किसी ने गेट नहीं खोला तो उनका धैर्य जवाब दे गया। उन्होंने मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। बारिश की वजह से वाहनों का दबाव थोड़ा कम था, लेकिन मुख्य मार्ग होने की वजह से कुछ ही देर में वहां जाम लग गया। इस पर मौके पर पुलिसकर्मी पहुंच गए। उन्होंने मरीज और तीमारदारों को समझाया, साथ ही संस्थान का मुख्य गेट खुलवाया। इस बीच करीब आधे घंटे तक मुख्य मार्ग पर जाम लगा रहा। मरीज और तीमारदार संस्थान परिसर तो पहुंच गए, पर ओपीडी परिसर में भी ताला लगा हुआ था। हताश होकर मरीज और तीमारदार वहीं बैठ गए।
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उपमुख्यमंत्री को दूसरे गेट से जाना पड़ा
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सुबह लोहिया संस्थान जाना था। मुख्य गेट पर ताला जड़े होने की वजह से वे भी फंस गए। उनको घूमकर तीन नंबर गेट से जाना पड़ा।
कार्रवाई नहीं होने से बढ़ी अराजकता
राजधानी के अन्य संस्थानों में भी रेजिडेंट डॉक्टरों की हड़ताल चल रही है, लेकिन लोहिया संस्थान जैसी अराजकता कहीं नहीं है। संस्थान में मंगलवार को रेजिडेंट डॉक्टरों ने ओपीडी बंद कराने के लिए काउंटर पर काफी अभद्रता की थी। इसकी वजह से ओपीडी काउंटर के शीशे चटक गए थे। इस मामले में संस्थान प्रशासन ने जानबूझकर आंख मूंद ली। इसका नतीजा यह हुआ कि बुधवार को रेजिडेंट पूरी तरह से अराजक हो गए।
केजीएमयू में सीनियर फैकल्टी ने संभाली कमान, पर वार्ड में हो रही समस्या
लोहिया संस्थान की तरह केजीएमयू में भी रेजिडेंट की हड़ताल जारी है, लेकिन यहां सीनियर फैकल्टी ने ओपीडी का संचालन पूरी तरह से अपने हाथों में ले रखा है। यही वजह है कि यहां पर रेजिडेंट के प्रदर्शन के बावजूद ओपीडी का संचालन हो रहा है। केजीएमयू में बुधवार को कुल 3748 मरीज देखे गए। हड़ताल की वजह से मरीज भी कम आ रहे हैं, लेकिन जो पहुंच रहे हैं उनको इलाज मिल रहा है। हालांकि वार्डों में भर्ती मरीजों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। आमतौर पर सीनियर फैकल्टी सिर्फ राउंड लेते हैं, लेकिन वार्ड में नियमित तौर पर सिर्फ रेजिडेंट ही रहते हैं। उनके हड़ताल पर होने की वजह से नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ के भरोसे इलाज चल रहा है।
सर्जरी की संख्या में आई कमी
केजीएमयू में ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। सामान्य दिनों में यहां औसतन 250 छोटे-बड़े ऑपरेशन होते हैं। हड़ताल की वजह से इनकी संख्या 200 से नीचे पहुंच गई है। सर्जरी के बाद पोस्ट ऑपरेटिव देखभाल में रेजिडेंट की ही मुख्य भूमिका रहती है। उनके हड़ताल पर होने की वजह से मरीजों की देखभाल करने वालों की संख्या कम हो गई है। इसकी वजह से पहले से तय ऑपरेशन टल रहे हैं।
रक्तदान करके जताया विरोध
केजीएमयू और लोहिया संस्थान में बुधवार को रेजिडेंट डॉक्टरों ने रक्तदान करके विरोध जताया। केजीएमयू की ओर से हुए रक्तदान शिविर में कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद भी पहुंचीं। उनके साथ शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. केके सिंह ने भी रेजिडेंट डॉक्टरों के कैंपेन ''जस्टिस फॉर अभया'' का समर्थन किया।