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Lucknow: अकबरनगर का दर्द... हमारे साथ क्यों हुई नाइंसाफी... 1300 परिवारों की खुशियों पर चला था बुलडोजर

Wed, 17 Jul 2024 07:38 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Wed, 17 Jul 2024 07:38 PM IST
सार

अकबरनगर के लोगों ने कुकरैल रिवरफ्रंट पर मकानों को ध्वस्त करने की कार्रवाई रुकवाने पर मुख्यमंत्री योगी की प्रशंसा की पर यह सवाल भी उठाया कि उनके साथ नाइंसाफी क्यों हुई?

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Lucknow: People of Akbarnagar says why did injustice happen to us.
अकबरनगर से दुबग्गा स्थित पीएम आवास में विस्थापित हुए लोग। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रहीमनगर, खुर्रमनगर, पंतनगर, इंद्रप्रस्थनगर, अबरारनगर के बाढ़ जोन में शामिल निजी मकानों पर लाल निशान लगाने का कोई औचित्य नहीं है। मकान नहीं टूटेंगे, निश्चिंत रहें और खुश होकर घर जाएं। सीएम के इस वादे की खबर उजड़ चुके अकबरनगर के कारोबारियों व परिवारों तक पहुंची तो उन्होंने भी इसे सराहा। हालांकि, यह सवाल भी उठाया कि तो फिर उनके साथ नाइंसाफी क्यों की गई।

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अकबरनगर में 110 कारोबारियों और 35 सालों से रह रहे 1300 परिवारों की खुशियों पर बुलडोजर चला दिया गया। यहां के परिवार भी सीएम से न्याय की आस लगाए थे, पर भाग्य ने साथ नहीं दिया। फिर भी कहा, उनसे कोई शिकायत नहीं, क्योंकि 2200 परिवारों को उजड़ने से बचाकर परोपकार किया है।
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दायरा तय हो जाता तो बच जाता अकबरनगर
मकान व शोरूम गंवा चुके फैजी कहते हैं कि कुकरैल की बीच धारा से दोनों तरफ का दायरा तय हो जाता तो उनका अकबरनगर भी बच जाता। एलडीए ने 200 मीटर से अधिक दायरे में जितने निर्माण थे, सब पर बुलडोजर चला दिया। कारोबारी कुकरैल किनारे दीवार बनाने की मांग करते रहे, पर प्रशासन ने उनकी एक न सुनी। मुख्यमंत्री ने 35 मीटर के दायरे में ही कार्रवाई के निर्देश दिए थे। अब अफसरों की मनमानी से हुए नुकसान की भरपाई कैसे होगी।
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झोपड़पट्टी हटाकर ही बन जाता कुकरैल रिवरफ्रंट
अकबरनगर में करीब पांच करोड़ की चोट खा चुके कारोबारी सुहैल हैदर अलवी का कहना है कि एक बार उनकी भी सुन ली जाती तो झोपड़पट्टी हटाकर ही कुकरैल रिवरफ्रंट बन जाता। इसके लिए कारोबारियों व परिवारों को उजाड़ने की जरूरत नहीं पड़ती। सुहैल बताते हैं कि अकबरनगर का पुल 100 मीटर व पीएसी मुख्यालय के सामने महानगर का 55 मीटर एवं भीखमपुर का 95 मीटर लंबा है। 35 मीटर के दायरे में महज वे झोपड़पट्टियां ही आ रही थीं, जो तीन-चार साल में बढ़ी थीं।

यूं बयां किया दर्द: मालिक से बन गए किरायेदार
कारोबारी यूसुफ अकबर का कहना है कि मेरा 10 लोगों का परिवार खुशहाल जीवन जी रहा था। अब तीन मंजिला मकान व शोरूम जमीदोंज हो चुका है। मकान मालिक से किरायेदार बन गए है। बसंतकुंज में गुजर कर रहे हैं। चिनहट के सतरिख रोड पर फर्नीचर का कारखाना किराये पर खोला है। रोजाना 25 किमी जाना पड़ता है।


200 मीटर के दायरे के दुकान-मकान ध्वस्त किए
कारोबारी सैयद हमीदुल बारी का कहना है कि अकबरनगर को ढहाने में दूरी का पैमाना ही नहीं लिया। 25 से ज्यादा बड़े कारोबारियों में से सभी को औसतन पांच-पांच करोड़ का नुकसान हुआ है। यहां के लोगों को मरते दम तक अफसोस रहेगा कि उनके साथ यह नाइंसाफी क्यों की गई।

एक नजर में अकबरनगर
110 कारोबारी, फर्नीचर इंडस्ट्री का था बड़ा हब
100 करोड़ सालाना था कारोबारियों का कारोबार
1300 परिवारों के उजड़े थे आशियाने

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