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Lucknow News : मुख्तार के बेटे उमर अंसारी के अग्रिम जमानत पर हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Thu, 15 Dec 2022 12:23 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 15 Dec 2022 12:23 AM IST
सार
उमर अंसारी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को दस दिनों में जवाब देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।
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मुख्तार अंसारी का बेटा उमर
- फोटो : amar ujala
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने मुख्तार अंसारी के बेटे उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सरकार से जवाब मांगा है। उमर अंसारी पर हजरतगंज क्षेत्र के जियामऊ की शत्रु संपत्ति पर कब्जा करके उसे धोखाधड़ी से अपने व अपने भाई तथा पिता मुख्तार अंसारी के नाम कराने का आरोप है। उमर अंसारी ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर न्यायालय ने राज्य सरकार को दस दिनों में जवाब देने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जनवरी को होगी।
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यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने उमर अंसारी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। अभियुक्त की ओर से उपस्थित अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि जिस शत्रु संपत्ति को धोखाधड़ी से अपने नाम कराने का आरोप उमर अंसारी पर है वह उसके जन्म से भी पहले उसके पूर्वजों के नाम हस्तांतरित हो चुकी थी। अग्रिम जमानत का राज्य सरकार की ओर से अपर शासकीय अधिवक्ता राव नरेंद्र सिंह ने विरोध किया।
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अभियोजन पक्ष का कहना है कि मामले की रिपोर्ट लेखपाल सुरजन लाल ने 27 अगस्त 2020 को थाना हजरतगंज में दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि मुख्तार अंसारी व उसके बेटों अब्बास अंसारी और उमर अंसारी ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सरकारी निष्क्त्रसंत भूमि पर अपराधिक साजिश के तहत एलडीए से नक्शा पास कराकर कब्जा कर लिया तथा उक्त भूमि पर अवैध निर्माण भी कर लिया गया है। आरोप लगाया गया कि जियामऊ स्थित जमीन मोहम्मद वसीम के नाम से दर्ज थी जो बाद में पाकिस्तान चला गया।
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आरोप है कि बाद में उक्त जमीन बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के लक्ष्मी नारायण के नाम दर्ज हो गई और उसके बाद कृष्ण कुमार के नाम दर्ज हो गई। आरोप है कि अभियुक्त उमर अंसारी, अब्बास अंसारी और मुख्तार अंसारी ने उक्त ज़मीन को हड़पने के लिए एक पूर्व नियोजित आपराधिक योजना के तहत इस काम को अंजाम दिया। अभियोजन द्वारा आरोप लगाया गया है कि मामले में माफिया मुख्तार अंसारी ने अनुचित दबाव डालकर अपने व अपने बेटों के नाम से शत्रु संपत्ति को दर्ज करा लिया है।